ISP यूनियन चुनाव को लेकर Burnpur Ispat Karmachari Sangh (BMS) ने घोषणा पत्र जारी करने के साथ विरोधी यूनियन पर भड़ास निकाली।
- घोषणा पत्र में ISP के कर्मचारियों से सीधे संवाद, सुझावों तथा डिजिटल माध्यम से प्राप्त प्रतिक्रियाओं को शामिल किया गया।
सूचनाजी न्यूज, बर्नपुर। इस्को स्टील प्लांट बर्नपुर में 24 सितंबर को मतदान है। ISP One Plant One Trade Union Election को लेकर शनिवार को Burnpur Ispat Karmachari Sangh (BMS) कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। केंद्रीय BMS के स्टील प्रभारी हिमांशु बल, बर्नपुर इस्पात कारखाना कर्मचारी संघ के महासचिव संजीत बनर्जी, अध्यक्ष अजय सिंह, ठेका मजदूर यूनियन के अध्यक्ष महेश बनर्जी, संजीत प्रसाद सहित संगठन के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले पर BMS का पक्ष
महासचिव संजीत बनर्जी ने कहा कि 24 सितंबर को होने वाले चुनाव को लेकर ISP की विभिन्न यूनियनों के बीच न्यायालय में कानूनी कार्यवाही चल रही है। BMS का कहना है कि वह ISP कर्मचारियों के लोकतांत्रिक एवं ट्रेड यूनियन संबंधी अधिकारों के लिए न्यायिक मंच पर भी अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
उपलब्ध सुप्रीम कोर्ट केस-स्टेटस के अनुसार Diary No. 52764/2026, Iron Steel and Engineering Workers Union vs. Burnpur Ispat Karmachari Sangh मामले में 21 सितंबर 2026 की तारीख Motion Hearing (Fresh – For Admission) के लिए सूचीबद्ध दिखाई गई है।
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39 महीने के एरियर और Gratuity Ceiling का मुद्दा
केंद्रीय BMS के इस्पात प्रभारी हिमांशु बल ने कर्मचारियों के 39 महीने के एरियर तथा ग्रेच्युटी सीलिंग से संबंधित कानूनी मामलों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों से जुड़े इन मुद्दों पर BMS न्यायिक एवं संगठनात्मक स्तर पर लगातार प्रयास कर रहा है और कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई को आगे भी जारी रखने की बात कही।
कर्मचारियों की राय से तैयार किया गया Manifesto
BMS की ओर से बताया गया कि संगठन का Manifesto केवल पदाधिकारियों द्वारा तैयार नहीं किया गया है, बल्कि ISP के कर्मचारियों से सीधे संवाद, सुझावों तथा डिजिटल माध्यम से प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार किया गया है। इस घोषणा पत्र में ISP कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न सेवा, वेतन, सुविधा, कार्य-समय, अवकाश, ठेका श्रमिकों तथा अन्य कर्मचारी हितों से संबंधित मुद्दों को शामिल किया गया है।
BMS का कहना है कि आने वाला चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने का माध्यम नहीं, बल्कि कर्मचारियों द्वारा अपने मुद्दों और अधिकारों से जुड़े विषयों पर अपनी लोकतांत्रिक राय व्यक्त करने का अवसर भी है।


