बोकारो इस्पात संयंत्र के एमएसडीएस 7 से गेट नंबर 4 तक आरसीसी सड़क की सागात, ईडी वर्क्स ने की पूजा

ED Works Performed Puja for Construction of RCC Road from MSDS 7 to Gate No 4 of Bokaro Steel Plant
  • आरसीसी सड़कों के इस नए नेटवर्क से यह भविष्य में संयंत्र की उत्पादकता और सुदृढ़ बुनियादी ढांचे के विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा।

सूचनाजी न्यूज, बोकारो। बोकारो इस्पात संयंत्र में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, सुरक्षा मानकों में सुधार तथा परिचालन दक्षता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आरसीसी (Reinforced Cement Concrete) सड़क परियोजना का उद्घाटन अधिशासी निदेशक (संकार्य) अनुप कुमार दत्त द्वारा किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत एमएसडीएस-7 एवं इनॉक्स संयंत्र से गेट संख्या 04 तक जाने वाली सड़क को जोड़ने वाले मार्ग का नवनिर्माण किया गया है।

इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएँ) बिपिन कृष्ण सरतापे, मुख्य महाप्रबंधक (उपयोगिता) एस. आर. सिंह तथा मुख्य महाप्रबंधक (एसएमएस-II) डीके सक्सेना की उपस्थिति रही। इनके अतिरिक्त महाप्रबंधक (सीईडी) एके अविनाश, महाप्रबंधक (एसएमएस-II ऑपरेशन्स) सचिन कुमार सिंह, महाप्रबंधक (एसएमएस-2/सीसीएस ऑपरेशन्स) ए. बोस एवं पी. मरंडी सहित सिविल इंजीनियरिंग विभाग (संकार्य) के अन्य वरीय अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि एमएसडीएस-7 से गेट संख्या 04 तक का मौजूदा मार्ग गड्ढों और स्लैग जमाव के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे मानसून के दौरान जलभराव और अत्यधिक धूल की समस्या उत्पन्न होती थी। यह मार्ग भंडार सामग्री, लौह मिश्र धातु, स्क्रैप एवं दुर्दम्य सामग्री के परिवहन के साथ-साथ अग्निशमन और आपातकालीन वाहनों के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

कार्मिकों की सुरक्षा और सामग्री की निर्बाध आवागमन को प्राथमिकता देते हुए इस परियोजना के तहत तीन प्रमुख खंडों का विकास किया गया है, जिसमें सड़क संख्या 84 के साथ-साथ मैग्नेट यार्ड-1, न्यू स्लैग यार्ड और न्यू एसएमएस-II वेलफेयर बिल्डिंग से कन्वर्टर प्रवेश द्वार तक की कनेक्टिविटी शामिल है।

यह परियोजना संयंत्र के भीतर लॉजिस्टिक नेटवर्क को आधुनिक बनाने और कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बोकारो इस्पात संयंत्र की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। आरसीसी सड़कों के इस नए नेटवर्क से न केवल परिचालन संबंधी बाधाएं दूर होंगी, बल्कि यह भविष्य में संयंत्र की उत्पादकता और सुदृढ़ बुनियादी ढांचे के विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा।