जिला प्रवक्ता जावेद खान बोले-ऐसा प्रतीत होता है कि केन्द्र सरकार राज्य संबंधित विषय (सम्पत्ति)का केन्द्रीयकरण करने पर उतारू है।
- लिकॉम सेक्टर जैसा हाल हो जाएगा। बिजली भी राज्य का विषय नहीं रहेगा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। छत्तीसगढ़ में बिजली आपूर्ति में निजी क्षेत्र की एंट्री और टाटा पावर द्वारा रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसीलों में वितरण लाइसेंस मांगने के मामले पर कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जिला कांग्रेस कमेटी भिलाई के प्रवक्ता जावेद खान ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कोयला प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इसी कारण छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद से अब तक प्रदेश में 40 से अधिक निजी पावर प्लांट स्थापित किए गए हैं। इन पावर प्लांटों की स्थापना से उनके आसपास कई-कई किलोमीटर के दायरे में जमीन की उर्वरता पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। जमीन अब फसल देने के काबिल नहीं रही है। किसान बर्बाद हो रहा है और प्रदूषण की मार छत्तीसगढ़ की जनता झेल रही है,उन्होंने कहा कि अगर छत्तीसगढ़ अपनी जमीन, अपना पानी, अपना कोयला और अपना पर्यावरण दांव पर लगा रहा है तो इसके बदले में प्रदेश की जनता को कम दर पर बिजली मिलती थी।
ये कांग्रेस की सरकार की सोच हुआ करती थी। इसमें क्या हर्ज है? यह छत्तीसगढ़ का हक है लेकिन भाजपा सरकार ने सभी छूट समाप्त करते हुए बिजली की दरे बढ़ा दी है और अब सप्लाई का भी निजीकरण करने जा रही है।
टाटा पावर द्वारा केवल डिस्ट्रीब्यूशन यानी वितरण का लाइसेंस मांगा जाना उसकी मंशा पर सवाल खड़ा करता है। अगर टाटा को सच में छत्तीसगढ़ की सेवा करनी है तो वह यहां पावर प्लांट स्थापित करे, बिजली उत्पादन करे। केवल सप्लाई का ठेका लेकर, बिना कोई निवेश और बिना कोई जोखिम उठाए मुनाफा कमाना ही टाटा की मंशा प्रतीत होती है।
जावेद खान ने कहा कि बेहतर होगा कि छत्तीसगढ़ सरकार बिजली आपूर्ति का कार्य अपने ही अधिकार में रखे। टाटा पावर जिन शहरों – मुंबई, दिल्ली, अजमेर का उदाहरण दे रही है, उन शहरों में प्रचुर मात्रा में पावर प्लांट नहीं हैं। वहां दूसरे प्रदेशों से पावर ग्रिड के माध्यम से बिजली खरीद कर सप्लाई की जाती है।
छत्तीसगढ़ और उन शहरों की पृष्ठभूमि बिल्कुल अलग है। छत्तीसगढ़ स्वयं बिजली उत्पादक राज्य है और देश को बिजली देता है,उन्होंने चेतावनी दी कि भले ही आज छत्तीसगढ़ सरकार और नियामक आयोग यह कह रहे हैं कि टाटा पावर केवल सप्लाई करेगा और दरें आयोग तय करेगा, लेकिन यह निजीकरण की शुरुआत है। आज एक कंपनी को लाइसेंस मिलेगा, कल दूसरी को मिलेगा और फिर संपूर्ण रूप से निजीकरण होने के बाद बिजली सप्लाई व्यवस्था का हाल भी टेलीकॉम सेक्टर जैसा हो जाएगा।
जिस तरह टेलीकॉम में निजीकरण के बाद 30 दिन के महीने को 28 दिन और फिर 24 दिन का रिचार्ज बना दिया गया और सभी सर्विस प्रोवाइडर्स के अलग-अलग दर और पैकेज लागू कर दिए गए, ठीक वही हाल गरीब और मध्यम वर्ग के बिजली उपभोक्ताओं का होगा।
इन सभी तथ्यों को मद्देनजर रखते हुए जिला कांग्रेस कमेटी भिलाई मांग करती है कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग टाटा पावर के आवेदन को जनहित और प्रदेश हित में तत्काल खारिज करे और भविष्य में भी बिजली आपूर्ति जैसे आवश्यक सार्वजनिक सेवा में निजी क्षेत्र को अनुमति न दी जाए। यदि जनभावनाओं को अनसुना किया गया तो कांग्रेस सड़क पर उतर कर आंदोलन करेगी।

