"WMD से है इनका, गजब का नाता, MERS के बिना खोल नहीं पाएंगे खाता, क्रेन मेंटेनेंस में भी, इनके क्रेन की आवाजाही, पूरे प्लांट में वाहवाही।"
- भिलाई इस्पात संयंत्र के जल प्रबंधन विभाग के महाप्रबंधक ने मोबाइल इक्यूपमेंट रिपेयर शॉप-एमईआरएस पर कविता लिखी है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। Steel Authority of India Limited सेल के Bhilai Steel Plant में कार्यरत जल प्रबंधन विभाग के जीएम ज्ञानेंद्र कुमार साहू ने की एक कविता सुर्खियों में हैं। मोबाइल इक्यूपमेंट रिपेयर शॉप-एमईआरएस के कामकाज से इतना प्रभावित हुए कि पूरी कविता ही लिख डाली।
विभाग की कार्यशैली, जिम्मेदारियों और अधिकारियों-कर्मचारियों के योगदान को कविता के माध्यम से अनोखे अंदाज में प्रस्तुत किया है। “MERS-संयंत्र का मजबूत हाथ” शीर्षक से लिखी गई इस कविता में विभाग की कार्यसंस्कृति, तकनीकी क्षमता और कर्मचारियों की मेहनत को शब्दों में पिरोया गया है।
कविता में MERS विभाग को संयंत्र के रखरखाव और भारी मशीनरी संचालन का मजबूत आधार बताया गया है। कविताकार ने विभाग के क्रेन संचालन, मेंटेनेंस कार्य और कठिन परिस्थितियों में किए जाने वाले कामों का उल्लेख करते हुए कर्मचारियों और अधिकारियों की सराहना की है। कविता में प्लांट गैरेज, ओमेगा क्रेन, 75 टन क्षमता वाले TIL क्रेन और कूलिंग टावर में होने वाले कार्यों का भी जिक्र किया गया है।
कविता के माध्यम से विभाग के कई कर्मचारियों और अधिकारियों का उल्लेख करते हुए उनके कार्यों को सम्मान दिया गया है। इसमें गैरेज के मुखिया बी. देलही बाबू, अधिकारी राकेश चौधरी, एस.वी.एन. त्रिपाठी तथा ऑपरेटर इकबाल और फयाज के कार्य और व्यक्तित्व को विशेष रूप से उकेरा गया है। कवि ने लिखा है कि MERS के बिना संयंत्र के कई महत्वपूर्ण कार्य संभव नहीं हैं और विभाग की भूमिका पूरे संयंत्र के रखरखाव में अहम है।
कविता की अंतिम पंक्तियों में कविताकार ने MERS विभाग को पूरे संयंत्र का “मजबूत हाथ” बताते हुए उसके योगदान को सलाम किया है। कर्मचारियों के बीच यह कविता काफी चर्चा में है। कई लोगों का कहना है कि तकनीकी विभागों में कार्य करने वाले कर्मचारियों की मेहनत अक्सर सामने नहीं आ पाती, लेकिन इस तरह की रचनाएं न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाती हैं, बल्कि आम लोगों को भी संयंत्र के अंदर होने वाले कठिन और जिम्मेदार कार्यों की जानकारी देती हैं।
आप भी पढ़िए कविता
MERS-संयंत्र का मजबूत हाथ
बहुत बड़ा है, उन लोगों का काम।
MERS है, डिपार्टमेंट का नाम।।
इनके हर काम में है सफाई।
प्लांट गैरेज का है छोटा भाई।।
श्री बी देलही बाबू हैं, गैरेज के मुखिया।
गैरेज के अंदर बाहर का, सब कुछ है उनको पता।।
राकेश चौधरी हैं, यहां के अधिकारी।
इन पर जिम्मेदारियों का, बोझ है सचमुच भारी।।
क्रेन यहां का है, “ओमेगा” कहलाता।
अपने प्राचीन नाम से ही, है जाना जाता।।
TIL क्रेन की क्षमता भारी।
क्षमता है 75 टन, है भारी सवारी।।
दूसरा क्रेन है इनका, चालीस टन का।
परंतु काम करता है ये, अपने मन का।।
प्लांट के बड़े बड़े जाब ये उठाते।
अड़चन वाली जगहों पर, ये उसे लगाते।।
एक ऑपरेटर हैं, नाम है इकबाल।
डिपार्टमेंट के हैं, गुदड़ी के लाल।।
आचार विचार हैं इनके बहुत ही अलहदा।
अधिकारी कर्मचारी सभी, रहते हैं इन पर फिदा।।
एक ऑपरेटर हैं, जिनका नाम है फयाज।
अलग ही है उनके, जीने का अंदाज।।
एक अधिकारी हैं, श्री एस वी एन त्रिपाठी।
गोरे हैं रंग में, और ऊंची है कद काठी।।
हमारे कूलिंग टावर की MERS है जान।
30 मीटर ऊंचाई तक उठाते हैं सामान।।
WMD से है इनका, गजब का नाता।
MERS के बिना हम, खोल नहीं पाएंगे खाता।।
क्रेन मेंटेनेंस में भी, इनके क्रेन की है आवाजाही।
पूरे प्लांट में उठाते हैं ये वाहवाही।।
एक अनार हैं और सौ हैं बीमार।।
संयंत्र में इनका जलवा है शानदार।।
संयंत्र के रखरखाव में, अद्भुत है भागीदारी।
अब तो है हमारी जी, जाने की तैयारी।।
पर जब तक रहेगा, संयंत्र का अस्तित्व।
जबरदस्त ही रहेंगे, MERS के कृतित्व।।
अब लगाता हूं अपनी वाणी पर लगाम।
MERS को है पूरे संयंत्र का सलाम।।
MERS को है पूरे संयंत्र का सलाम।।

