मोदी जी पब्लिक सेक्टर की स्टील कंपनियों को मर्ज कर बनाएं मेगा PSU, मत कीजिए निजीकरण

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  • सार्वजनिक उपक्रमों का रणनीतिक विलय करके एक मेगा इस्पात कंपनी बनाने का सुझाव।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। निजीकरण के बजाए मेगा स्टील पीएसयू बनाने के सुझाव पर एक बार फिर से आवाज उठ गई है। नेशनल काफ्रेडेशन आफ आफिसर्स एसोसिएशन की नेशनल एक्सीक्यूटिव काउंसिल की बैठक डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर, जनपथ, नई दिल्ली में हुई। जहां पदाधिकारियों ने मोदी सरकार से अपील किया है कि निजीकरण के फैसले को वापस लिया जाए। मेगा पीएसयू बनाकर स्टील इंडस्ट्री को बचा लें।

पीएसयू अधिकारियों के चौथे पे-रिविजन, ईपीएस-95 हायर पेंशन, केन्द्र सरकार के अधिकारियों के समकक्ष टैक्स छूट आदि मुद्दों पर की गहन चर्चा भी हुई। एनसीओए की इस बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष अध्यक्ष एवं सेफी चेयरमैन नरेन्द्र कुमार बंछोर ने बताया कि इस्पात क्षेत्र को रणनीतिक क्षेत्र में रखने हेतु तथा इस्पात क्षेत्र के सभी सार्वजनिक उपक्रमों का रणनीतिक विलय करके एक मेगा इस्पात कंपनी के गठन करने हेतु केन्द्र सरकार से आग्रह किया जा चुका है।

इसके लिए सभी केन्द्रीय मंत्रियों से पत्राचार किया गया है व नई सरकार के गठन के बाद कुछ केन्द्रीय मंत्रियों को ज्ञापन भी दिया गया है। वर्तमान में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड का प्रचालन बड़ी कठिनाई से हो रहा है एवं अधिकारियों के वेतन में भी कमी की गयी है।

एनसीओए का मानना है कि इस्पात क्षेत्र के राष्ट्र के तीन महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रमों क्रमशः नगरनार स्टील प्लांट एवं आरआईएनएल को विनिवेश करने के बजाए इन कंपनियों को सेल के साथ मिलाकर एक मेगा पीएसयू बनाने की रखी मांग।

यह मेगा पीएसयू राष्ट्र हित में होने के साथ ही राष्ट्र के समग्र विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस संदर्भ में ज्ञात हो कि भारत सरकार द्वारा इस तरह के रणनीतिक विलय बैंको में किया गया जहां इसका बेहतर परिणाम प्राप्त हुआ।

इस्पात क्षेत्र में सेल के अलावा राष्ट्रीय इस्पात निगम, मेकॉन, नगरनार स्टील प्लांट, मॉइल, इत्यादि कंपनियां इस्पात मंत्रालय के अधीन कार्यरत हैं। जिनके संविलियन से एक विशाल इस्पात उत्पादक कंपनी का निर्माण किया जा सकता है। जिससे इन अलग-अलग कंपनियों के पास उपलब्ध संसाधनों का अधिक दक्षता से दोहन किया जा सकता है, जिससे प्रस्तावित मेगा पी.एस.यू. अत्यंत ही उत्पादक एवं लाभजनक होगा।