सर्व सुविधायुक्त सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनाने की दिशा में प्रयास करें, बेचने अथवा निजी हाथों में देने की नौबत नहीं आएगी।
- तकनीकी और प्रशासनिक दृष्टि से सेक्टर 9 अस्पताल को एक आधुनिक “स्मार्ट” कॉर्पोरेट अस्पताल के रूप में विकसित किया जा सकता है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल के भिलाई स्टील प्लांट हॉस्पिटल को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसको किसी न किसी प्राइवेट अस्पताल को सौंप दिया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया तक की बातें सामने आ रही है। हॉस्पिटल को बचाने के लिए सीटू लगातार कुछ न कुछ सुझाव दे रहा है ताकि सुविधाएं बेहतर हो सके और प्राइवेट हाथों में जाने से बचाया जा सके।
सीटू ने कहा कि तकनीकी और प्रशासनिक दृष्टि से सेक्टर 9 अस्पताल को एक आधुनिक “स्मार्ट” कॉर्पोरेट अस्पताल के रूप में विकसित किया जा सकता है। वास्तव में सेक्टर 9 अस्पताल के पास कई ऐसी बुनियादी ताकतें पहले से मौजूद हैं, जो इसे क्षेत्र का एक अग्रणी सुपर-स्पेशियलिटी संस्थान बना सकती हैं। अभी यह अस्पताल BSP/SAIL के अधीन लगभग 800 बेड वाला बड़ा मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल है
हर तरह की मॉडर्न इक्विपमेंट से सुसज्जित है सेक्टर 9 अस्पताल
सीटू महासचिव टी जोगा राव ने कहा-आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल OPD और ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, स्मार्ट ICU और मॉड्यूलर OT, अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सिस्टम, पेपरलेस मेडिकल रिकॉर्ड (EMR इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड/EHR इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड), कैशलेस और इंश्योरेंस आधारित सेवाएँ आदि सेक्टर 9 अस्पताल में मौजूद है।
डॉक्टर और विशेषज्ञ को बढ़ाने की है जरूरत
डॉक्टर और विशेषज्ञ व्यवस्था कॉर्पोरेट अस्पताल की सबसे बड़ी ताकत होती है। सुपर स्पेशियलिस्ट डॉक्टर, 24×7 इमरजेंसी रिस्पॉन्स, तेज जांच रिपोर्ट, जवाबदेही आधारित प्रबंधन की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। सेक्टर 9 अस्पताल में पहले से अनुभवी डॉक्टर और बड़ा मेडिकल बेस मौजूद है, इसलिए इसे उन्नत करना पूरी तरह संभव है।
रिसर्च और मेडिकल एजुकेशन की दिशा में कार्य करने की है आवश्यकता
सहायक महासचिव जगन्नाथ प्रसाद त्रिवेदी ने बताया कि यदि सेक्टर 9 अस्पताल को रिसर्च और मेडिकल एजुकेशन मॉडल में विकसित किया जाए तो अस्पताल की सभी समस्याओं का हल निकाला जा सकता है। हमारे पास DNB का प्रावधान है।
साथ में PG मेडिकल एजुकेशन एवं सही दिशा में रिसर्च सेंटर को विकसित किया जाए तो यहां पढ़ने के लिए आने वाले मेडिकल स्टूडेंट अपनी पढ़ाई के साथ-साथ खुद बेहतर तरीके से मरीजों का इलाज कर पाएंगे। विशेष रूप से कैंसर, कार्डियक, ट्रॉमा और ऑक्यूपेशनल डिजीज सेंटर बनाए जा सकते हैं। BSP जैसे औद्योगिक क्षेत्र के लिए Occupational Health Institute बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है।
विभिन्न वित्तीय मॉडल पर हो सकता है विचार
सीटू ने कहा कि जब भी अस्पताल के बारे में बात करो प्रबंधन पैसे को लेकर बैठ जाता है सबसे बड़ा प्रश्न यही होता है कि पैसा कहाँ से आएगा। इसके लिए कई मॉडल संभव हैं जैसे SAIL निवेश, PPP मॉडल (Public Private Partnership), AIIMS जैसे संस्थानों से तकनीकी सहयोग, मेडिकल इंश्योरेंस आधारित आय आसपास के जिलों के मरीजों को सेवाएँ आदि।
हालांकि सीटू कभी भी पूंजी को अस्पताल में निवेश करवा कर निजीकरण की दिशा में अस्पताल को ले जाने के पक्ष में नहीं है। बावजूद इसके यदि सही ढंग से प्रबंधन हो तो यह अस्पताल केवल BSP कर्मियों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र बन सकता है।
नजर आ रही इच्छा शक्ति की कमी
किसी भी संस्था को खड़ा करने अथवा मजबूती से चलने के लिए उसके सामने बहुत सी चुनौतियां रहती हैं। सेक्टर 9 अस्पताल के पास बहुत बड़ा अस्पताल भवन है। इसीलिए भवन के दृष्टिकोण से हम निश्चित हो जाते हैं। किंतु प्रशासनिक इच्छाशक्ति, भ्रष्टाचार और ठेका मॉडल, स्टाफ की कमी, मशीनों का रखरखाव की कमी, निर्णय लेने की धीमी प्रक्रिया आदि कारणों से सरकारी/PSU अस्पताल निजी अस्पतालों से पीछे रह जाते हैं।
यदि अस्पताल के बड़े कैंपस को लेकर पूरी इच्छा शक्ति के साथ अस्पताल को सर्व सुविधायुक्त सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनाने की दिशा में प्रयास किया जाए तो इस अस्पताल को बेचने अथवा निजी हाथों में देने की नौबत नहीं आएगी।

