- सवाल यह है कि प्रबंधन सिस्टम को कब तक अपडेट करेगा और कर्मियों को इस बायोमेट्रिक “भूत” से कब तक राहत मिल पाएगी।
सूचनाजी न्यूज। सेल भिलाई इस्पात संयंत्र में लागू बायोमेट्रिक मैनेजमेंट अटेंडेंस सिस्टम (BAMS) को लेकर कर्मचारियों की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। सीटू ने प्रबंधन पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि 1 जुलाई 2024 को आधे-अधूरे सॉफ्टवेयर के साथ शुरू किया गया यह सिस्टम डेढ़ साल बाद भी ठीक से काम नहीं कर पा रहा है।
हालात यह हैं कि सिस्टम खुलने में असामान्य रूप से ज्यादा समय लेता है और कई बार तो 2 से 4 दिन तक खुलता ही नहीं। जब कभी खुलता भी है, तो बार-बार “चकरी काटता” रहता है, जिसे अब तक दुरुस्त नहीं किया जा सका है। इसके बावजूद प्रबंधन रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिटी (RFID) सिस्टम लाने की बात कर रहा है, जिससे कर्मियों की मुश्किलें और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सीटू के अनुसार पहले सिस्टम में कैजुअल लीव (CL) का विकल्प ही उपलब्ध नहीं था। हाल में विकल्प तो दिया गया, लेकिन दिसंबर 2025 का CL भरते समय नया एरर सामने आ रहा है। स्क्रीन पर लिखा आ रहा है कि “वर्तमान साल का CL नहीं भर सकते”, जबकि छुट्टी 2026 की नहीं, बल्कि 2025 की है। इससे कर्मी असमंजस और तनाव में हैं।
यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि जिन कर्मियों के 31 दिसंबर को CL अथवा फेस्टिवल लीव (FL) शेष थे, वे 1 जनवरी 2026 या उसके बाद दिसंबर में ली गई छुट्टियों को भरने के लिए जब सिस्टम खोल रहे हैं, तो पिछले साल की बची हुई CL और FL दिखाई ही नहीं दे रही। इससे कर्मियों को अपनी ही छुट्टियों के उपयोग में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
एक और गंभीर समस्या यह है कि पहले ओलेम्स सिस्टम में 31 दिसंबर की छुट्टी एडवांस में भरने की सुविधा थी, लेकिन बायोमेट्रिक सिस्टम लागू होने के बाद यह सुविधा खत्म हो गई है। प्रबंधन से शिकायत करने पर भी इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। इस बार तो सिस्टम से पिछले साल की आकस्मिक और त्यौहार की छुट्टियां ही गायब कर दी गई हैं।
इसके अलावा, नए वर्ष 2026 की शुरुआत में छुट्टियों के क्रेडिट को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। अलग-अलग विभागों से खबर आ रही है कि कहीं कर्मियों के खाते में 24-25 अर्जित अवकाश (EL) डाले गए हैं, तो कहीं सीधे 30 EL पहुंच गए हैं। बायोमेट्रिक सिस्टम द्वारा स्वतः दी गई इन छुट्टियों ने पूरे संयंत्र में खलबली मचा दी है।
अब सवाल यह है कि प्रबंधन सिस्टम को कब तक अपडेट करेगा और कर्मियों को इस बायोमेट्रिक “भूत” से कब तक राहत मिल पाएगी।











