याचिकाकर्ता सुनील कुमार चौरसिया बोले-उच्च न्यायालय ने याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए नोटिस जारी किया है।
- एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष यमलेश देवांगन को नोटिस जारी करने का आदेश।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। तालपुरी इंटरनेशनल कॉलोनी बी-ब्लॉक का मामला अब हाईकोर्ट में पहुंच चुकी है। वर्तमान कमेटी के अध्यक्ष सुनील चौरसिया का कहना है कि पूर्व रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं एवं शासन द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध दायर रिट याचिका पर उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़, बिलासपुर में प्रारंभिक सुनवाई हुई।
एसोसिएशन के निर्वाचित अध्यक्ष सुनील कुमार चौरसिया याचिकाकर्ता हैं। इनके अधिवक्ता बीपी सिंह ने पक्ष रखा। संक्षिप्त सुनवाई के उपरांत उच्च न्यायालय ने याचिका को विचारार्थ स्वीकार करते हुए प्रतिवादी क्रमांक-4, एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष यमलेश देवांगन को नोटिस जारी करने का आदेश दिया तथा उन्हें चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
उल्लेखनीय है कि याचिका में छत्तीसगढ़ शासन के 16.07.2025 के आदेश तथा रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं संस्थाएं के 29.04.2025 के आदेश के उस भाग को चुनौती दी गई है, जिसमें नव-निर्वाचित कार्यकारिणी को पूर्व कार्यकारिणी के कार्यकाल से संबंधित विवादित क्लब हाउस की 4 वर्षों की आय जिसे आडिट से छुपाने के आरोप था।
उसका चार्टर्ड अकाउंटेंट से ऑडिट कराने का निर्देश दिया गया था। याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित वित्तीय वर्षों का वैधानिक चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑडिट पहले ही संपन्न हो चुका था तथा नई कार्यकारिणी पर पूर्व कार्यकाल के कथित अनियमितताओं का भार न डाला जाए।
याचिकाकर्ता सुनील कुमार चौरसिया का कहना है कि मैं उच्च न्यायालय का आभारी हूँ कि न्यायालय ने हमारी याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए नोटिस जारी किया है। हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को लक्ष्य बनाना नहीं, बल्कि संस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विधि के शासन को सुनिश्चित करना है।
हमारा स्पष्ट मत है कि यदि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या लेखा संबंधी विसंगति हुई है, तो उसकी जवाबदेही संबंधित अवधि के उत्तरदायी पदाधिकारियों की निर्धारित होनी चाहिए। नव-निर्वाचित कार्यकारिणी पर पूर्व कार्यकाल की जिम्मेदारी डालना न तो न्यायोचित है और न ही विधिसम्मत।
उन्होंने कहा-हमें विश्वास है कि उच्च न्यायालय के समक्ष सभी तथ्य एवं अभिलेख प्रस्तुत होने के बाद न्यायसंगत एवं विधिसम्मत निर्णय प्राप्त होगा। हम न्यायिक प्रक्रिया का पूर्ण सम्मान करते हैं और अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा करेंगे।

