NTA की लगातार परीक्षा संबंधी विफलताओं, दोषपूर्ण UGC-NET प्रश्नपत्रों के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की न्यायिक जांच हो।
- Student Federation of India (SFI) केंद्रीय कार्यकारिणी समिति ने सरकार पर भड़ास निकाली।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। धर्मेंद्र प्रधान को परीक्षा धांधली और खामियों के चलते मंत्री पद छोड़ना पड़ा। एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने एक बार फिर निष्पक्ष एवं त्रुटिरहित परीक्षा कराने में अपनी विफलता उजागर की है। NTA द्वारा जारी हालिया सूचना के अनुसार, UGC-NET जून 2026 की अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षाएं दोबारा आयोजित की जाएंगी। NTA की अपनी समिति ने प्रश्नपत्रों में व्यापक तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद संबंधी त्रुटियां पाई हैं। इनमें विद्वानों के नामों की गलत वर्तनी, पुस्तकों के शीर्षकों में गड़बड़ी, व्याकरण संबंधी गलतियां, प्रश्नों की दोषपूर्ण भाषा तथा पहले पूछे जा चुके प्रश्नों की पुनरावृत्ति जैसी गंभीर खामियां शामिल हैं।
NTA की लगातार विफलताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को डाला खतरे में
Student Federation of India (SFI) केंद्रीय कार्यकारिणी समिति का कहना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। NEET से लेकर अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं तक NTA की लगातार विफलताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को खतरे में डाला है। हाल में देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों में NTA की जवाबदेही तय किए जाने को लेकर भारी आक्रोश है। बार-बार छात्रों को ही संस्थागत अक्षमता का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
NTA के कारण छात्र गुजर रहे हैं मानसिक तनाव से
हर बार दोषपूर्ण परीक्षा या दोबारा परीक्षा आयोजित होने से छात्रों की महीनों की तैयारी, समय और धन बर्बाद होता है। इससे प्रवेश प्रक्रिया और करियर योजनाएं प्रभावित होती हैं तथा छात्रों को गंभीर मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है। जिस संस्था का उद्देश्य छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाना होना चाहिए, वही संस्था लगातार उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
तात्कालिक और टुकड़ों में सुधार करने के बजाय एक साथ सुधरे पूरी व्यवस्था
केंद्रीय शिक्षा मंत्री को NTA की लगातार विफलताओं के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। हर संकट के बाद केवल तात्कालिक और टुकड़ों में सुधार करने के बजाय सरकार को NTA की पूरी व्यवस्था की प्रणालीगत विफलता का समाधान करना चाहिए।
SFI की प्रमुख मांगें
1) NTA को समाप्त किया जाए और एक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था स्थापित की जाए।
2) NTA की लगातार परीक्षा संबंधी विफलताओं तथा दोषपूर्ण UGC-NET प्रश्नपत्रों के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की न्यायिक जांच कराई जाए।
छात्रों के भविष्य को लगातार व्यवस्था की विफलताओं की बलि नहीं बनाया जा सकता
अर्चना ध्रुव का कहना है कि SFI ने 17 अगस्त को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है और देशभर के सभी छात्रों, राज्य इकाइयों एवं जिला/स्थानीय इकाइयों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में इसमें भाग लेकर छात्रों की मांगों को मजबूती से उठाएं।








