BSP SMS 2 भीषण आग की आंच इस्पात मंत्रालय तक, मेकॉन पर उठी अंगुली

BSP SMS 2 Fire Spreads to the Steel Ministry Questions Raised on CGM Mecon
  • इस्पात मंत्री एवं इस्पात मंत्रालय को इतने बड़े हादसे पर यथाशीघ्र संज्ञान ले।
  • प्लांट के रख-रखाव पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के भिलाई स्टील प्लांट एसएमएस 2 अग्निकांड का मामला तूल पकड़ रहा है। इस्पात मंत्री एचडी कुमार स्वामी और इस्पात संचिव संदीप पौंड्रिक को भिलाई से पत्र लिखकर जांच की मांग की गई है ताकि आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।

12 जनवरी 2026 को सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के स्टील मेल्टिंग शॉप-2 के तीनों कन्वर्टर (1 से 3) में लगी आग की घटना पूरे सेल प्रबंधन को कटघरे में खड़े कर रही है। समाजवादी जनता पार्टी (चंद्रशेखर) के राष्ट्रीय महासचिव आरपी शर्मा ने मंत्रालय को लिखे शिकायती पत्र में उल्लेख किया है कि पूर्व में भी सेल-बीएसपी में हुई इसी तरह की घटनाओं की अभी तक निर्णायक जांच नहीं हुई है। किसी तरह के नतीजे या सिफारिशों पर अमल जैसी कोई स्थिति नहीं है। इन परिस्थितियों में ऐसी ही घटना की पुनरावृत्ति कई सवालों को जन्म देती है।

घटना को लेकर कई स्तर पर मीडिया में कुछ बातें आई हैं लेकिन राष्ट्र को जो करोड़ों की क्षति हुई है इसकी जिम्मेदार कौन लेगा, यह बड़ा प्रश्न हम सबके सामने हैं। इस अग्नि दुर्घटना से ब्लास्ट फर्नेस से आने वाले हॉट मेटल और उससे बनने वाले ब्लूम एवं स्लैब के निर्माण की प्रक्रिया बाधित हुई है।

एकीकृत संयंत्र होने की वजह से उत्पादन प्रभावित हुआ है। हादसे के बाद से रेल एंड स्ट्रक्चरल मिल को ब्लूम की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। हमें जो जानकारी मिली है, वह निश्चित तौर पर चिंतनीय है।

इन पर एक नजर डालिए

(1) कन्वर्टर-2 को अक्टूबर 2025 में 55 दिनों के लिए कैपिटल रिपेयर में लिया गया था। दिसम्बर 2025 में कन्वर्टर- 2 को चालू किया गया, उसके बाद फिर दोबारा रिपेयर में गया। मालूम हुआ है कि रिपेयर के बाद कन्वर्टर-2 में बीच-बीच में हॉट मेटल आपूर्ति बाधित हो रही रही थी।

(2) सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र में कन्वर्टर-2 को कैपिटल रिपेयर का कार्य मेकॉन कम्पनी को दिया था। अब जो राष्ट्र की सम्पत्ति की इतनी बड़ी क्षति हुई है, उसके लिए जिम्मेदार मेकॉन कम्पनी है। जब इस कंपनी में कैपिटल रिपेयर करने की क्षमता नहीं थी तो इसे क्यों दिया गया।

साफ बात है कि मेकॉन ने सिर्फ टेंडर हासिल किया है और इसे आगे किसी ठेकेदार को पेटी कांट्रेक्ट में दे दिया गया है। क्या मेकान कंपनी पेटी ठेकेदार से काम करवा रही थी? यह भी एक जाँच का विषय है।

(3) सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र में नए कर्मियों की भर्ती अब लगभग बंद हैं। यहां कार्यरत कर्मियों में औसतन ज्यादातर 55 से अधिक आयुवर्ग के हैं। ऐसे में नए और दक्ष कर्मियों की कमी भी इस घटना के लिए जिम्मेदार मानी जा रही है।

(4) एसएमएस-2 हादसे के बाद भिलाई इस्पात संयंत्र (सेल) में गैस पाइप लाइन में क्षति पहुंचती है तो भोपाल गैस कांड जैसा सामना भिलाईवासियों को भी झेलना पड सकता है। सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुकर जाएगी और सारी जिम्मेवारी भिलाई इस्पात संयंत्र (सेल) के अधिकारियों पर आ जायेगी।

(5) मांग है कि मेंटेनेंस के तमाम कार्य अनुभवी कंपनी को दिए जाएं। सिर्फ आउटसोर्सिंग के चक्कर में किसी भी अनुभवहीन कंपनी को ऐसे संवेदनशील जगहों पर काम न दिया जाए।

शिकायतकर्ता का मानना है कि इस्पात मंत्री एवं इस्पात मंत्रालय को इतने बड़े हादसे पर यथाशीघ्र संज्ञान लेना चाहिए। प्लांट के रख-रखाव पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस्पात मंत्रालय द्वारा एक ऐसी कमेटी बनाई जाए, जो सेल प्लांट पर निगरानी रखे, जिससे इस प्रकार की घटनाएँ ना हो।