चुनाव में यदि किसी यूनियन को 51 प्रतिशत से अधिक मत मिलते हैं तो उसे मान्यता प्राप्त यूनियन का दर्जा मिलने का रास्ता साफ होगा।
- बीएमएस ने लगाया अन्य यूनियन पर चुनावी प्रक्रिया को रोकने का आरोप।
- बीएमएस ने कहा-विरोधी यूनियन के द्वारा चुनाव रोकने की विफल कोशिश कर रहे।
- सुप्रीम कोर्ट तक गए, इसका जवाब 24 सितंबर को कर्मचारी वोट के माध्यम से देंगे।
सूचनाजी न्यूज, बर्नपुर। इस्को स्टील प्लांट बर्नपुर में मान्यता प्राप्त यूनियन चुनाव 24 सितंबर को है। 107 सालों के इतिहास में पहली बार चुनाव होने जा रहा है। बीएमएस ने पूरी ताकत झोंक दी है। आईएसपी यूनियन चुनाव को लेकर बीएमएस के पदाधिकारी मीडिया से मुखातिब हुए। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ ने चुनाव को कर्मचारियों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया। संगठन की ओर से संजीत बनर्जी और श्रीकांत साह ने अलग-अलग वक्तव्य देते हुए चुनाव प्रक्रिया, कानूनी लड़ाई, कर्मचारियों के लंबित मुद्दों और ठेका श्रमिकों के वेतन को लेकर अपनी बात रखी।
संजीत बनर्जी ने कहा-107 साल बाद चुनाव कर्मचारियों की नैतिक जीत
संजीत बनर्जी ने कहा कि आईएसपी के 107 साल के इतिहास में पहली बार कर्मचारियों के लिए यूनियन चुनाव होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव आसानी से नहीं हुआ, बल्कि इसके लिए लंबे समय तक कानूनी और संगठनात्मक संघर्ष करना पड़ा। उनके अनुसार, पहले डिप्टी सीएलसी कार्यालय में चार यूनियनों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई थी। इसके बाद भारतीय मजदूर संघ की ओर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया और अदालत के आदेश के बाद चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू हुई।
उन्होंने कहा कि 2025 में चुनाव की तारीख तय होने के बाद कुछ यूनियनों की ओर से चुनाव प्रक्रिया को चुनौती दी गई, जिसके कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई। बाद में हाईकोर्ट और डिवीजन बेंच में चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब 24 सितंबर को चुनाव होने जा रहा है। संजीत बनर्जी ने इसे किसी एक यूनियन की जीत के बजाय आईएसपी कर्मचारियों के संघर्ष का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के 39 महीने के एरियर, 58 महीने के लंबित भुगतान तथा अन्य मांगों को लेकर यदि कोई यूनियन अदालत का दरवाजा खटखटाती है तो बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ उसका समर्थन करेगा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य कर्मचारियों के लंबित अधिकारों को हासिल करना है, न कि चुनाव प्रक्रिया को रोकना।
संजीत बनर्जी ने आईएसपी के ठेका श्रमिकों के वेतन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि आईएसपी और दुर्गापुर स्टील प्लांट के ठेका श्रमिकों के वेतन में अंतर है और 2018 से इस मुद्दे को लेकर संघर्ष किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ठेका श्रमिकों को उचित वेतन और लंबित बकाया दिलाने के लिए संगठन आगे भी आंदोलन जारी रखेगा।
श्रीकांत साह ने कहा-3,517 कर्मचारी करेंगे गुप्त मतदान
श्रीकांत साह ने कहा कि आईएसपी में 24 सितंबर 2026 को प्रबंधन और डिप्टी सीएलसी की देखरेख में यूनियन चुनाव कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि चुनाव में कुल 3,517 कर्मचारी गुप्त मतदान यानी सीक्रेट बैलेट के माध्यम से अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इसके लिए पूरे प्लांट में सात मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक होगा और उसी दिन मतगणना की जाएगी।
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श्रीकांत साह ने आरोप लगाया कि कुछ यूनियनें चुनाव प्रक्रिया को रोकने के लिए लगातार कानूनी रास्ता अपना रही हैं। उन्होंने दावा किया कि एचएमएस से संबद्ध स्टील वर्कर्स यूनियन और इंजीनियरिंग यूनियन की ओर से मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया गया है। उनके अनुसार, चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने के बाद भारतीय मजदूर संघ की ओर से केविएट दाखिल किया गया है, ताकि भविष्य में चुनाव से संबंधित किसी मामले में फैसला लेने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए।
उन्होंने कहा कि यदि कोई यूनियन कर्मचारियों के हित में काम करने का दावा करती है तो उसे चुनाव रोकने के बजाय कर्मचारियों के लंबित मुद्दों को लेकर संघर्ष करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले कुछ यूनियनें कर्मचारियों के बीच भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रही हैं।
श्रीकांत साह ने कहा कि चुनाव में यदि किसी यूनियन को 51 प्रतिशत से अधिक मत मिलते हैं तो उसे मान्यता प्राप्त यूनियन का दर्जा मिलने का रास्ता साफ होगा। उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे अपने पसंद की यूनियन के पक्ष में स्पष्ट जनादेश दें, ताकि कर्मचारियों के मुद्दों को मजबूती से उठाने वाली एक प्रभावी मान्यता प्राप्त यूनियन बन सके।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय मजदूर संघ लगातार कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रबंधन और श्रम विभाग के समक्ष आवाज उठा रहा है। शनिवार को पूरे दिन काम कराने के प्रस्ताव, सामान्य पाली के समय में बदलाव, सबलेटिंग और छुट्टी से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन ने इन मुद्दों पर कानूनी और औद्योगिक स्तर पर लड़ाई लड़ी है।
श्रीकांत साह ने कहा कि आईएसपी के लगभग 10 हजार ठेका श्रमिकों के वेतन और अधिकारों का मुद्दा भी संगठन की प्राथमिकता में है। उन्होंने दावा किया कि ठेका श्रमिकों को उचित वेतन और उनका बकाया दिलाने के लिए भारतीय मजदूर संघ आगे भी संघर्ष करेगा।
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दोनों नेताओं ने कर्मचारियों से 24 सितंबर के चुनाव में बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की और कहा कि यह चुनाव आईएसपी के कर्मचारियों के भविष्य और उनके प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ (BMS) के महासचिव संजीत बनर्जी, ठेकेदार यूनियन के महासचिव संजीत प्रसाद समेत, दीपक सिंह , श्रीकांत शाह, सचिन कुमार , रवि रजक उपस्थित थे

