- अभियंताओं ने दशकों तक DSP के विकास, स्थायित्व और तकनीकी प्रगति में अमूल्य योगदान दिया है।
सूचनाजी न्यूज, दुर्गापुर। डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन दुर्गापुर स्टील प्लांट (DSP DEA) द्वारा अपने सेवानिवृत डिप्लोमा अभियंताओं के सम्मान में एक गरिमामय एवं भावपूर्ण विदाई समारोह का आयोजन एसोसिएशन कार्यालय परिसर में किया गया। यह समारोह सेवा, समर्पण और तकनीकी उत्कृष्टता को सम्मानित करने का एक विशेष अवसर बना।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुर्गापुर स्टील प्लांट के ED (MM) बीएस पोपली रहे। उल्लेखनीय है कि श्री पोपली ने अपने पूर्व कार्यकाल में, जब वे कॉरपोरेट कार्यालय में ED (HR) के पद पर कार्यरत थे, डिप्लोमा अभियंताओं को JE पदनाम लागू कराने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। इस महत्वपूर्ण योगदान के लिए उपस्थित डिप्लोमा अभियंताओं ने उनका विशेष आभार व्यक्त किया एवं उनका हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
मुख्य अतिथि बीएस पोपली ने कहा-“अभियंताओं ने दशकों तक DSP के विकास, स्थायित्व और तकनीकी प्रगति में अमूल्य योगदान दिया है। उनका समर्पण DSP की पहचान का अभिन्न हिस्सा है।” उन्होंने सभी सेवानिवृत्त अभियंताओं को स्वस्थ, सुखद एवं सम्मानपूर्ण भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
सेवानिवृत्त डिप्लोमा अभियंताओं सौमित्र बनर्जी, प्रदीप कुमार दत्ता, सुनीर्मल घटक, शशबिंदु गंगोपाध्याय, देबाशीष चक्रवर्ती, अर्धेंदु बनर्जी, अमित कुमार राय, प्रदीप कुमार चटर्जी, अमितद्युत्ति चट्टोपाध्याय, अजय कुमार मोहंता, सुब्रत ढाली, समन्ता बाऊरी, दीप कुमार सिन्हा, संदीप दास, नयन कुमार राय, प्रणब कुमार पांडे, प्रसेनजीत विश्वास, प्रणेश घोष, समीर कुमार पाल, शंकर दत्ता, नारायण कुम्भकार, नारायण चन्द्र सरकार, स्वप्न कुमार मंडल, चिन्मय कुमार दास, अरुण कुमार बनर्जी, पार्थ घटक, उत्पल मजूमदार, काजल राय, तरुण कुमार मुखोपाध्याय एवं अनुपम सिन्हा शामिल हैं।
कार्यक्रम में DEFI एवं DSP DEA के जनरल सेक्रेटरी नन्द किशोर घोष वैराग्य, DSP DEA के अध्यक्ष मृत्युंजय घोष, डीएसपी डिप्लोमा अभियंता संघ के सचिव (जनसंपर्क) गौरव शर्मा समेत अन्य पदाधिकारी सदानंद तिवारी, विश्वदीप राउत, सच्चिदानंद मिश्रा, मोहम्मद अजहरुद्दीन, पवन कुमार, संतोष यादव, टिंकू कुमार, शशांक रॉय आदि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान सभी सेवानिवृत्त अभियंताओं को पुष्पगुच्छ एवं सम्मान पत्र प्रदान कर उनका अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम के भावनात्मक क्षण तब देखने को मिले, जब साथियों ने अपने अनुभव, स्मृतियाँ और संघर्ष साझा किए, जिससे वातावरण आत्मीयता और गौरव से भर उठा।











