धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया, अब कोई मंत्रालय न दिया जाए। फास्ट ट्रैक कोर्ट के नाम पर आश्वासन नहीं, अब ठोस कार्रवाई चाहिए।
- हम भारत के लोगों ने कहा लड़ेंगे तो जीतेंगे जरूर।
- लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनतांत्रिक प्रतिरोध को मजबूत करना होगा।
- ‘हम भारत के लोग’ का मशाल जुलूस संपन्न।
- कहा-हमारी बाकी मांगे बरकरार है।
- धर्मेंद्र प्रधान को कोई मंत्रालय न दें, छात्रों पर हुई बर्बरता के लिए प्रधानमंत्री माफी मांगें।
- भयमुक्त और न्यायपूर्ण भारत के लिए जारी रहेगा संघर्ष।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। नीट पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ तथा छात्रों और युवाओं के भविष्य की रक्षा की मांग को लेकर ‘हम भारत के लोग’ के बैनर तले शनिवार शाम भिलाई में मशाल जुलूस निकाला गया। सिविक सेंटर सेल परिवार चौक से प्रारंभ होकर मशाल जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए सिविक सेंटर स्थित अर्जुन रथ के पास पहुंचा, जहां सभा आयोजित की गई। आंदोलनकारियों ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है, लेकिन अब केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करे कि उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी अन्य मंत्रालय की जिम्मेदारी न दी जाए।
धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा, इस्पात, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उस दौरान इन मंत्रालयों में उनके कार्यकाल से जुड़े सवालों और विवादों की तस्वीर भी धीरे-धीरे सामने आ रही है। इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते हुए भिलाई के कर्मियों का वेतन समझौता तक नहीं करवा पाए। इसलिए उन्हें केंद्र सरकार में कोई मंत्रालय नहीं दिया जाना चाहिए।
पुलिस अत्याचार के लिए प्रधानमंत्री छात्रों से माफी मांगें
आंदोलनकारियों ने कहा कि नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों के साथ दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों पर जिस प्रकार पुलिस कार्रवाई की गई, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए आवाज उठाना छात्रों का संवैधानिक अधिकार है। छात्रों के आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई और कथित बर्बरता की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को स्वीकार करनी होगी। प्रधानमंत्री को देश के छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी और शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेना होगा।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित हो
सभा में नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की कथित अनियमितताओं से मानसिक रूप से प्रभावित होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी परीक्षा में गड़बड़ी केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं होती, बल्कि यह लाखों विद्यार्थियों के वर्षों के परिश्रम, सपनों और भविष्य को प्रभावित करती है। जिन छात्रों ने इस संकट के कारण अपनी जान गंवाई, उनके परिवारों को न्याय मिलना चाहिए। पीड़ित परिवारों को उचित सहायता और न्याय दिया जाए।
शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता जरूरी
वक्ताओं ने कहा कि देश की परीक्षा व्यवस्था को भरोसेमंद, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना केंद्र सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। नीट सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं के सवालों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच अविश्वास पैदा किया है। इसीलिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को रद्द करने के साथ-साथ परीक्षा लेने की व्यवस्था का विकेंद्रीकरण, तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर मजबूत निगरानी, पारदर्शी प्रक्रिया तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
फास्ट ट्रैक कोर्ट के नाम पर आश्वासन नहीं, अब ठोस कार्रवाई चाहिए
सभा में कहा गया कि गंभीर मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के नाम पर लंबे समय से आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन पीड़ितों और छात्रों को समयबद्ध न्याय अभी भी अपेक्षित है। आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार को अब केवल घोषणाओं और आश्वासनों से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई करनी होगी। परीक्षा घोटालों और कथित पेपर लीक के मामलों में दोषियों को शीघ्र सजा, छात्रों के साथ न्याय और परीक्षा व्यवस्था में सुधार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
भयमुक्त और न्यायपूर्ण भारत के लिए जारी रहेगा संघर्ष
‘हम भारत के लोग’ ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं, बल्कि नागरिकों को बिना भय अपनी बात कहने, सवाल पूछने और सरकार की नीतियों का विरोध करने का अधिकार देने वाली व्यवस्था है। इसलिए हमारी मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान को केंद्र सरकार में कोई मंत्रालय न दिया जाए, प्रधानमंत्री छात्रों से पुलिस अत्याचार के लिए माफी मांगें, छात्रों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएं, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को न्याय मिले और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएं। ‘हम भारत के लोग’ ने स्पष्ट किया कि इन मांगों को लेकर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

