- ईडी संग प्रभारी सीजीएम जेएन ठाकुर, जीएम वर्क्स संजय द्विवेदी, जीएम विकास चंद्रा कैंटीन में मौजूद कार्मिकों से फीडबैक लिए।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। मोदी सरकार की नीतियों और 4 लेबर कोर्ड के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल का असर भिलाई स्टील प्लांट में नहीं पड़ा। लेकिन, प्रबंधन की जेब ढीली हो गई। पिछले साल की तुलना में इस बार भारी बचत भी हुई है। पिछले साल केंद्रीयकृत व्यवस्था की वजह से नाश्ते-खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठे थे। साथ ही 23 लाख रुपए का बिल फटा था।
इस बार करीब 7 से 8 लाख रुपए तक बिल पहुंचने की संभावना है। फायदा ये हुआ कि हड़ताल का हिस्सा नहीं बनने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को कैंटीन में गर्मा-गर्म ताज़ा नाश्ता नसीब हुआ। बिल्डिंग नंबर 2 में करीब 2 हजार कार्मिकों के लिए व्यवस्था थी। इसलिए यहां लाइन लगानी पड़ी। इसको लेकर कुछ यूनियन नेताओं का जमीर जाग गया। पर्सनल विभाग के कार्मिकों को खुद नाश्ता सर्व करना पड़ा।

हड़ताल को नकारकर ड्यूटी पहुंचे कार्मिकों ने प्लांट के प्रोडक्शन को सुचारू रखा। उन्हें नाश्ता और भोजन समय पर मिल रहा है या नहीं, इसकी जांच करने खुद ईडी एचआर पवन कुमार कैंटीनों में पहुंचे। बीआरएम और कोक ओवन कैंटीन में उन्होंने अधिकारियों के साथ नाश्ता पोहा-चना और खाना चावल-छोला चेक किए।
प्रभारी सीजीएम जेएन ठाकुर, जीएम वर्क्स संजय द्विवेदी, जीएम स्टील एंड कैंटीन के. सुपर्णा, जीएम विकास चंद्रा आदि भी साथ रहे। कैंटीन में मौजूद कार्मिकों से फीडबैक लिए। कैंटीन स्टाफ के सेवाभाव की तारीफ की गई। प्रबंधन की नजर में सारी व्यवस्था टॉप की थी।

हड़ताल को लेकर अंडर करंट न होने के बाद भी बीएसपी प्रबंधन ने तमाम व्यवस्था कर रखा था। बोकारो स्टील प्लांट की घटना से सबक लेते हुए कैंटीन को ही मजबूत किया गया, ताकि विपरित परिस्थिति में नाश्ता-भोजन सबको मिलता रहे।
बीएसपी प्रबंधन ने नाश्ते के लिए 15 रुपए और भोजन के लिए 35 रुपए तय किया है। गुरुवार सुबह 11 हजार नाश्ते और 9 हजार लोगों के लिए खाने का इंतजाम कैंटीन में किया गया। नाश्ते में जनरल और नाइट शिफ्ट वालों पर फोकस किया गया।











