SAIL JO-2026 प्रमोशन पॉलिसी पर बवाल: सीनियरिटी, मेरिट, Length of Service और इंटरव्यू पर ये मांग

Ruckus over SAIL JO-2026 Promotion Policy Demand for Balance Between Seniority and Merit
  • अब देखना होगा कि प्रबंधन इस मांग-पत्र पर क्या निर्णय लेता है।
  • JO-2026 प्रमोशन पॉलिसी को लेकर कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

सूचनाजी न्यूज, बोकारो। जूनियर ऑफिसर (JO-2026) प्रमोशन पॉलिसी में संशोधन और तर्कसंगत बदलाव की मांग को लेकर यूनियन ने प्रबंधन के समक्ष विस्तृत मांग-पत्र सौंपा है। जनता मजदूर संघ का कहना है कि वर्तमान प्रमोशन नीति में अनुभव, वरिष्ठता और कार्य प्रदर्शन को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष की स्थिति बन रही है।

यूनियन द्वारा कार्यकारी निदेशक (मानव संसाधन), बोकारो स्टील प्लांट को संबोधित पत्र में कहा गया है कि वर्तमान वेटेज स्ट्रक्चर और मूल्यांकन प्रणाली “सीनियरिटी-कम-मेरिट” के स्थापित सिद्धांतों को प्रतिबिंबित नहीं करती। लंबे समय से सेवा दे रहे और उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कर्मचारियों की अनदेखी हो रही है।

क्या हैं यूनियन की प्रमुख मांग

सेवा अवधि और इंटरव्यू का वेटेज बहाल करने की मांग
लंबी सेवा अवधि (Length of Service) का वेटेज 16% और इंटरव्यू का 15% किया जाए, ताकि संस्थागत अनुभव को उचित मान्यता मिले।

लिखित परीक्षा का वेटेज घटाने की मांग
लिखित परीक्षा का भार 70% से घटाकर 60% करने का प्रस्ताव, ताकि मूल्यांकन में संतुलन बना रहे।

रीजनिंग और डेटा इंटरप्रिटेशन का भार कम हो
रीजनिंग, डेटा इंटरप्रिटेशन और कॉम्प्रिहेंशन जैसे घटकों का वेटेज 40% से घटाकर 20% किया जाए, जो निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप हो।

सीनियरिटी-कम-मेरिट सिद्धांत को सुदृढ़ करने की मांग
APAR/ACR परफॉर्मेंस ग्रेडिंग और फील्ड अनुभव को अधिक महत्व दिया जाए।

आंतरिक प्रमोशन के अवसर बढ़ें
DOPT गाइडलाइन के अनुसार पात्र वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए 50% आंतरिक प्रमोशन का प्रावधान पारदर्शी प्रक्रिया के साथ लागू किया जाए।

प्रोबेशन अवधि की समीक्षा
प्रोबेशन अवधि को 3 वर्ष से घटाकर 1.5 वर्ष करने की मांग, ताकि अनावश्यक ठहराव (Stagnation) रोका जा सके।

प्रमोशन प्रतिशत में वृद्धि
प्रमोशन प्रतिशत को 2% से बढ़ाकर 10% करने का सुझाव, जिससे कैरियर प्रगति और संस्थागत निरंतरता सुनिश्चित हो।

GFM कोटा में कटौती का विरोध
GFM कोटा 15% से घटाकर 10% करने को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे सभी नॉन-वर्क एंप्लाइज के हितों के विरुद्ध बताया गया है।

जनता मजदूर संघ का तर्क
यूनियन का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में प्रमोशन नीति ऐसी होनी चाहिए, जो मेरिट और अनुभव के बीच संतुलन बनाए। केवल लिखित परीक्षा पर अत्यधिक जोर देने से अनुभवी कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है और संस्थागत स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ये सुझाव सकारात्मक और रचनात्मक भावना से दिए गए हैं, ताकि पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्रशासनिक संतुलन मजबूत हो सके।

प्रबंधन से क्या अपेक्षा?
यूनियन ने मांग की है कि मामले की उच्च स्तर पर समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं, जिससे संगठनात्मक दक्षता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

अब देखना होगा कि प्रबंधन इस मांग-पत्र पर क्या निर्णय लेता है। फिलहाल JO-2026 प्रमोशन पॉलिसी को लेकर कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।