- लगभग 37 दुकानों की फाइल 9 तारीख को डबल बेंच में फाइल होने वाली है।
- अब दुकान पट्टेदारों के पास बीएसपी द्वारा की गई मांग के खिलाफ कोई मामला नहीं है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के भिलाई स्टील प्लांट के पक्ष में बिलासपुर हाईकोर्ट का आदेश आया है। 5 व्यापारियों की अपील को खारिज कर दिया गया है। व्यापारियों ने अब सुप्रीम कोर्ट में सेल बीएसपी प्रबंधन की पॉलिसी को ही चैलेंज करने की तैयारी शुरू कर दी है।
लगभग 37 दुकानों की फाइल 9 तारीख को डबल बेंच में फाइल होने वाली है। बिलासपुर हाईकोर्ट में सेल बीएसपी प्रबंधन के नवीनीकरण रेट के खिलाफ अनिल बुक डिपो, संजय मुंदडा, संजय बुक डिपो, डाक्टर वर्मा क्लिनिक समेत 5 लोग गए थे। जहां इनकी अपील को खारिज कर दिया गया हे।
स्टील सिटी चैंबर अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन का कहना है कि किसी भी व्यापारी को डरने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे। 5 दुकानदारों पर ऑडर आने के बाद आगे की रणनीति तय की गई है। इसलिए अब 42 केस लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
जिन पांच प्रकरण पर फैसला आए हैं, वे हमारे संपर्क में नहीं थे,उनके वकील अलग हैं और उनकी कहानी भी अलग है। हां थोड़ी तकलीफ बढ़ी है, लेकिन हमारे विद्वान अधिवक्ता हमारे साथ हैं। हम लोगों ने पॉलिसी को चैलेंज करने के संदर्भ में फाइल की है।
हम सब हाईकोर्ट की कार्यशैली को भली भांति जानते हैं। डबल बेंच में जाना हमारी,न्यायिक प्रक्रिया में मजबूरी है। सर्वोच्च न्यायालय हमारी बातों को ध्यान से सुनेगा और उम्मीद करते हैं कि हमारे विद्वान अधिवक्ता भी इस दिशा में पूरा प्रयास करेंगे। किसी को किसी तरह से घबराने की आवश्यकता नहीं है।
पढ़िए हाईकोर्ट ने क्या-क्या कहा
उच्च न्यालय बिलासपुर द्वारा पूर्व में 33 व्यापारियों द्वारा दायर रिट पेटिशन भी ख़ारिज किया जा चुका है। 31 अक्टूबर 2025 को पारित कोर्ट आदेश के खिलाफ दुकान पट्टेदारों द्वारा दायर की गई रिट अपील को डिवीजन बेंच ने 2 फरवरी 2026 को पारित अपने निर्णय द्वारा खारिज कर दिया है।
अब दुकान पट्टेदारों के पास बीएसपी द्वारा की गई मांग के खिलाफ कोई मामला नहीं है। अब जिन भी दुकानदारो द्वारा लीज रेंट-राजस्व नहीं पटाया गया है, भिलाई इस्पात संयंत्र एस्टेट कोर्ट के माध्यम से ऐसे दुकानदारों के विरुद्ध कुर्की की कार्रवाई कर सकता है।
डिविजन बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि SAIL द्वारा उठाई गई विवादित मांगें एक समान, बोर्ड द्वारा अनुमोदित लीज़ नवीकरण नीति पर आधारित हैं, जो सभी समान रूप से स्थित लीज़धारकों पर लागू होती है और प्रमाणित प्रोफेशनल्स द्वारा किए गए मूल्यांकन पर आधारित हैं।
एकल न्यायाधीश ने आदेश 31.10.2025 में सही कहा है कि ऐतिहासिक लीज़ दरें या पिछली रियायतें किसी सार्वजनिक प्राधिकरण को वर्तमान बाजार की वास्तविकताओं और प्रशासनिक विवेक के अनुरूप अपनी नीति को संशोधित करने से नहीं रोक सकतीं।
33 साल की लीज़ अवधि ख़त्म होने पर किरायेदारों के पास अपने‑आप (automatic) renewal का कोई अधिकार नहीं बचता, नवीनीकरण हमेशा SAIL की मर्ज़ी और नई शर्तों पर निर्भर है। SAIL बोर्ड‑approved पॉलिसी और नए valuation के आधार पर प्रीमियम, सर्विस चार्ज, ग्राउंड रेंट आदि तय कर सकता है।
पुराने कम रेट दिखाकर उसे रोका नहीं जा सकता। लीज़ ख़त्म होने के बाद सिर्फ़ किराया/occupation charge लेते रहने या conditional offer letter देने से Section 116 TPA वाला “holding over” tenancy नहीं बनती।
ये दुकानें “public premises” मानी गईं, इसलिए renewal/eviction आदि पर मुख्यत: Public Premises Act की प्रक्रिया लागू होगी। writ में Court केवल तभी दखल देगा जब साफ़ arbitrariness या mala fide दिखे, जो यहाँ साबित नहीं हुआ।
अपील (WA No. 35 of 2026) merit‑less मानकर खारिज और SAIL की मौजूदा पॉलिसी के अनुसार ही नए प्रीमियम व चार्ज भरने होंगे, पुराने terms पर renewal का कोई कानूनी अधिकार नहीं माना गया।











