ममता से बड़ा इस दुनिया में शायद ही कोई रिश्ता हो… फिर उस मासूम का क्या कसूर था? सेक्टर 2 में लाश मिलने से सनसनी।
- सबसे दर्दनाक हिस्सा यह है कि जिस बच्चे की जुबान अभी खुली भी नहीं थी, वह अपनी मौत के बाद पूरे शहर से एक ही सवाल पूछ रहा है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट की टाउनशिप के सेक्टर-2 में बुधवार को एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने देखने वालों को भीतर तक हिला दिया। सड़क 11-12 के बीच बैकलेन में नाले के एक चेंबर का पत्थर हटाया गया तो भीतर करीब 8-9 माह के मासूम की लाश दिखाई दी। कुछ पल के लिए वहां मौजूद लोगों की सांसें जैसे थम गईं। जिस उम्र में बच्चे को मां की गोद की गर्माहट चाहिए होती है, जिस उम्र में उसकी दुनिया मां की धड़कनों और दुलार से शुरू होती है, उसी उम्र का एक मासूम नाले के अंधेरे चेंबर में मिला।
यह सिर्फ एक मौत नहीं… यह कई सवाल छोड़ गई
आखिर वह मासूम यहां तक कैसे पहुंचा? उसे किसने छोड़ा? वह किस मां की कोख से जन्मा था? किसकी गोद में उसने आखिरी बार आंखें खोली होंगी? और सबसे बड़ा सवाल, उस नन्ही जान का कसूर क्या था?
इन सवालों का जवाब अभी किसी के पास नहीं है। पुलिस जांच में जुटी है। इसलिए किसी मां, परिवार या व्यक्ति को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। लेकिन घटनास्थल का मंजर ऐसा था कि वहां पहुंचा हर व्यक्ति भीतर तक विचलित नजर आया।

नाली जाम थी, जांच आगे बढ़ी तो खुला खौफनाक राज
जानकारी के मुताबिक सेक्टर-2 की सड़क 12 स्थित मकान नंबर 20एफ के परिवार ने बीएसपी के पीएचई विभाग में शिकायत की थी कि नाली जाम है और पानी आगे नहीं जा रहा है। शिकायत के बाद पीएचई के कर्मचारी भुवनेश्वर और कृष्ण मौके पर पहुंचे। उन्होंने घर से लेकर बाहर तक नाली की जांच की, लेकिन शुरुआत में कहीं कोई रुकावट नजर नहीं आई। इसके बाद कर्मचारियों ने नाली की दिशा में आगे बढ़कर काफी दूर तक जांच शुरू की। झाड़ियों के बीच बने एक चेंबर के आखिरी छोर पर पहुंचे तो उसका पत्थर हटाया गया।
अंदर जो दिखाई दिया, उसे देखकर दोनों कर्मचारियों के होश उड़ गए
चेंबर में एक मासूम की लाश पड़ी थी। तुरंत इसकी सूचना सुपरवाइजर निरंजन कुमार को दी गई। निरंजन मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी पीएचई के सेक्शन इंचार्ज को दी गई। क्षेत्रीय पार्षद हरिश भी मौके पर पहुंचे। पुलिस को सूचना दी गई।

खबर फैली तो उमड़ पड़ा हुजूम
मासूम की लाश मिलने की खबर देखते ही देखते पूरे इलाके में फैल गई। आसपास के लोग घटनास्थल की ओर पहुंचने लगे। हर चेहरे पर हैरानी थी और हर जुबान पर एक ही सवाल “इतने छोटे बच्चे के साथ ऐसा कौन कर सकता है?”
लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। किसी ने मां की मजबूरी की बात कही, किसी ने इसे बेरहमी बताया तो कोई यह सोचकर ही सिहर उठा कि आखिर वह कौन-सी परिस्थिति रही होगी, जिसने इस मासूम को नाले के चेंबर तक पहुंचा दिया।
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लेकिन सच क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा
पुलिस तलाश रही है उस कहानी का आखिरी सिरा। पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और आसपास के इलाके की बारीकी से जांच शुरू की। बैकलेन में संभावित सुराग तलाशे जा रहे हैं। घटनास्थल के आसपास कदमों के निशान, कपड़े, झोले और हाल में हटाई या खोली गई चीजों पर भी नजर रखी जा रही है।

डॉग स्क्वायड की मदद से भी सुराग तलाशने की तैयारी
पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि मासूम यहां कब और कैसे पहुंचा। आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। चेंबर में बंद था एक मासूम… लेकिन सवाल पूरे समाज के सामने है। यह घटना सिर्फ पुलिस की जांच का विषय नहीं है। यह उस समाज के सामने भी एक असहज सवाल खड़ा करती है, जहां एक मासूम के लिए दुनिया में आने के बाद सबसे सुरक्षित जगह मां की गोद मानी जाती है।

और यहां वही मासूम एक नाले के अंधेरे चेंबर में मिला
न कोई शिकायत कर सका, न अपना नाम बता सका, न यह बता सका कि आखिरी बार उसे किसने गोद में उठाया था। उसकी कहानी अब पुलिस को खोजनी है। और शायद इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा यह है कि जिस बच्चे की जुबान अभी खुली भी नहीं थी, वह अपनी मौत के बाद पूरे शहर से एक ही सवाल पूछ रहा है।
मेरा कसूर क्या था
समाचार लिखे जाने तक चेंबर से मासूम के शव को बाहर निकालने की कार्रवाई जारी थी। पुलिस की जांच के बाद ही घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
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