सेक्टर 5 चौक पर भीड़ को हटाने के लिए पुलिस को खासा मशक्कत करनी पड़ी। बड़े-बुजुर्गों ने युवाओं को शांतिपूर्वक मौके से हटाया।
- बारिश थमते ही निकाला गया ताजिया का जुलूस।
- अखाड़े के खिलाड़ियों ने युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। मुहर्रम सिर्फ इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना नहीं, बल्कि इंसानियत, सत्य और न्याय के लिए दी गई सबसे बड़ी कुर्बानी की याद भी है। कर्बला की तपती रेत पर इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने अत्याचार के आगे सिर झुकाने के बजाय शहादत को चुना। यही वजह है कि मुहर्रम का गम केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष, इंसानियत और अमन का सार्वभौमिक संदेश बन चुका है।
देशभर में मुहर्रम पूरी अकीदत, गम और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। ताजिया जुलूस निकाला गया। शिया समुदाय ने मजलिस और मातमी कार्यक्रम किए। प्रशासन ने भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं।
मुहर्रम की 10वीं तारीख को इमाम हुसैन व उनके कुनबे के 72 साथियों की शहादत हुई थी। इसीलिए शुक्रवार को मुहर्रम पर ताजिया जुलूस निकाला गया, जो मय्यत का प्रतीक है। भिलाई में भी शुक्रवार दिन में तेज बारिश की वजह से जनजीवन प्रभावित हुआ। यही वजह था कि इमाम चौक से ताजिया का जुलूस कुछ देरी से निकाला गया। अलग-अलग क्षेत्रों से होते हुए जुलूस रात करीब 11 बजे सेक्टर 5 चौक पहुंचा।
काफी देर तक अखाड़े के खिलाड़ी युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते नज़र आए। इस बीच काफी देर तक अखाड़े के खिलाड़ी चौक पर ही जमे थे। इस बात को लेकर पुलिस अधिकारियों ने आपत्ति की। एक युवक को पुलिस कर्मियों ने समझाने की कोशिश की। देखते ही देखते युवाओं की भीड़ जुटने लगी। माहौल बिगड़ने से पहले ही पुलिस कर्मियों ने उस युवक को धक्का देकर वहां से भगाया। सीएसपी खुद पुलिस कर्मियों पर भड़के हुए थे।
युवकों का एक ग्रुप इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए शोर मचाना शुरू किया। इसी बीच बड़े-बुजुर्गों ने माहौल को बिगड़ने से संभाल लिया। सबको समझाकर वहां से जुलूस को आगे बढ़ाया। सबको यही मैसेज दिया गया कि ताजिया का जुलूस का जुलूस है। किसी तरह की बत्तमीजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद युवा आगे बढ़े और ताजिया का जुलूस रात 12 बजे तक सुपेला इमाम चौक की तरफ बढ़ता गया। पुलिस कर्मियों के धैर्य की भी प्रशंसा की गई कि माहौल को बिगड़ने से बचा लिया।

