Ambedkar Jayanti 2026: भिलाई के चंद अंबेडकरवादियों का सफर आज बना कारवां, चौराहे से बॉलीवुड तक चमक

Ambedkar Jayanti 2026 The Journey of a Few Ambedkarites from Bhilai became a Caravan Today Shining From the Crossroads to Bollywood (1)
  • भिलाई में अंबेडकर जयंती के आयोजनों में आए बदलाव पर जानिए एक्सपर्ट क्या बोले।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। बाबा साहब भीम राव अंबेडकर (Baba Saheb Bhim Rao Ambedkar Jayanti) की जयंती मनाई जा रही है। देशभर में संविधान निर्माता के योगदान को याद किया जा रहा है। भिलाई में भी अंबेडरवादियों का कुनबा काफी बड़ा है। भिलाई स्टील प्लांट स्थापना के वक्त चंद लोगों का सफर आज सैकड़ों आयोजनों तक पहुंच चुका है।

मोहल्ले-मोहल्ले में बाबा साहब का गुणगान किया जा रहा है। चौक-चौराहे से शुरू हुआ सफर बॉलीवुड तक अंबेडकर के नाम पर चमक रहा है। छत्तीसगढ़ से 3 बॉलीवुड की मूवी बनी। जानकी, मानव मार्केट और रमाई। रमाई एकमात्र ऐसी मूवी है, जो लगातार सिनेमाघरों में दिखाई जा रही है।

सेल भिलाई स्टील प्लांट के सेक्टर 9 हॉस्पिटल के सीएमओ डाक्टर उदय, प्रेरणा धाबर्डे, रज़ा मुराद, ओमकार दास मानिकपुरी-नत्था ने किरदार निभाया है। बाबा साहब अंबेडकर की पत्नी रमाई पर आधारित मूवी ने भिलाई के अंबेडकरवादियों की मुहिम को नेशनल कैनवास दिया। डिजिटल वर्ल्ड में अंबेडकरवादियों ने भिलाई का नाम भी रोशन किया।

सेक्टर 9 हॉस्पिटल के बर्न वार्ड के इंचार्ज डाक्टर उदय बताते हैं कि भिलाई स्टील प्लांट स्थापना के बाद यहां देशभर से अंबेडकरवादियों के कदम पड़े। शुरुआत में सिर्फ पॉवर हाउस स्टेशन के समीप विजय टॉकीज के पास स्व. परमानंद, स्व. हरिश्चंद आदि लोगों ने मिलकर अंबेडकर जी की प्रतिमा स्थापित की थी। छोटी सी प्रतिमा थी, जिसे बाद में हटा दिया गया।
खुर्सीपार में पंचशील को-ऑपरेटिव सोसाइटी ने भी समाज को एक मंच पर लाने में योगदान निभाया। इसके बाद बीएसपी कर्मचारियों-अधिकारियों का सामाजिक दायरा तेजी से बढ़ता गया। बीएसपी की ओर से सामाजिक भवनों का आवंटन शुरू हुआ। अंबेडकरवादियों को भी जमीन आवंटित की गई।

सेक्टर 6 का सेंटर सबको एक धागे में पिरोने में जुट गया। इसके बाद रिसाली और कोसानाला में अंबेडकर और भगवान बुद्ध के नाम पर लोग जुटते गए। कोसानाला में ही संविधान दिवस मनाया जाता है। अंबेडकर जयंती पर पहले चंद लोग मिलकर ही रैली निकालते थे। अब इसका दायरा बदल चुका है। महारैली का रूप ले चुकी है।

चौक-चौराहों की सजावट, डीजे, शरबत के स्टाल, पंथी डांस, झांकियों ने माहौल को पूरी तरह से बदल दिया है। पहले बाहर के वक्ताओं को नहीं बुलाते थे। अब अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए बाहरी वक्ताओं की आवाजाही भी बढ़ चुकी है। आयोजनों की बात की जाए तो अंबेडकर की विचारधारा को बढ़ाने के लिए कव्वाली भी एक माध्यम बन चुका है। सारी रात लोग इसके लिए बैठे रहते हैं। कोसानाला में संविधान दिवस पर यह आकर्षण का केंद्र होता है।

ऑल इंडिया एससी-एसटी फेडरेशन के चेयरमैन सुनील हरीशचंद्र रामटेके बताते हैं कि उनके पिता जी विजय टॉकीज के सामने ही एक झोपड़ी में रहा करते थे। वहीं, से अंबेडकर जयंती का कार्यक्रम शुरू हुआ। यही वजह है कि पॉवर हाउस हाइवे पर अंबेडकर स्मारक आज भी है। पूरे भारत में राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर इकलौता अंबेडकर स्मारक भिलाई में है।