- आग बुझाने वाले अग्नि शमन विभाग के फायर मैन के कान खराब।
- सेक्टर 9 अस्पताल में एफ वन वार्ड में एडमिट होकर इलाज करवा रहे हैं।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। बीएसपी पीबीएस 2 हादसे पर एक और अपडेट आ गया है। अग्नि शमन विभाग के कर्मचारी भागचंद मीणा का ड्यूटी के दौरान कानों में पड़े ध्वनि की तीव्रता के कारण कान खराब हो गया है। कानों में सीटी बजना शुरू हुआ है।
पीड़ित कर्मी भागचंद द्वारा अग्नि शमन विभाग के अधिकारियों को इंज्यूरी फॉर्म भरने के लिए कहने के बावजूद अभी तक इंज्यूरी फॉर्म नही भरा गया है। इसीलिए सीटू ने मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) को पत्र देकर कहा कि उक्त कर्मी के इंज्यूरी फॉर्म भरवाने की कार्यवाही पूरी करवाएं। इस पत्र की प्रतिलिपि कार्यपालक निदेशक (संकार्य) तथा मनीष कुमार कुंजाम,डिप्टी डायरेक्टर (स्वास्थ्य एवं सुरक्षा), दुर्ग को दिया गया।
डिप्टी डायरेक्टर (स्वास्थ्य एवं सुरक्षा) को दखल देने की मांग की
सीटू की टीम इस मामले में मनीष कुमार कुंजाम, डिप्टी डायरेक्टर (स्वास्थ्य एवं सुरक्षा) से मुलाकात कर उन्हें पत्र दिया और कहा कि इस मामले में स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को लेकर जो लापरवाही हुई है, उसे तुरंत दुरुस्त करने के लिए दखल दें, ताकि इस मामले में उक्त कर्मी का इंज्यूरी फॉर्म भरा जा सके।
फिर सामने आई अग्निशमन विभाग की लापरवाही
अग्निशमन विभाग वर्दीधारी कर्मियों एवं अधिकारियों का विभाग है, जहां हमेशा उच्च स्तर के अनुशासन की बात कही जाती है। किंतु इस विभाग के ही अधिकारियों के द्वारा लापरवाही की घटना सामने आती रही है। विभाग के अधिकारियों को कार्य के दौरान आवाज की तीव्रता के कारण कान खराब होने की जानकारी देने के बावजूद अग्नि शमन विभाग के अधिकारी द्वारा सेक्टर 9 अस्पताल के डाक्टर से सलाह लेने की बात कहकर अभी तक इंज्यूरी फॉर्म नहीं भरने की घटना लापरवाही के दायरे में आता है। 9 अक्टूबर 2018 की घटना भिलाई के लोग नहीं भूले हैं, जिसमें हुई लापरवाही के चलते अग्निशमन विभाग के कर्मचारी एवं अधिकारियों की जान चली गई थी।
यह घटना घटी थी 7 अप्रैल को आग बुझाने के दौरान फायरमैन के साथ
भिलाई इस्पात संयंत्र के पावर एंड ब्लोइंग स्टेशन 2 में सात अप्रैल को अग्नि दुर्घटना हुई थी, जिसमें कर्मियों ने छज्जे पर उतरकर पाइप के सहारे नीचे जाकर अथवा कूद कर अपनी जान बचाई थी। इसी घटना में फायर फाइटर अग्निशमन विभाग के फायरमैन लगातार तीन घंटे तक आग बुझाने में लगे रहे और आग पर काबू पा लिए।
चूंकि पावर एंड ब्लोइंग स्टेशन 2 में ड्रेन वाल्व खोलने पर ध्वनि की तीव्रता 100 डेसीबल से ज्यादा होती है, जिससे फायर मैन भागचंद के कानों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ा। फायर मैन भागचंद को दूसरे दिन कानों में सीटी बजने जैसी आवाज के कारण सेक्टर 9 अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल की लापरवाही भी हो रही है उजागर
संयंत्र में हुए अग्नि दुर्घटना में फायर फाइटिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुए भागचंद के मामले में कानों के गंभीर रूप से क्षत्रिग्रस्त होने की बात जानने के बाद भी और एमआरआई करवा कर उचित कदम उठाने अथवा आवश्यकता अनुसार किसी बड़े अस्पताल में रेफर करने के बजाय 15 अप्रैल को एमआरआई करने का तारीख देना लापरवाही को ही दिखाता है, क्योंकि डॉक्टर के अनुसार भी उक्त कर्मी के दोनों कान खराब है। लगातार सीटी बजने की आवाज आ रही है। यह कब तक ठीक हो पाएगा अथवा ठीक होगा या नहीं इसी पर सवालिया निशान लगने के बाद किसी बड़े इंस्टिट्यूट में अभी तक रेफर नहीं करना भी लापरवाही ही है।
ऐसे ही लापरवाही का शिकार हुए थे फायरमैन कुल्लू
टू ने बताया कि रेल मिल में फायर एक्सटिंग्विशर के रिफिलिंग के दौरान ब्लास्ट होने से फायरमैन कुल्लू के दायां हाथ बुरी तरह से दुर्घटनाग्रसत हो गया था। सेक्टर 9 में ही इलाज किया गया एवं लंबे समय के बाद अभी वेल्लूर हॉस्पिटल में रेफर किया गया है, जहां डॉक्टरों ने जवाब देते हुए कहा है कि आप आने में बहुत लेट कर दिए हैं। अब इसका इलाज करके हाथ को पहले जैसे ठीक करना संभव नहीं है। सभी डॉक्टर जानते हैं कि समय पर इलाज नहीं होने से देरी के कारण कई बार इलाज हो ही नहीं पाता है। ऐसी घटनाओं को लापरवाही के सिवाय दूसरी बात नहीं कहीं जा सकती है।
फायरमैन को दिया जाए एयर मफ
सीटू नेता ने कहा कि यूनियन के संज्ञान में एक साल के अंदर यह दूसरी घटना आई है, जिसमें फायर फाइटिंग के दौरान फायरमैन का कान खराब हुआ है और दोनों कानों में सीटी बजने लगा है। इसीलिए जितने भी फायर फाइटिंग के लिए जाने वाले कर्मी है, उनको एयर मफ दिया जाना चाहिए अथवा फायर फाइटिंग अग्निशमन वाहन में एयर मफ रखा जाना चाहिए।
हर हाल में असुरक्षित कार्य एवं कार्य प्रणाली को रोकें
भिलाई इस्पात संयंत्र के हर कर्मचारी से सीटू अपील करता है सबसे पहले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें एवं सुरक्षित कार्य करें, अन्यथा दुर्घटना होने पर ज्यादातर घटनाओं में विभागीय अधिकारी कर्मचारी लंबे समय तक उनका साथ नहीं देते हैं। इस पूरे घटनाक्रम में उस व्यक्ति को स्वयं एवं परिवार को ही परेशानी उठानी पड़ती है। इसीलिए आपको अपनी सुरक्षा स्वयं करनी है एवं हर हाल में असुरक्षित कार्य ना अपनाएं।















