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सेक्टर 9 हॉस्पिटल बचाओ: 14 जुलाई के प्रदर्शन को सफल बनाने अभियान तेज, परिवार संग आइए

Azmat ali 13/07/2026 1 minute read
Save Sector 9 Hospital Campaign Intensifies to Make the July 14 Protest a Success come with your Families
  • अस्पताल का निजीकरण: किसके लिए लाभ, किसके लिए नुकसान? बीएसपी की संयुक्त ट्रेड यूनियन चला रही अभियान।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेक्टर 9 हॉस्पिटल को निजीकरण से बचाने का अभियान चल रहा है। 14 तारीख को सेक्टर 9 हॉस्पिटल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। सेल अस्पतालों के निजीकरण से सबसे अधिक लाभ निजी कंपनियों, बड़े निवेशकों और कॉरपोरेट अस्पतालों को होता है, क्योंकि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से अधिकतम मुनाफा कमाना होता है। इसके विपरीत आम मरीज, गरीब, मध्यम वर्ग तथा कर्मचारी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि इलाज का खर्च कई गुना बढ़ जाता है। आज अनेक निजी अस्पतालों में सामान्य उपचार से लेकर ऑपरेशन तक के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जिससे इलाज आम लोगों की पहुँच से बाहर हो जाता है।

ऐसी होती है निजी अस्पताल की व्यवस्था

निजी अस्पतालों की व्यवस्था का लाभ उन लोगों को मिलता है जो महंगा इलाज कराने में सक्षम हैं। उन्हें अपेक्षाकृत जल्दी और सुविधाजनक सेवाएँ मिल जाती हैं। लेकिन गरीब और सीमित आय वाले मरीजों को इलाज के लिए कर्ज लेना पड़ता है या कई बार अपनी जमीन, मकान अथवा गहने तक बेचने पड़ जाते हैं। गंभीर बीमारी की स्थिति में पूरा परिवार आर्थिक संकट में फँस जाता है।

क्यों जरूरी है सार्वजनिक अस्पताल

सार्वजनिक अस्पतालों का सबसे बड़ा लाभ गरीब, मध्यम वर्ग, कर्मचारी, पेंशनभोगी और ग्रामीण जनता को मिलता है, क्योंकि यहाँ कम खर्च या निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध होती हैं। हालांकि यदि सरकार पर्याप्त निवेश नहीं करती, तो संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को लंबी प्रतीक्षा, स्टाफ की कमी और सुविधाओं के अभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों में कम लागत पर ऑपरेशन, दवाइयाँ और आपातकालीन सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।

सार्वजनिक अस्पतालों की चुनौतियाँ

यदि सरकार सार्वजनिक अस्पतालों में पर्याप्त निवेश करे तो पूरे समाज को इसका लाभ मिलता है। लेकिन निवेश की कमी होने पर भीड़ बढ़ती है, डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी रहती है तथा आवश्यक उपकरणों का अभाव हो जाता है। इसलिए समाधान अस्पतालों का निजीकरण नहीं, बल्कि डॉक्टरों, नर्सों, दवाइयों और आधुनिक उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

ये है वास्तविक सवाल

वास्तविक प्रश्न यह है कि निजीकरण से निजी संस्थानों का मुनाफा बढ़ता है, जबकि स्वास्थ्य सेवा एक अधिकार से बदलकर व्यापार बन जाती है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि जनसेवा करना होना चाहिए। इसलिए इन क्षेत्रों को सार्वजनिक हित के आधार पर मजबूत बनाया जाना आवश्यक है।

संयुक्त ट्रेड यूनियनों का मत

संयुक्त ट्रेड यूनियनों का मत है कि यदि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जाए तो सभी नागरिकों को सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। इसके विपरीत अस्पतालों के निजीकरण से सामाजिक असमानता बढ़ेगी और स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ेगा। इसलिए सेक्टर-9 जैसे सार्वजनिक अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने के बजाय उन्हें अधिक संसाधन, आधुनिक सुविधाएँ और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराकर मजबूत बनाया जाना चाहिए।

संयुक्त ट्रेड यूनियन, भिलाई जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र सेक्टर 9 अस्पताल के निजीकरण के खिलाफ 14 जुलाई को शाम छः बजे होने वाले प्रदर्शन में आम नागरिकों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों से अपील करता है कि इस प्रदर्शन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

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