SAIL में निजीकरण नहीं वसूली के धंधे का है खेल, तपन सेन का मंत्र-लड़ेंगे तो जीतेंगे, देशभक्ति पर भी सवाल…

In SAIL, it is not Privatization but a Game of Extortion Tapan Sen Mantra-if we Fight, we will win, Patriotism is also Questioned
  • स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया-एसडब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष तपन सेन ने सवाल के जवाब में सरकार-सेल प्रबंधन की बखिया उधेड़ी।

अज़मत अली, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के कर्मचारी इस वक्त निजीकरण की आंच में तप रहे हैं। गुस्से से अधिकारी और कर्मचारी आक्रोशित हैं। इसकी झलक सीटू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व एनजेसीएस सदस्य तपन सेन ने दिखाई।

हिंदुस्तान स्टील इम्प्लाइज यूनियन सीटू के 19वें त्रैवार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने भिलाई पहुंचे तपन सेन से सूचनाजी.कॉम ने विशेष बातचीत की। सेल में सुविधाओं की कटौती, प्रबंधन का रवैया, सरकार की नकेल आदि सवालों पर तपन सेन ने खुलकर जवाब दिए। उन्होंने कहा-सोची समझी साजिश के तहत सेल प्रबंधन सरकार की नीतियों को लगातार लागू कर रही है, जिससे कर्मचारियों का नुकसान हो रहा है।

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स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पहले बंद कर दिया गया। अस्तपालों में डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी को बढ़ने दिया गया। अब इसी का फायदा उठाकर प्रबंधन बोलता है कि बेहतर सुविधा के लिए प्राइवेट एजेंसी से मदद ले रहे हैं।

इस पूरी कवायद को एनजेसीएस सदस्य तपन सेन ने मदद नहीं, वसूली का धंधा करार दिया। उनका स्पष्ट रूप से कहना है कि पहले सुविधाओं को हटाओ। फिर, इसको बहाल करने के लिए मन पसंद प्राइवेट एजेंसियों को सौंपने का खेल सेल प्रबंधन खेलता है। इसकी जांच हो जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी।

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स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया-एसडब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष तपन सेन ने सवाल के जवाब में कहा-इतिहास गवाह है कि जब-जब कर्मचारी लड़ेंगे हैं, जीत मिली है। सोशल मीडिया पर भड़ास निकालने और जमीनी संघर्ष में बहुत अंतर होता है।

सेलम स्टील प्लांट, अलॉय स्टील प्लांट इसका उदाहरण है। जब-जब कोई प्राइवेट कंपनी की टीम यहां पहुंची, कर्मचारियों ने स्टेशन तक दौड़ाया। कैबिनेट से दो बार मंजूरी मिलने के बाद भी यहां कोई आ नहीं रहा है, क्योंकि कर्मचारियों के आक्रोश से सब वाकिफ हैं। इसलिए अपने हक की लड़ाई को लड़ना ही होगा।

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बगैर लड़े, कोई जीत हासिल नहीं की जा सकती है। आरआइएनएल के कर्मचारी भी लगातार जमीनी संघर्ष कर रहे हैं। संयुक्त यूनियन एक साथ लड़ रही है। निश्चित रूप से इसे बचाने की लड़ाई जारी रहेगी। तपन सेन ने कहा-आम नागरिकों को भी यह समझना होगा कि आंदोलन देश की संपत्ति को बचाने के लिए हो रहा है।

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देश को बचाने वाले देशभक्त आंदोलन कर रहे हैं। और जो खुद को राष्ट्रवादी बोलते हैं, वही लोग सरकारी संपत्ति को बेच रहे हैं। आप खुद तय कर लीजिए, कौन देशभक्त है और कौन देश…?

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