BSP ने पूर्व DGM लक्ष्मण बावने से जबरन मकान कराया खाली, प्रशासनिक अधिकारी को देने की तैयारी, कानूनी लड़ाई शुरू

BSP got the house vacated from former DGM Laxman Bavne preparations to allot it to an administrative officer 1
  • सेक्टर-9 स्थित आवास क्रमांक 0004 स्ट्रीट 016 को 23 जुलाई को खाली कराया गया है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट (Bhilai Steel Plant) के नगर सेवाएं विभाग के पूर्व डीजीएम लक्ष्मण बावने के आवास को खाली कराने पर अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। बीएसपी के इंफोर्समेंट डिपार्टमेंट (Enforcement Department) की कार्रवाई को गैर कानूनी बताया जा रहा है। इसके खिलाफ कोर्ट तक जाने की बात कही जा रही है।

हैरान करने वाली बात यह है कि मकान खाली कराने के पीछे की वजह भी अब साफ हो गई है। इस मकान को दुर्ग जिले के एक प्रशासनिक अधिकारी को आवंटित करने की तैयारी है। इस सवाल पर नगर सेवाएं विभाग, जनसंपर्क विभाग और इंफोर्समेंट डिपार्टमेंट को सांप सूंघ गया है।

Vansh Bahadur

बीएसपी के कर्मचारियों और अधिकारियों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि एक प्रशासनिक अधिकारी को मकान देने के लिए आवास खाली कराया गया। कर्मचारी यूनियनें भी इस बात को लेकर खासा भड़की हुई हैं। अब पोल खोल अभियान शुरू होने वाला है।

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ओवर स्टे पीरियड को कब्जेदार कैसे बोल सकते हैं…

बीएसपी ने डीजीएम को अवैध कब्जाधारी बोला, जिस पर पीड़ित पक्ष की ओर से करारा जवाब आया है। सेक्टर-9 स्थित आवास क्रमांक 0004 स्ट्रीट 016 को 23 जुलाई को खाली कराया गया है। बीएसपी के सर्कुलर को ही आधार बनाकर जवाब दिया गया है। भिलाई स्टील प्लांट रिटेंशन के केस में आवास खाली न करने वालों को ओवर स्टे पीरियड शब्द से पुकारता है। कहीं भी कब्जेदार शब्द का उपयोग नहीं किया गया है। ऐसे में लक्ष्मण बावने को कब्जाधारी बोलने पर प्रबंधन की किरकिरी हो रही है।

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बीएसपी जब रिटेंशन केस में कब्जाधारी मानता ही नहीं है तो किस आधार पर कब्जाधारी बोलकर कार्रवाई की गई। हैरान करने वाली बात यह है कि 4 अगस्त को इस मामले में जिला न्यायालय में सुनवाई होनी है। इससे पहले बीएसपी की कार्रवाई पर कई सवाल उठा दिए गए हैं।

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पूर्व डीजीएम की बेटी को स्टेट कोर्ट से मिली थी ये खबर

पूर्व डीजीएम लक्ष्मण बावने की बेटी ने यहां तक दावा कर दिया है कि जब वह खुद स्टेट कोर्ट गई तो वहां एक कार्मिक ने दबी ज़ुबान यहां तक बोल दिया कि जिले के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का दिल इसी मकान पर आ गया है। इसलिए उन्हें यही मकान चाहिए। यही वजह है कि बीएसपी ने आनन-फानन में मकान को खाली कराया है।

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पीड़ित परिवार ने बताया पूरा घटनाक्रम

-बीएसपी की ओर से पूर्व डीजीएम लक्ष्मण बावने को 28 जून को नोटिस जारी किया गया। 4 जुलाई को बावने को नोटिस मिला।
-नोटिस में स्पष्ट रूप से लिखा कि 15 दिन में आवास खाली करें। अन्यथा मजिस्ट्रेट और पुलिस की मदद से मकान को खाली कराया जाएगा।
-नोटिस मिलने के बाद 12 दिन की मोहलत होती है कि आप अपील कर सकते हैं।
-स्टेट कोर्ट के खिलाफ जिला न्यायालय में अपील किया है।
-पीड़ित परिवार ने कहा-हमअवैध कब्जेधारी नहीं हैं। सर्कुलर बोलता है कि रिटेंशनधारी को ओवर स्टे पीरियड बोलते हैं।
-अवैध कब्जेधारी का केस अलग है। फिर ओवर स्टे पीरियड पर बेदखल कार्रवाई कैसे कर सकते हैं।
-116 पन्ने का जवाब लक्ष्मण बावने की ओर से दिया गया है।
-7 से 22 जून तक अनफिट थे। बीमारी की वजह से काफी परेशानञ बावजूद, प्रबंधन की ओर से परेशान किया गया।
-सेक्शन 9 में आदेश को निरस्त करने और सेक्शन 9 (3) में जब तक अपील पेंडिंग में है, तब तक कोई एक्शन न लेने यानी स्टे की मांग के लिए अपील किया है।
-इस मामले पर 4 अगस्त को सुनवाई होनी है। इससे पहले ही बीएसपी ने कार्रवाई कर दी। जिला न्यायालय में सुनवाई होनी है। 17 जुलाई को नोटिस बीएसपी को सर्व हो चुका है। स्टे आवेदन पर सुनवाई होनी है।

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