सीटू की पूर्व अध्यक्ष सविता मालवीय बोलीं-कर्मचारी की गलती पर कार्रवाई हो तो अधिकारी की लापरवाही भी न बख्शें।
- जीरो टॉलरेंस नियम पर सीटू का सवाल : नियम केवल कर्मचारियों के लिए क्यों, प्रबंधन की जवाबदेही कब तय होगी?
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन के सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग द्वारा कर्मचारियों से “जीरो टॉलरेंस नियम” के अनुपालन का लिखित आश्वासन लेकर जबरदस्ती हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं। सीटू का सवाल है कि यदि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने पर कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई तय है, तो क्या प्रबंधन भी इसी तरह लिखित आश्वासन देगा कि कर्मचारियों को सभी आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएंगी? जीरो टॉलरेंस कभी एकतरफा कार्रवाई का हथियार नहीं हो सकता।
पीपीई नहीं मिला तो जिम्मेदार अधिकारी पर भी होगी कार्रवाई?
नियमों में स्पष्ट है कि पीपीई के बिना काम नहीं किया जाएगा। हेलमेट, सुरक्षा जूते, दस्ताने, ईयर प्लग आदि उपलब्ध नहीं हैं तो कर्मचारी काम कैसे करेगा? सीटू ने पूछा कि यदि कर्मचारी सुरक्षा उपकरण लेने पहुंचता है और विभाग में पीपीई उपलब्ध नहीं है, तो क्या संबंधित सुरक्षा अधिकारी, विभागीय प्रमुख या उनके ऊपर बैठे अधिकारियों पर भी उसी “जीरो टॉलरेंस” के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी? सिर्फ कर्मचारी से शपथपत्र लेना सुरक्षा व्यवस्था नहीं है।
सुरक्षा घर से घर तक का नारा सड़कों पर क्यों गायब?
प्रबंधन का नारा है “सुरक्षा घर से घर तक”। इसका अर्थ केवल प्लांट के भीतर सुरक्षा नहीं, बल्कि कर्मचारी के घर से निकलने से लेकर प्लांट पहुंचने और वापस सुरक्षित घर लौटने तक होना चाहिए। फिर शहर एवं प्लांट की सड़कों पर गड्ढे, खराब सड़कें और आवारा मवेशियों का जमावड़ा क्यों है? बारिश में सड़कों पर बैठने वाले मवेशी कर्मचारियों के लिए दुर्घटना का गंभीर खतरा हैं। क्या सड़क और यातायात सुरक्षा की जिम्मेदारी भी “जीरो टॉलरेंस” में शामिल है?
कर्मचारियों के लिए नियमों की लंबी सूची, लेकिन प्रबंधन की जिम्मेदारियों की सूची कहां?
जीरो टॉलरेंस के 12 बिंदुओं में पी पी ई, आइसोलेशन, ऊंचाई पर कार्य, कन्फाइंड स्पेस, गैस मॉनिटरिंग, मोबाइल फोन, सीट बेल्ट, हेलमेट, गति सीमा, नशा, सेफ्टी इंटरलॉक और परमिट टू वर्क जैसी शर्तें शामिल हैं। उल्लंघन पर पहली गलती से लेकर बाद की गलतियों तक सलाह, आर्थिक दंड, चेतावनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई का पूरा प्रावधान है। लेकिन सवाल यह है कि सुरक्षा उपकरण न देने, खराब सड़क न सुधारने, गैस मॉनिटरिंग की व्यवस्था न करने या सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के लिए दंड की तालिका कहां है?
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सीटू ने कहा जीरो टॉलरेंस दोनों तरफ लागू हो
सीटू की पूर्व अध्यक्ष सविता मालवीय ने कहा कि सुरक्षा में कर्मचारी और अधिकारी दोनों बराबर जिम्मेदार हैं। कर्मचारी की गलती पर कार्रवाई हो तो अधिकारी की लापरवाही भी बख्शी नहीं जानी चाहिए। प्रबंधन पहले यह लिखित आश्वासन दे कि आवश्यक पी पी ई समय पर उपलब्ध होंगे, सड़कें सुरक्षित रहेंगी, मवेशियों से सुरक्षा की व्यवस्था होगी और सुरक्षा मानकों में कमी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। जीरो टॉलरेंस का मतलब “कर्मचारी सावधान, अधिकारी आजाद” नहीं हो सकता। सुरक्षा में नियम भी बराबर और जवाबदेही भी बराबर होनी चाहिए।
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सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर बिना जीरो टॉलरेंस नीति प्रपत्र पर जबरन हस्ताक्षर लेना अनुचित
सीटू का कहना है कि जब पूरे संयंत्र में जीरो टॉलरेंस नीति (जेडटीआर) लागू कर दी गई है, तो कर्मचारियों से बिना सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षरयुक्त प्रपत्र पर दबावपूर्वक हस्ताक्षर करवाना पूरी तरह अनुचित है। ऐसी किसी भी व्यवस्था के लिए बाकायदा सक्षम अधिकारी द्वारा सर्कुलर जारी किया जाना चाहिए।
पूर्व में भी बिना सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर युक्त प्रपत्र पर जबरदस्ती हस्ताक्षर करवाए जाने पर आईआर के संज्ञान में लाए जाने के बाद वापस लिया गया था। एनपीएस बायोमेट्रिक उपस्थिति और ईपीएफ 95 में भी इसी तरह बिना सक्षम अधिकारी द्वारा जारी सर्कुलर के हस्ताक्षर करवाए गए थे। अब जेड टी आर के नाम पर वही प्रक्रिया दोहराना कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव है।

