संयुक्त यूनियन बोली-महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण और कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने आम जनता की परेशानियां बढ़ाई हैं।
- संयुक्त ट्रेड यूनियन का जोरदार प्रदर्शन संपन्न। मजदूर-किसान एकता के साथ भिलाई में गूंजा संघर्ष का नारा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। संयुक्त ट्रेड यूनियन के बैनर तले 10 अगस्त को मुर्गा चौक भिलाई में भिलाई इस्पात संयंत्र के मजदूरों तथा किसानों की ज्वलंत मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रदर्शन में इंटक, सीटू, एटक, ऐक्टू, लोइमू,एसडब्लूयू, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा कार्य समिति सहित अन्य सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने मजदूर-किसान एकता के नारे लगाते हुए केंद्र सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की।
39 माह के एरियर और वेतन समझौते की मांग
प्रदर्शन के दौरान भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों के 39 माह के लंबित एरियर का तत्काल भुगतान करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। साथ ही साथ नया वेज कमेटी गठित कर 1 जनवरी 2027 से नया वेतन समझौता लागू करने, ठेका श्रमिकों को केंद्रीय न्यूनतम वेतनमान का भुगतान सुनिश्चित करने तथा ठेका श्रमिकों की छंटनी और कटौती पर रोक लगाने की मांग की गई। दुर्घटना बीमा की राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख करने की मांग भी की गई।
ठेका प्रथा, निजीकरण और आउटसोर्सिंग का विरोध
संयुक्त ट्रेड यूनियन ने कहा कि निजीकरण, विनिवेश, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को बढ़ावा देने की नीति सार्वजनिक क्षेत्र तथा स्थायी रोजगार के लिए गंभीर खतरा है। देश की संपत्तियों का निर्माण करने वाले मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपना विकास नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने श्रमिक अधिकारों को कमजोर करने वाली चार श्रम संहिताओं के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया और श्रम अधिकारों की रक्षा की मांग की।
किसानों को कानूनी एमएसपी और कर्ज से राहत
प्रदर्शन में किसानों की मांगों को भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों की सभी प्रमुख फसलों के लिए कानूनी रूप से गारंटीकृत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम एस पी) सुनिश्चित करने, सस्ते ब्याज पर पर्याप्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने तथा सिंचाई, बीज, खाद और बिजली की समुचित व्यवस्था करने की मांग की गई। किसानों की उपज की खरीद लाभकारी समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सम्मानजनक मूल्य मिल सके। इसके साथ ही वीबी ग्राम जी कानून रद्द किया जाए। नोएडा मानेसर के गिरफ्तार मजदूरों को रिहा किया जाए।
मंडी शुल्क, अनावश्यक कर और जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ उठी आवाज
संयुक्त ट्रेड यूनियन ने कृषि उपज पर लगाए जाने वाले अनावश्यक मंडी शुल्क, टैक्स एवं अन्य शुल्कों को समाप्त करने की मांग की। किसानों की जमीन के अधिग्रहण की स्थिति में उचित मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्स्थापन सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा गया कि विकास के नाम पर किसानों की जमीन लेकर उन्हें विस्थापन और बेरोजगारी की ओर धकेलना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का संकल्प
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एक ओर सरकार ‘सबका विकास’ का नारा देती है, जबकि दूसरी ओर मजदूरों के रोजगार, किसानों की जमीन और सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण और कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने आम जनता की परेशानियां बढ़ाई हैं। संयुक्त ट्रेड यूनियन ने इन नीतियों के खिलाफ संघर्ष को और व्यापक एवं तेज करने का संकल्प व्यक्त किया।
मजदूर-किसान एकता से संघर्ष को मजबूत करने का आह्वान
संयुक्त ट्रेड यूनियन ने कहा कि मजदूर और किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। मजदूर कारखानों में उत्पादन करता है और किसान खेतों में अन्न पैदा करता है। दोनों की समस्याओं की जड़ एक ऐसी आर्थिक व्यवस्था में है, जिसमें मेहनतकश जनता पर बोझ बढ़ता जा रहा है और बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। इसलिए मजदूर-किसान एकता ही जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत है।
प्रदर्शन के अंत में संयुक्त ट्रेड यूनियन ने घोषणा की कि मजदूरों, ठेका श्रमिकों और किसानों की मांगों को लेकर संघर्ष को आगे भी जारी रखा जाएगा तथा जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। नेताओं ने प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए सभी ट्रेड यूनियनों, संगठनों, मजदूरों, ठेका श्रमिकों और समर्थकों का आभार व्यक्त किया।

