12 फरवरी हड़ताल: यूनियन बोली-फिक्स्ड टर्म रोजगार हमेशा के लिए खत्म कर देगा स्थाई नौकरियों को, भिलाई स्टील प्लांट हॉस्पिटल में इंट्री

February 12th Strike Fixed Term Employment will Permanently Eliminate Permanent Jobs Entry into Bhilai Steel Plant Hospital (1)
  • संयुक्त यूनियन का बयान। छलावा है नए लेबर कोड में रोजगार को लेकर बनाए गए नियम।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ 12 फरवरी को हड़ताल है। भिलाई स्टील प्लांट की ट्रेड यूनियनों ने भी मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त यूनियन ने हड़ताल को लेकर चल रहे प्रचार के दौरान कहा कि नये लेबर कोड में रोजगार को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे सारे दावे छलावा के सिवा कुछ भी नहीं है।

सरकार दावा कर रही है कि सभी को अपॉइंटमेंट लेटर दिया जाएगा। किंतु अपॉइंटमेंट लेटर देने भर से रोजगार की सुरक्षा नहीं हो जाती है। सुरक्षा की गारंटी स्टैंडिंग ऑर्डर से मिलता है, जिसे मैनेजमेंट और श्रमिक दोनों की भागीदारी से तैयार किया जाता है। इसके प्रावधान स्टैंडिंग आर्डर, इंडस्ट्रियल एंप्लॉयमेंट स्टैंडिंग आर्डर एक्ट 1946 के तहत आते हैं, जिसे इस कोड ने रद्द कर दिया है।

देश के नागरिकों के साथ धोखा था हर साल 2 करोड़ रोजगार देने की बात

यूनियन नेताओं ने कहा-केंद्र में सत्तासीन मौजूदा सरकार सत्ता में आने के लिए हर साल 2 करोड़ नौजवानों को रोजगार देने की बात कहा था। किंतु सत्ता में आने के बाद ही उनके गृहमंत्री से पूछे जाने पर उन्होंने इसे जुमला बताते हुए देश के नौजवानों का मजाक उड़ाया।

मौजूदा हाल तो यह है कि नया रोजगार देना तो दूर करोना काल में जिन रोजगारशुदा नौजवान एवं मजदूरों ने अपनी नौकरी गवाई उन्हें उनकी गवाई हुई वही नौकरी को वापस नहीं करवा पाए है। उल्टा मनरेगा कानून को बदलकर 100 दिन के रोजगार की गारंटी को भी गांव से खत्म कर दिया जा रहा है।

चरणबद्ध तरीके से बदलता गया रोजगार का स्वरूप

यूनियन नेताओं ने बताया कि चरणबद्ध तरीके से रोजगार का रिस्ट्रक्चरिंग किया जा रहा है। पहले चरण में स्थाई नौकरियां घटाई गई और ठेका कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई दूसरे चरण में बढ़ते हुए ठेका कर्मी को स्थाई प्रकृति के काम में लाया गया जो धीरे-धीरे ऑपरेशन का काम संभालते हुए शॉप फ्लोर तक पहुंच गए।

अब तीसरे चरण में स्थाई कर्मियों के साथ-साथ ठेका कर्मियों को भी घटाया जा रहा है एवं उनके स्थान पर अप्रेंटिस ट्रेनीज को बढ़ाया जा रहा है जिन्हें केवल स्टाइपेंड देने से काम चल जाता है। अप्रेंटिस ट्रेनिंग की अवधि भी निश्चित नहीं है यह एक या दो साल से बढ़ाकर 5 साल या उससे भी अधिक समय तक भी रखा जा सकता है और उनको दिए जाने वाले स्टाइपेंड भी नियमित रूप से नहीं मिलने की घटनाएं सामने आने लगी है।

फिक्स्ड टर्म रोजगार हमेशा के लिए खत्म कर देगा स्थाई नौकरियों को

यूनियन नेताओं ने कहा कि स्थाई रोजगार कर्मी के 60 साल उम्र तक की होती है किंतु सरकार श्रम कोड में एक साल से लेकर चार साल तक की अवधि के लिए फिक्स्ड टर्म रोजगार लाया जा रहा है अर्थात जब काम होगा तब काम पर रखो जब काम नहीं होगा तो काम से निकाल दो। एक से चार साल तक काम पर रखने के बाद जब नौजवानों की नौकरी छूटेगा तो वह काम के लिए दर-दर भटकना शुरू करेंगे और अराजक स्थिति निर्मित हो जाएगी।

फिक्स टर्म अपॉइंटमेंट का स्कीम था अग्निवीर योजना भी

एनजेसीएस सदस्य वंश बहादुर सिंह ने कहा-सरकार जब सेना के अंदर अग्नि वीर योजना लेकर आई थी उस समय भी संयुक्त यूनियने इसका विरोध की थी। उस समय भी बताया गया था कि चार साल तक सेना में रखकर हथियार चलाना सीखने के बाद जब उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

और सेवानिवृत्ति सैनिक का भी दर्ज नहीं दिया जाएगा तो वह नौजवान दिशाहीन होकर अराजक दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। इसीलिए ऐसी योजनाओं को बंद कर देना चाहिए लेकिन सरकार नहीं मानी अब यही स्कीम उद्योगों में भी आ रहा है।

भिलाई में पैर पसार रहा है फिक्स्ड टर्म एम्पलाईमेंट

सीटू महासचिव टी जोगा राव ने कहा-यह स्कीम भिलाई में भी पैर पसारना शुरू कर दिया है। सेक्टर 9 अस्पताल में हिंदुस्तान लेटेक्स लिमिटेड ने नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ के लिए टी एंड एम के द्वारा लगभग 140 कर्मियों को सप्लाई में दिया है।

इनको जो अपॉइंटमेंट लेटर दिया गया है, उसमें स्पष्ट रूप से फिक्स्ड टर्म एम्पलाईमेंट का जिक्र किया गया है। अर्थात अब नर्सिंग अथवा पैरामेडिकल स्टाफ में कोई स्थाई भर्ती नहीं होगी उसके जगह ऐसे ही फिक्स्ड टर्म एम्पलाई आते रहेंगे।