भोर में 4 बजे घर से निकलते हैं मजदूर, फिर भी लग जाती है देरी। गेट समय पर न खुलने से बढ़ी परेशानी। CISF खोले 5 बजे गेट।
- परेशान श्रमिकों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए मानवीय आधार पर जोरातराई गेट खोलने की मांग की।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट के जोरातराई स्थित गेट नंबर-17 को लेकर ठेका श्रमिकों ने अपनी परेशानी सामने रखी है। दूर-दराज के गांवों से साइकिल से आने वाले श्रमिकों का कहना है कि गेट देर से खुलने के कारण उन्हें रोजाना कार्यस्थल पहुंचने में देरी का सामना करना पड़ रहा है। इससे बायोमेट्रिक अटेंडेंस तक प्रभावित हो रही है।
प्रथम पाली में ड्यूटी करने वाले कई श्रमिक सुबह चार बजे से ही अपने घरों से निकल पड़ते हैं। मोरिद, महका, उतई, सेलूद, पतोरा, डुंडेरा, कातरो और उमली जैसे गांवों से साइकिल चलाकर वे भिलाई स्टील प्लांट पहुंचते हैं। करीब 30 से 40 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करते हैं। इसके बावजूद उन्हें गेट नंबर-17 के बाहर इंतजार करना पड़ता है।
श्रमिकों का कहना है कि जोरातराई गेट सुबह करीब साढ़े पांच बजे के बाद खोला जाता है। तब तक बड़ी संख्या में कर्मचारी बाहर खड़े रहते हैं। गेट खुलने के बाद उन्हें यूनिवर्सल रेल मिल, रेल मिल, वायर रॉड मिल, बीआरएम, एसएमएस-3 और मर्चेंट मिल जैसे विभिन्न विभागों तक पहुंचना होता है। गेट से इन कार्यस्थलों की दूरी अधिक होने के कारण कई बार वे समय पर नहीं पहुंच पाते।
ठेका श्रमिकों ने बताया कि बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू होने के कारण सुबह छह बजे से पहले कार्यस्थल पहुंचना जरूरी होता है। गेट देर से खुलने पर उनकी उपस्थिति और समयपालन प्रभावित होता है, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं होती।
श्रमिकों का दावा है कि उन्होंने कई बार सीआईएसएफ के जोरातराई गेट प्रभारी से समय में बदलाव की मांग की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। इससे कर्मचारियों में निराशा बढ़ रही है। परेशान श्रमिकों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए मानवीय आधार पर गेट नंबर-17 को सुबह पांच बजे खोलने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि गेट आधा घंटा पहले खोल दिया जाए तो वे आराम से अपने-अपने कार्यस्थलों तक पहुंच सकेंगे और प्रथम पाली की ड्यूटी समय पर शुरू कर पाएंगे। श्रमिकों ने उम्मीद जताई है कि सीआईएसएफ और प्रबंधन उनकी समस्या को संवेदनशीलता से समझेंगे और ऐसा समाधान निकालेंगे, जिससे रोजाना की यह परेशानी समाप्त हो सके।
सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करने के बाद सीआइएसएफ गेट खोल सकता है। हड़ताल के समय रात में 3 बजे गेट खोलकर सभी मजदूरों को अंदर जाने दिया जाता है। गेट पास चेक करने के बाद सबको अंदर जाने दिया जाता है। इसलिए सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए भोर में 5 बजे गेट खोलने की मांग की जा रही है ताकि 6 बजे तक मजदूर अपने-अपने कार्यस्थल पर पहुंच सकें।

