12 February Strike: जब कानून 8 घंटे के बजाय 12 घंटे की ड्यूटी लागू करेगा, तब भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्मिक भी आएंगे लपेटे में

12 February Strike When the Law Imposes 12-hour Duty Instead of 8 Hours Bhilai Steel Plant Workers will also be Affected (1)
  • सीटू नेताओं ने हड़ताल को लेकर तेज किया प्रचार अभियान। कहा-पूंजीपति मित्रों के लिए बदला जा रहा है काम के घंटे की परिभाषा।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल है। इसकी तैयारियों में भिलाई स्टील प्लांट की ट्रेड यूनियनें जुटी हैं। यूनियन नेताओं ने प्रचार अभियान को तेज कर दिया है। आम नागरिकों और कर्मचारियों के बीच मैसेज दिए जा रहे हैं।

यूनियन नेताओं ने कहा-पूरे देश की ऐसी की तैसी करके भी हर हाल में अंबानी एवं अदानी को लाभ पहुंचाने के मकसद से शासन चला रही केंद्र सरकार अपने पूंजीपति मित्रों को अकूत मुनाफा कमाने के लिए बनाए गए नीतियों के तहत काम के घंटे की परिभाषा बदली जा रही है।

इस परिभाषा में एक तरफ कहा जा रहा है कि सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा कार्य नहीं कराया जाएगा। वहीं, दूसरी तरफ एक दिन में 12 घंटे तक भी काम करने का प्रावधान किया जा रहा है। काम के घंटे के लिए लिखे गए कानून में सब कुछ गोलमोल किया गया है।

8 घंटे काम के पीछे क्या है वैज्ञानिक दृष्टिकोण

1886 के पहले काम के घंटे का कोई निर्धारण नहीं था। कर्मियों से 12 से 18 घंटे तक काम लिया जाता था। कार्य के दौरान दबाव के कारण मौत हो जाने की घटनाएं भी सामने आई थी। एक मई 1886 को काम के घंटे को लेकर अमेरिका में शिकागो के हे मार्केट में बहुत बड़ा आंदोलन संगठित हुआ।

इस आंदोलन के दौरान शासन के दमन के कारण कुछ लोगों की मौत भी हो गई। चार नेतृत्वकारी साथियों को मौत की सजा दी गई उसके बाद यह निर्धारित किया गया कि 8 घंटे ही काम करेंगे‌। यह आंदोलन पूरे विश्व में फैल गया और लेनिन ने इस बात को मजबूती से पेश किया कि काम के घंटे अब से 8 घंटे ही होंगे।

उसके पीछे वैज्ञानिक तर्क गया था दिन के 24 घंटा होते हैं उसमें से 8 घंटा काम, 8 घंटा आराम एवं 8 घंटा स्वयं के लिए एवं अन्य दूसरे कामों के लिए समय निकालना था। इसी तर्क पर अब तक पूरी दुनिया में यह नियम चल रहा है।

12 घंटे काम को किस तरह परिभाषित कर सकता है उपयुक्त सरकार

वर्तमान केंद्र सरकार ने 12 घंटे के कार्य दिवस को परिभाषित करते हुए कहा है कि उपयुक्त सरकार अर्थात ऐप्रोपिएट गवर्नमेंट समय-समय पर इसका निर्धारण कर सकती है। कार्य दिवस में रेस्ट अर्थात आराम देने वाले समय को अलग करके काम करने वाले समय को ही कार्य दिवस में लिए जाने की बात कही जा रही है।

अर्थात उदाहरण के लिए एक कर्मचारियों को लगातार 3 घंटा कार्य करने के बाद 2 घंटे का आराम दिया जाए। उसके बाद 3 घंटा काम कर फिर 2 घंटे आराम दिया जाए। इसके बाद फिर 2 घंटा काम कराया जाए तो उक्त कर्मचारी को 12 घंटा काम के लिए रोक लिया जाएगा। किंतु कार्य के घंटे 8 ही गिने जाऐंगे। इस तरह का छलावा कर्मियों को 12-12 घंटे तक संयंत्र में रुकने के लिए मजबूर कर देगा।

पूरी दुनिया में चल रहा है 6 घंटे के कार्य दिवस का संघर्ष

वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन बढ़ती बेरोजगारी के समाधान करने तथा कर्मियों से उचित राहत के साथ काम लेने के दृष्टिकोण से छः घंटे कार्य दिवस के साथ चार शिफ्ट चलाने एवं 5 दिन का सप्ताह मानकर दो दिन का अवकाश देने की बात कहते हुए पूरे विश्व में संघर्ष कर रहा है।

वही हमारे देश की केंद्र सरकार ठीक इसके विपरीत 12 घंटे के कार्य दिवस की वकालत करते हुए श्रमिकों का श्रम लूटने के नए-नए तरीके इजात कर रहा है।

क्या संयंत्र में लागू हो सकती है इस तरह की व्यवस्था

कर्मचारियों के बीच लेबर कोड के लागू होने से आने वाले परिणाम को लेकर हो रहे चर्चा में पूछे गए सवालों का उत्तर देते हुए सीटू नेताओं ने कहा कि जब देश का कानून आठ घंटे के बजाय 12 घंटे के कार्य दिवस को लागू करेगा, तब भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्य करने वाले ठेका श्रमिकों के साथ-साथ स्थाई कर्मी पर यह नियम लागू किया जाएगा। और हवाला दिया जाएगा कि यह देश का कानून है जो सब पर एक समान लागू होगा। इसीलिए भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मी इससे अछूता नहीं रहेंगे।