कर्मचारियों को अपनी छुट्टी स्वीकृत कराने के लिए महाप्रबंधक स्तर के विभाग प्रमुखों के पास गिड़गिड़ाना पड़ रहा है।
- महाप्रबंधक स्तर के अधिकारियों द्वारा छुट्टी स्वीकृति व्यवस्था पर सीटू ने उठाया गंभीर प्रश्न।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। कर्मियों के छुट्टी अनुमोदन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सीटू ने कहा कि वर्तमान समय में कई विभागों में महाप्रबंधक (GM) स्तर के अधिकारी कर्मचारियों की छुट्टी के रिकमेंडिंग एवं सैंक्शनिंग अथॉरिटी बनकर बैठे हुए हैं। यह व्यवस्था न केवल पूरी तरह अव्यावहारिक है, बल्कि प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता उदाहरण है।
इतने उच्च स्तर के अधिकारियों को इस प्रकार के सूक्ष्म कार्यों में उलझाना प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसका परिणाम स्वरूप ऑक्सीजन प्लांट से लेकर रेल मिल तक लगभग सभी विभागों में कर्मियों को अपनी छुट्टी पास करवाने के लिए इन बड़े स्तर के अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कभी-कभी तो कर्मचारियों को अपनी छुट्टी स्वीकृत कराने के लिए महाप्रबंधक स्तर के विभाग प्रमुखों के पास गिड़गिड़ाना पड़ रहा है।
बायोमेट्रिक से और ज्यादा जटिल छुट्टी स्वीकृत करने की व्यवस्था
सीटू के सहायक महासचिव जेपी त्रिवेदी का कहना है कि बायोमेट्रिक आधारित उपस्थिति दर्ज कराने वाली व्यवस्था लागू होने के बाद से कर्मचारी छुट्टी जाने से पूर्व सेक्सन इंचार्ज को सूचित कर अपनी छुट्टी बीएएमएस में भर कर निश्चिंत हो जाते हैं। इसके बाद अगले माह के एक तारीख से कर्मचारी छुट्टी रिकमेंडेशन के लिए और उसके बाद स्वीकृत करने वाले सक्षम अधिकारी को बोलने के बाद छुट्टी स्वीकृत होती है, उसमें भी यदि मेडिकल छुट्टी ले रहे हैं तो एक और अधिकारी से मेडिकल स्वीकृत करने के लिए फोन करना पड़ता है। अब यदि कर्मचारी चूक गए तो समझिए छुट्टी स्वीकृत नहीं होगी।
जिम्मेदारियों का गलत उपयोग और प्रबंधन की विफलता
महाप्रबंधक स्तर के अधिकारियों का कार्य विभाग का संचालन, उत्पादन लक्ष्य, सुरक्षा मानकों का पालन और रणनीतिक निर्णय लेना होता है। लेकिन जब इन्हें कर्मचारियों की हाजिरी और छुट्टियों जैसे छोटे-छोटे कार्यों में फंसाया जाता है, तो यह साफ तौर पर जिम्मेदारियों का दुरुपयोग है। इससे न केवल बड़े निर्णय प्रभावित होते हैं, बल्कि पूरी कार्यप्रणाली कमजोर पड़ जाती है।
इस माह एब्सेंट होने से कई कर्मियों का कटा वेतन
इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। समय पर छुट्टी स्वीकृत न होने के कारण ऑक्सीजन प्लांट में कार्यरत कई कर्मचारियों को “एब्सेंट” कर दिया गया है। मामला आक्सीजन प्लांट 2 से है, जिसमें कार्मिक अधिकारी पांच अप्रैल को मेडिकल छुट्टी स्वीकृत करने के बाद आठ अप्रैल को रिकमेंडेड अधिकारी ने पास कर दिया, उसके बाद स्वीकृत करने वाले अधिकारी जो विभाग प्रमुख भी हैं, उन्होंने 13 अप्रैल और 16 अप्रैल को स्वीकृत किया। इससे एक कर्मी का 11 दिन और दूसरे कर्मी का 15 दिनों का वेतन कट गया। कार्मिक अधिकारी से कहने पर वे बोलते है कि एडवांस के लिए फार्म भर दीजिए।
कार्यक्षमता पर हमला है केंद्रीकरण की जिद
सीटू के महासचिव टी. जोगा राव का कहना है कि जब विभागों में सक्षम अधीनस्थ अधिकारी मौजूद हैं, तो फिर छुट्टी स्वीकृति जैसे कार्यों का केंद्रीकरण क्यों किया जा रहा है? यह न केवल कार्यकुशलता को खत्म करता है, बल्कि पारदर्शिता को भी खत्म करता है। ऐसा लगता है कि प्रबंधन जानबूझकर एक जटिल और धीमी व्यवस्था थोप रहा है, जिसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। सवाल यह है कि क्या कार्मिक अधिकारी महाप्रबंधक स्तर के विभाग प्रमुख अधिकारी से काउंसलिंग करेंगे कि ऐसा क्यों हुआ। जबकि स्टैंडिंग आर्डर में छुट्टी भरने के अधिकतम तीन दिनों में उचित कार्यवाही हो जानी चाहिए।
तत्काल विकेंद्रीकरण हो छुट्टी स्वीकृति करने की प्रक्रिया
सीटू इस अव्यवस्था को तुरंत समाप्त करने की मांग करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि छुट्टी स्वीकृति प्रक्रिया का तत्काल विकेंद्रीकरण किया जाए। छुट्टी एवं हाजिरी सुधारने की व्यवस्था को सेक्शन और डिपार्टमेंट स्तर के अधिकारियों को सौंपे जाएं। स्टैंडिंग ऑर्डर के अनुसार स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध प्रणाली लागू की जाए एवं जिन कर्मचारियों को गलत तरीके से “एब्सेंट” किया गया है, उनके मामलों की तुरंत समीक्षा कर सुधार किया जाए।








