33 नाबालिग बच्चों के जघन्य यौन शोषण पर 2 दोषियों को मृत्युदंड की सजा, Pornographic से जुड़ा केस, पढ़िए POCSO कोर्ट का फैसला

Two Convicts Sentenced to Death for the Heinous Sexual Abuse of 33 Minor Children Read the POCSO Courts Verdict
  • ट्रायल कोर्ट ने प्रत्येक पीड़ित को राज्य सरकार द्वारा 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया।
  • 33 नाबालिग बच्चों के जघन्य यौन शोषण के मामले में ऐतिहासिक फैसले में POCSO कोर्ट ने दो दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।

सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। 33 नाबालिग बच्चों के जघन्य यौन शोषण केस में बड़ा फैसला आया है। 2 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यौन शोषण के मामले में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विशेष न्यायाधीश, POCSO प्रकरण, बांदा, उत्तर प्रदेश की अदालत ने आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को भारतीय दंड संहिता तथा POCSO अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।
इन धाराओं में अप्राकृतिक अपराध, गंभीर प्रवेशात्मक लैंगिक अपराध, बच्चे का अश्लील उद्देश्यों के लिए उपयोग, बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री का संग्रहण, उकसावा तथा आपराधिक षड्यंत्र शामिल हैं।

ट्रायल कोर्ट ने प्रत्येक पीड़ित को राज्य सरकार द्वारा 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया। इसके अतिरिक्त, अदालत ने आरोपियों के घर से जब्त की गई नकद राशि को सभी पीड़ितों के बीच समान रूप से वितरित करने के निर्देश दिए।

Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने 31.10.2020 को आरोपी रामभवन और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध बच्चों के यौन शोषण, बच्चों का अश्लील उद्देश्यों के लिए उपयोग तथा इंटरनेट पर बाल यौन शोषण सामग्री के निर्माण और प्रसार के आरोपों में मामला दर्ज किया था।

जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपियों ने 33 बालकों के साथ विभिन्न प्रकार के गंभीर कृत्य किए, जिनमें गंभीर प्रवेशात्मक यौन हमले भी शामिल थे। कुछ पीड़ितों की आयु मात्र तीन वर्ष थी। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ बच्चों को यौन हमले के दौरान निजी अंगों में चोटें आईं और कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कुछ पीड़ितों में भेंगापन (स्क्विंट आई) विकसित हो गया।

पीड़ित बच्चे आज भी मानसिक आघात से जूझ रहे हैं। आरोपी वर्ष 2010 से 2020 के बीच उत्तर प्रदेश के बांदा और चित्रकूट क्षेत्र में सक्रिय रहे। आरोपी रामभवन सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। वह बच्चों को फंसाने के लिए ऑनलाइन वीडियो गेम की सुविधा देना, पैसे और उपहार देना जैसे विभिन्न तरीके अपनाता था।

सीबीआई ने मामले की अत्यंत सावधानी और गहनता से जांच की। नाबालिग पीड़ितों के बयान दर्ज करते समय विशेष संवेदनशीलता बरती गई तथा उनकी भावनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परामर्श (काउंसलिंग) की व्यवस्था की गई। जांच के दौरान फोरेंसिक विशेषज्ञों, बाल यौन शोषण मामलों से जुड़े चिकित्सकीय विशेषज्ञों और बाल संरक्षण प्राधिकरणों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। डिजिटल साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और प्रबंधन को भी सुनिश्चित किया गया।

जांच पूर्ण होने के बाद सीबीआई ने 10.02.2021 को आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती के विरुद्ध आरोपपत्र दायर किया। 26.05.2023 को आरोप तय किए गए।

कठोरतम सजा सुनाते हुए अदालत ने आरोपियों के कृत्यों को “दुर्लभतम से भी दुर्लभ” श्रेणी का बताया। अदालत ने कहा कि 33 नाबालिग बच्चों के सुनियोजित यौन शोषण और दुरुपयोग की प्रकृति, अपराध की व्यापकता तथा दोषियों के चरम नैतिक पतन को देखते हुए यह अपराध अत्यंत जघन्य और असाधारण है। इसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिखती, इसलिए न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु सर्वोच्च दंड आवश्यक है।

सीबीआई ने पुनः दोहराया है कि बच्चों के यौन शोषण और दुरुपयोग से जुड़े मामलों की पहचान, जांच और अभियोजन के प्रति वह पूर्णतः प्रतिबद्ध है। ऐसे अपराधों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती रहेगी।