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12 फरवरी हड़ताल: यूनियन बोली-नए लेबर कोड में न्यूनतम वेतन की गारंटी नहीं, बोनस के अधिकार से वंचित होंगे कर्मचारी

Azmat ali 09/02/2026 1 minute read
February 12 Strike Union Bid Minimum Wage not Guaranteed, Workers will be Deprived of Bonus Rights

मजदूर और यूनियन ऑडिट किए गए खातों पर सवाल नहीं उठा सकते। बोनस तय करने कंपनी की बैलेंस शीट आधार नहीं बना सकते।

  • संयुक्त यूनियन हर कर्मी तक पहुंचा रहा है हड़ताल का संदेश एवं हड़ताल के मुद्दे लेकर।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल है। भिलाई स्टील प्लांट में भी ट्रेड यूनियनों ने तैयारियां कर रखी है। संयुक्त यूनियन के नेता लगातार प्लांट के अलग-अलग विभागों में दौरा कर रहे हैं। सोमवार को मुर्गा चौक पर संयुक्त यूनियन के नेताओं ने पर्चा वितरण किया। कर्मचारियों से संवाद करके उन्हें आने वाले खतरों से अवगत करा रहे हैं, ताकि भविष्य में अफसोस की गुंजाइश न बचे।

केंद्र सरकार ने 21 नवंबर को मजदूर विरोधी श्रम कोड को अधिसूचित कर दिया, उसके बाद उन श्रम कोड के रूल्स को भी तैयार करके अधिसूचित कर दिया गया है। सरकार 1 अप्रैल 2026 से लागू करना चाहता है। इसके खिलाफ पूरे देश में 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है, जिसकी तैयारी पूरे देश के साथ-साथ भिलाई में भी चल रही है।

भिलाई में संयुक्त यूनियन हर मुमकिन माध्यमों से हड़ताल के संदेश एवं हड़ताल के मुद्दों को हर कर्मी तक पहुंच रही है। पूरे देश में 25 करोड़ से ज्यादा मजदूर हड़ताल में भागीदारी करेंगे। भिलाई में देखना होगा कि कितने कर्मचारी इन मजदूर विरोधी श्रम कोड एवं प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा वेतन समझौता पर किए जा रहे कुठाराघात के खिलाफ हड़ताल में उतरते हैं।

किंतु कोई भी कार्मिक लेबर कोड लागू हो जाने के बाद भविष्य में यह नहीं कह पाएंगे कि जो नीतियां उन पर लागू हुई है उसके बारे में उन्हें वक्त रहते ट्रेड यूनियनों ने नहीं बताया।

न्यूनतम वेतन की गारंटी को खत्म कर देगा नया कोड ऑन वेजेस

नया कोड ऑन वेजेस, मिनिमम वेज की गारंटी नहीं देता है बल्कि जानबूझकर वेतन को कम किया जा रहा है और श्रमिकों को और ज्यादा गरीबी में धकेल रहे हैं, जबकि मिनिमम वेज एक्ट 1947 मिनिमम वेज की गारंटी देता था।

ज्ञात हो कि 1948 में वेज को लेकर त्रिपक्षीय कमेटी ने तीन स्तरों वाली वेतन प्रणाली की सिफारिश की थी, जिसमें सबसे नीचे न्यूनतम वेतन सबसे ऊपर जीवन निर्वाह और बीच में उचित वेतन की बात कही गई थी।

इसमें न्यूनतम वेतन केवल गुजारे योग्य वेतन थी और इससे कम कुछ नहीं हो सकता था। किंतु अभी तक भी न्यूनतम वेतन को सही मायने में लागू करने के लिए आवश्यक तंत्र को लागू नहीं किया जा सका है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा नए कोड ऑन वेजेस में न्यूनतम वेतन की गारंटी की बात कहना मजाक के सिवाय कुछ भी नहीं है।

चार एक्ट को मिलकर बना है नया कोड ऑन वेजेस

यूनियन नेताओं ने कहा-पहले श्रम कानून में वेज को लेकर चार कानून थे, जिसमें पेमेंट आफ वेजेस एक्ट, पेमेंट आफ बोनस एक्ट, इक्वल रैम्यूनरेशन एक्ट एवं मिनिमम वेजेस एक्ट शामिल हैं, जिन्हें समाप्त कर केंद्र सरकार नया कोड ऑन वेजेस लेकर आया है। इसमें कर्मियों को मिलने वाली बहुत सी गारंटी अपने आप समाप्त हो जाएगी।

न्यूनतम वेतन की परिभाषा को ही बदल रहा है केंद्र सरकार

न्यूनतम वेतन के निर्धारण के लिए जो फार्मूला बना है, उसके अनुसार दो वयस्क एवं दो बच्चों के एक परिवार के लिए प्रतिदिन कम से कम 2700 कैलोरी प्रदान करने वाला भोजन, प्रतिवर्ष प्रति व्यक्ति कम से कम 18 गज कपड़ा, निम्न आय वर्ग के लिए सरकारी औद्योगिक आवास योजना के अंतर्गत रहने के लिए किराए के आधार पर आवास का प्रावधान, ईंधन, बिजली, विविध खर्चों के मद में कुल न्यूनतम वेतन का 20% तथा सुप्रीम कोर्ट के 1992 के फैसले के अनुसार शिक्षा, चिकित्सकीय खर्च, मनोरंजन व वृद्धावस्था तथा शादी के खर्च के मद में अतिरिक्त 25% का प्रावधान करने के बाद सभी के योग से जो रकम निर्धारित होगा, उस रकम को न्यूनतम वेतन के रूप में निर्धारित किया जाना है।

बोनस के अधिकार से वंचित हो जाएंगे कर्मी

श्रम कोड में सरकार के कथन के अनुसार जिनका वेतन 21000 से ऊपर है, वह बोनस के पात्रता से बाहर हैं। इसके साथ ही बोनस की सीलिंग भी ₹7000 मासिक है। बोनस की पात्रता के लिए मजदूरी सीमा पर सीलिंग को हटाने और बोनस की मात्रा पर सीलिंग को हटाने की लंबे समय से चली आ रही मांग पर कोड में ध्यान नहीं दिया गया है।

साथ में यह भी कहा गया है कि मजदूर और यूनियन अब ऑडिट किए गए खातों पर सवाल नहीं उठा सकते हैं। बोनस की मात्रा तय करने के लिए कंपनी की बैलेंस शीट को आधार नहीं बना सकते हैं। ऐसे प्रावधानों से बोनस के अधिकार से अधिकांश कर्मियों को वंचित हो जाना अब आम बात हो जाएगी।

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