Sector 9 Hospital: बीएसपी द्वारा संचालित सेक्टर 9 हॉस्पिटल के बाहर आंदोलनकारी आमरण अनशन पर बैठे हैं। हालात बिगड़ते जा रहे।
- 9 लोग आमरण अनशन पर बैठ गए। 5 महिला और 4 पुरुष के समर्थन में 50 से ज्यादा संविदा श्रमिक खुलकर सामने आ गए हैं।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र सेक्टर 9 के संविदा कर्मियों का आमरण अनशन दूसरे दिन भी जारी है। भिलाई स्टील प्लांट के सेक्टर 9 हॉस्पिटल के अटेंडेंट बीपीकेएस ठेका कंपनी द्वारा छंटनी किए जाने से शुक्रवार सुबह से आमरण अनशन पर बैठे हैं। अब उनकी हालत बिगड़नी शुरू हो गई है। आधी रात को पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा। अस्पताल के बाहर अनशन पर बैठे श्रमिकों का चेकअप कराया गया। एक महिला की सेहत तेजी से गिर रही है।
ठेका कंपनी ने 17 लोगों की छंटनी की है। इसमें से 6 ऐसे लोगों का नाम है, जिन्हें कभी किसी ने देखा भी नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि ये फर्जी गेट पास का कुछ खेल लग रहा है। आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इसमें से 11 अटेंडेंट सामने आए। 9 लोग आमरण अनशन पर बैठ गए। 5 महिला और 4 पुरुष के समर्थन में 50 से ज्यादा संविदा श्रमिक खुलकर सामने आ गए हैं। छंटनी के भय को देखते हुए सफाई कर्मी भी आंदोलन में शामिल हो सकते हैं। आमरण अनशन पर बैठने वालों की उम्र 25 से 45 साल के बीच है। कई विधवा हैं। इसलिए करो-मरो के नारे के साथ सड़क पर उतर गए।
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पुलिस प्रशासन अलर्ट, बीएसपी सुस्त
सेक्टर 9 हॉस्पिटल के बाहर आमरण अनशन पर बैठे मेडिकल स्टाफ की सेहत बिगड़ने की खबर लगते ही सीएसपी, थाना प्रभारी भिलाई नगर कोतवाली फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। अनशन के पंडाल पर आधी रात को आमरण अनशन पर बैठे श्रमिकों का स्वास्थ परिक्षण कराया गया।
हिंदुस्तान इस्पात ठेका श्रमिक युनियन (हिटसू) के बैनर तले 18 सितंबर से आमारण अनशन पर बैठे श्रमिकों के मंच पर सीएसपी अपनी पूरी टीम के साथ रात 11:30 को पहुंचे। सेक्टर 9 के स्वास्थ्य विभाग से सम्पर्क कर आमरण अनशन पर बैठे तमाम अटेंडेंट का स्वास्थ परीक्षण करवाया गया। जांच रिपोर्ट पुलिस प्रशासन को सौंपी गई। जांच में कुछ आंदोलनकारियों का बीपी बढ़ा पाया गया।
बीएसपी आइआर पर भड़का गुस्सा
आमरण अनशन पर बैठीं महिला अटेंडेंट ने बताया कि बीएसपी आइआर विभाग की ढिलाई की वजह से आज ये नौबत है। चार दिन पहले आइआर विभाग के अधिकारी ने ठेकेदार, यूनियन नेताओं की मौजूदगी में कहा था कि मामले को देखता हूं। सिर्फ आश्वासन दिए, किए कुछ नहीं। नौकरी से बाहर किए जाने से परिवार पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसलिए मजबूरी में आमरण अनशन का रास्ता चुनना पड़ा।
सबके बीच में एक अधिकारी ने कहा था-ठेकेदार भी कमाने के लिए आते हैं। इस बात पर श्रमिकों ने आपत्ति दर्ज कराई है। 12-13 हजार के वेतन और उसमें से भी कटौती। छल-कपट के खिलाफ खासा गुस्सा है। छंटनी के शिकार मजदूरों ने आइआर डिपार्टमेंट की मीटिंग में कहा था कि हम लोग भी ठोस कदम उठाएंगे। इस पर धमकी दी गई थी कि-अगर आप लोगों ने कुछ किया तो कार्रवाई की जाएगी।
ब्लैक लिस्ट कर दिया तो सेल के किसी प्लांट में नौकरी नहीं मिलेगी। पुलिस से कोई शिकायत आएगी तो कार्रवाई की जाएगी। इस बात पर अब मजदूरों का कहना है कि अपराधी अगर कोई है तो उस पर कार्रवाई कीजिए। लेकिन, मजदूरों को धमकी देकर डराया जा रहा है। ठेकेदार को खुला समर्थन आखिर क्यों? इन आरोपों पर बीएसपी आइआर विभाग का पक्ष जानने के लिए सूचनाजी.कॉम ने कॉल किया। लेकिन, कोई कुछ भी बोलने से बचता रहा।
करो या मरो के नारे के साथ बैठे हैं आमरण अनशन पर
हिटसू के अध्यक्ष शांतनु मरकाम ने बताया कि बेवजह अनुभवी एवं भेदभाव पूर्ण छंटनी, रोजी-रोटी छीन जाने से श्रमिक आज सड़क पर आमरण अनशन करने के लिए बाध्य हुए हैं। बातचीत चर्चा से निराकरण नहीं निकलने पर श्रमिकों के सब्र का बांध टूट गया है। करो-लड़ो या मरो के नारे के साथ आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर हुए। इसकी सारी जिम्मेदारी ठेकेदार एवं यहां की शोषण कारी व्यवस्था की है।



