पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, महापौर नीरज पाल, शशि सिन्हा, पूर्व मंत्री बीडी कुरैशी, सीजू एंथोनी आदि ने श्रद्धांजलि दी।
- स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के नेतृत्व में छात्र-नौजवान सेक्टर-9 अस्पताल परिसर स्थित शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित किया।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भारत छोड़ो आंदोलन के 84वें वर्ष के उपलक्ष्य में सेक्टर 9 अस्पताल स्थित भारत छोड़ो आंदोलन स्मारक स्थल पर अगस्त क्रांति के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सेक्टर-9 अस्पताल कैज्युल्टी के सामने स्थित शहीद स्मारक स्थल पर कांग्रेसी, सीटू पदाधिकारी व छात्र संगठनक सदस्य एकत्रित हुए। शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित किया। इस अवसर पर स्वतंत्रता आंदोलन के शहीदों के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया गया।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद करने के लिए नगर पालिका निगम भिलाई के राजस्व विभाग के प्रभारी सीजू एंथोनी द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छग शासन के पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि अगस्त क्रांति दिवस जिसे”क्विट इंडिया मूवमेंट के नाम से भी जाना जाता है, सन 1942 में इसी दिन महात्मा गांधी ने अंग्रेजो भारत छोडो का आह्वान किया था और इस मूवमेंट से स्वतंत्रता आंदोलन ने एक महात्व पूर्ण मोड लिया था। और अंग्रेजों के खिलाफ एक जबरदस्त जन आंदोलन खड़ा हो गया था।
स अवसर पर महापौर नीरज पाल, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकार, पूर्व राज्य मंत्री बीडी कुरैशी, पूर्व विधायक अरूण वोरा, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर, रिसाली निगम की महापौर शशि सिन्हा, पूर्व महापौर दुर्ग आरएन वर्मा, पूर्व महापौर नीता लोधी, जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हेमंत बंजारे, नगर पालिका निगम भिलाई के सभापति गिरवर बंटी साहू, रिसाली के सभापति केशव बंछोर, महापौर परिषद् के सदस्य लक्ष्मी पति राजू, लाल चंद वर्मा, केशव चौबे, अनुप डे, सनीर साहू मौजूद रहे।
इनके अलावा जोन अध्यक्ष राजेश चौधरी, भूपेंद्र यादव, वाय के सिंह, अतुल चंद साहू, ब्रिज मोहन सिंह, जिला कांग्रेस के प्रवक्ता जावेद खान, ब्लाक अध्यक्ष दानेशवरी साहु, सौरभ दत्ता, दिनेश पटेल,जी राजू, नरसिंह नाथ, सौरभ मिश्रा, पार्षद, के जगदीश, सुरेश वर्मा, संतोष देशमुख, राकेश मिश्रा, रविशंकर सिंह, जिला कांग्रेस के महामंत्री राजेन्द्र रजक, वीएस राव, आरबीके राव, पूर्व ब्लाक अध्यक्ष जी याकूब, गौरव श्रीवास्तव, प्रमोद प्रभाकर, अरूण अग्रवाल, एसएम वैध, के गिरी बाबू, संदीप द्विवेदी,सुनील चौधरी, दिपांकर दास,रामबचन यादव,बी एल मालवीय,पी श्रीनिवास ,गोविंद अग्रवाल, मोहम्मद जावेद,शेख अकरम, ललिता साहु, राजश्री उपलवार, रामबचन यादव,दिपांकर दास,दीपक भाटिया, शशि कला यादव, गंगा सिन्हा, पुष्पा डरसेना, त्रिलोक सिंह, अर्चन मिश्रा आदि ने श्रद्धा सुमन अर्पित किया तथा आभार प्रदर्शन सीजू एंथोनी ने किया।
करो या मरो की विरासत से आज के संघर्षों को मिलेगी नई ताकत
सीटू नेताओं ने भी श्रद्धां सुमन अर्पित किया। अध्यक्ष विजय कुमार जांगडे ने कहा-साम्राज्यवादी अंग्रेजी सरकार ने भारत को आर्थिक रूप से लूटा और देश की जनता को गरीबी, भुखमरी तथा शोषण में धकेला। आजादी की मांग उठाने वालों और विरोध के हर स्वर को कुचलने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने निर्मम दमन किया। अनेक क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई, गोलियों से भून दिया गया और तरह-तरह की यातनाएं दी गईं। ऐसे दमन के खिलाफ महात्मा गांधी ने “करो या मरो” का आह्वान किया और “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का नारा देश के कोने-कोने में गूंज उठा। 9 अगस्त 1942 से शुरू हुआ अगस्त क्रांति आंदोलन अंग्रेजी शासन के अंत तक अलग-अलग रूपों में जारी रहा और अंततः अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
शहीदों की विरासत आज भी संघर्ष की प्रेरणा है
अगस्त क्रांति केवल सत्ता परिवर्तन का आंदोलन नहीं था, बल्कि यह देश की जनता की आजादी, सम्मान और बेहतर जीवन की आकांक्षा का महान संघर्ष था। आज शहीदों को याद करने का अर्थ केवल पुष्पांजलि अर्पित करना नहीं, बल्कि उनके सपनों के भारत के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाना है। शोषण, अन्याय और असमानता के खिलाफ जनता की एकजुटता ही अगस्त क्रांति की वास्तविक विरासत है।
मौजूदा नीतियों से मजदूर-किसान, छात्र-नौजवान और महिलाएं परेशान
आज देश में आर्थिक असमानता और आम जनता की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। केंद्र सरकार की अनेक नीतियों को लेकर मजदूरों, किसानों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं में व्यापक असंतोष है। देश की संपदा और अर्थव्यवस्था पर चंद बड़े इजारेदार पूंजीपतियों का प्रभाव बढ़ने से आम लोगों के सामने रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे सवाल गंभीर होते जा रहे हैं। विरोध की आवाज उठाने वाले आंदोलनों पर कठोर कार्रवाई और दमन लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। हाल के दिल्ली के छात्र आंदोलन में पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग ने इस चिंता को और गहरा किया है।
एसएफआई के छात्र-नौजवानों ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के नेतृत्व में छात्र-नौजवान सेक्टर-9 अस्पताल परिसर स्थित शहीदों की प्रतिमाओं के समक्ष एकत्रित हुए और पुष्पांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि 9 अगस्त 1942 का दिन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के आह्वान के साथ देश की जनता ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का बिगुल बजाया था। आंदोलन की शुरुआत में ही ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी सहित कांग्रेस के लगभग सभी प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बावजूद आंदोलन रुका नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने में आम जनता, छात्र, युवा, मजदूर और किसान बड़ी संख्या में संघर्ष में शामिल होते गए।
सवाल पूछने वालों पर दमन लोकतंत्र के लिए खतरा
वक्ताओं ने कहा कि आजादी के 84 वर्ष बाद भी लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष की आवश्यकता बनी हुई है। मौजूदा दौर में जब छात्र और नौजवान शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक, फीस वृद्धि और अपने भविष्य से जुड़े सवाल सरकार के सामने उठाते हैं, तब कई बार उनके सवालों का जवाब संवाद के बजाय दमन और पुलिस कार्रवाई से देने की कोशिश की जाती है। सरकार की ऐसी कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है और यह अंग्रेजी शासनकाल की दमनकारी नीतियों की याद दिलाती है।
छात्र-नौजवानों की आवाज सुने सरकार
एसएफआई ने कहा कि देश का छात्र और युवा वर्ग अपने अधिकारों तथा बेहतर भविष्य को लेकर लगातार आवाज उठा रहा है। सरकार को चाहिए कि वह छात्रों और नौजवानों की समस्याओं को गंभीरता से सुने तथा उनके साथ संवाद स्थापित करे। लोकतंत्र में असहमति और सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है, जिसे किसी भी कीमत पर दबाया नहीं जाना चाहिए।

