पीएफ अंशदान, योगदान वास्तविक वेतन के 12% के आधार पर या ₹15,000 की सीमा (₹1,800) के आधार पर होगा, यह वेतन पर्ची से स्पष्ट होगा।
- कर्मचारियों को आधिकारिक दस्तावेजों पर ही भरोसा करने की सलाह दी जा रही है।
- 1 अगस्त को मिलने वाली जुलाई माह की वेतन पर्ची पर रहेगी नजर।
सूचनाजी न्यूज, राउरकेला। सेल कर्मचारियों, खासकर उच्च पेंशन (Higher Pension) का विकल्प चुन चुके कर्मचारियों के बीच इन दिनों कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि नए श्रम कोड के तहत कंपनी भविष्य में वास्तविक वेतन (Actual Salary) के बजाय केवल ₹15,000 की वेतन सीमा के आधार पर अपना पीएफ अंशदान जमा कर सकती है। इससे कर्मचारियों की भविष्य की पेंशन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी मुद्दे पर राउरकेला इस्पात कारखाना कर्मचारी संघ के महामंत्री एवं बीएमएस के सह उद्योग प्रभारी इस्पात हिमांशु शेखर बल ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कर्मचारियों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने की अपील की है।
क्या है कर्मचारियों की चिंता
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा यह प्रचार किया जा रहा है कि ईपीएस 95 का नाम बदलकर ईपीएस-2026 किए जाने और नए श्रम प्रावधानों के बाद कंपनी चाहे तो वास्तविक वेतन के 12% के बजाय केवल ₹15,000 की सीमा के आधार पर अपना पीएफ अंशदान जमा कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो उच्च पेंशन का विकल्प चुन चुके कर्मचारियों की भविष्य की पेंशन पर असर पड़ सकता है।
हिमांशु शेखर बल ने क्या कहा
हिमांशु शेखर बल का कहना है कि यह कोई नया प्रावधान नहीं है और इस तरह की आशंका फैलाकर कर्मचारियों को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने समझाया कि जिन कर्मचारियों ने हायर पेंशन का विकल्प चुना है, उनके मामले में कंपनी के 12% पीएफ अंशदान में से 9.49% हिस्सा पेंशन (EPS) में और शेष पीएफ खाते में जाता है। यदि भविष्य में केवल ₹15,000 की सीमा के आधार पर योगदान किया जाए तो इसका असर पेंशन गणना पर पड़ेगा, लेकिन उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था और उच्च पेंशन से जुड़े नियमों के अनुसार ऐसा होना व्यावहारिक नहीं है।
पेंशन की गणना कैसे होती है
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि उच्च पेंशन की गणना कर्मचारी के 58 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले के अंतिम 60 महीनों के पेंशन योग्य वेतन के औसत के आधार पर होती है। इसलिए यदि वर्षों तक वास्तविक वेतन के आधार पर योगदान लिया गया हो और अंतिम समय में केवल ₹15,000 की सीमा मान ली जाए, तो यह व्यवस्था नियमों के अनुरूप नहीं होगी।
अगस्त की सैलरी स्लिप पर रहेगी नजर
हिमांशु शेखर बल ने कर्मचारियों से कहा है कि किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास करने के बजाय 1 अगस्त को मिलने वाली जुलाई माह की वेतन पर्ची देखें। उसमें कंपनी के पीएफ अंशदान से स्पष्ट हो जाएगा कि योगदान वास्तविक वेतन के 12% के आधार पर किया जा रहा है या ₹15,000 की सीमा (₹1,800) के आधार पर।
कर्मचारियों के लिए सलाह
ईपीएफ और उच्च पेंशन जैसे मामलों में सोशल मीडिया पर चल रही हर जानकारी सही हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वेतन पर्ची, ईपीएफओ के आधिकारिक निर्देश और कंपनी के आदेशों की जांच करना बेहतर होगा। यदि कोई बदलाव होता है तो उसका आधिकारिक आदेश भी जारी किया जाएगा। फिलहाल कर्मचारियों को अफवाहों से बचते हुए आधिकारिक दस्तावेजों पर ही भरोसा करने की सलाह दी जा रही है।

