उच्चतम न्यायालय ने भिलाई इस्पात संयंत्र के 18 पट्टेदारों की याचिका पर नोटिस भेजा। दुकानों के आधिपत्य के संबंध में यथास्थिति का अंतरिम आदेश।
- न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता तथा न्यायमूर्ति शील नागू की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को स्टे दिया।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई टाउनशिप के दुकानदारों के लीज नवीनीकरण का मामला हल नहीं हुआ है। विवाद बढ़ता जा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी एक्शन ले लिया है। दुकानदारों को स्टे देते हुए सेल बीएसपी प्रबंधन की सभी कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। भारत के उच्चतम न्यायालय ने 10 सितम्बर 2026 को स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के भिलाई इस्पात संयंत्र टाउनशिप के 18 पट्टेदारों/दुकानदारों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका सुनीता जैन व अन्य बनाम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड व अन्य पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया।
भिलाई टाउनशिप के दुकानदार बिलासपुर हाईकोर्ट में हार गए थे। दोनों बेंच में हार के बाद सुप्रीम कोर्ट गए थे। जहां अब राहत मिली है। बता दें कि सेल की नई लीज नवीनीकरण पॉलिसी का लाभ धार्मिक-सामाजिक और शैक्षणिक संगठनों को मिल रहा है। दुकानदार वंचित हो रहे हैं। इसलिए कानूनी लड़ाई जारी है।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता तथा न्यायमूर्ति शील नागू की खंडपीठ ने, याचिकाकर्ताओं द्वारा दुकानों पर आधिपत्य होने के कथन को दृष्टिगत रखते हुए, आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक दुकानों के आधिपत्य के संबंध में दिनांक 10 सितम्बर 2026 की यथास्थिति बनाए रखी जाए। यह अंतरिम संरक्षण केवल आधिपत्य तक सीमित है तथा केवल इन 18 याचिकाकर्ताओं पर लागू होता है; अन्य पट्टेदारों/दुकानदारों पर इसका विस्तार नहीं है।
यह याचिका पट्टा (लीज़) नवीनीकरण से संबंधित नीति एवं उसके अंतर्गत की गई मांग को चुनौती देते हुए प्रस्तुत की गई है। सुनवाई के दौरान न्यायालय को यह भी अवगत कराया गया कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा पट्टा नवीनीकरण के संबंध में एक नई नीति जारी की गई है; न्यायालय ने कहा कि इस पहलू पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा।
याचिका अधिवक्ता हिमांशु चौबे द्वारा दायर की गई एवं उन्हीं के द्वारा न्यायालय में पैरवी की गई। स्टील सिटी चैंबर ऑफ कॉमर्स, भिलाई के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने कहा कि पिछले 14 वर्षों से शहर के व्यापारी लीज (पट्टा) नवीनीकरण की समस्या से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हम सभी न्याय-व्यवस्था पर पूर्ण आस्था रखते हैं और मनमानी वसूली का विरोध करते हैं। हमारे अधिवक्ता द्वारा दायर याचिका से व्यापारियों में पुनः नई आशा का संचार हुआ है। हम प्रबंधन से निरंतर निवेदन कर रहे हैं कि प्रबंधन के साथ किए गए लीज अनुबंध के अनुरूप हमें सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं; हम स्वयं उचित राशि का भुगतान करने के लिए तैयार हैं।”
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