SAIL NEWS: जब 12-12 घंटे ड्यूटी कराएंगे तो एक शिफ्ट के कार्मिकों की नौकरी खुद-ब-खुद चली जाएगी, छंटनी पर CITU ने केंद्र सरकार को लपेटा

SAIL News CITU said-The Central Government Which had Promised to Provide Jobs is Getting the Employees Retrenched
  • एक शिफ्ट में काम करने के बाद दूसरे शिफ्ट में ड्यूटी करने के कारण दुर्घटना हो रही है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल में 35% कर्मियों की छंटनी करने के आदेश पर बीएसपी की पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू ने कटाक्ष किया है। सीटू ने कहा कि हर साल 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने की बात कहकर मौजूदा केंद्र सरकार 2014 में सत्ता में आई थी। तब से लेकर अब तक रोजगार देना तो दूर, उल्टे सार्वजनिक उद्योगों में कार्य कर रहे स्थाई एवं ठेका श्रमिकों की छंटनी करवा रही है।

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जब भी केंद्र सरकार से रोजगार देने की बात पूछा जाता तो यह कभी भी सीधा उत्तर नहीं दिए। कभी पकोड़ा तलने को रोजगार बोल दिया गया, तो कभी पंक्चर बनाने के काम को रोजगार बताया गया। कुल मिलाकर सार्वजनिक उद्योग हो या निजी उद्योग कहीं भी रोजगार तो पैदा नहीं करवा सके। किंतु अब रोजगार शुदा लोगों को छंटनी करने के लिए तरह-तरह के तरकीब लगा रहे हैं।

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मजाक है कम कर्मियों से मैन्युअल प्लांट चलाने की बात करना

सीटू महासचिव टी. जोगा राव ने कहा-लगभग 70 साल पहले सोवियत संघ की मदद से स्थापित हुए भिलाई इस्पात संयंत्र की अधिकांश विभागों की कार्य प्रणाली मैन्युअल है। अब यह विभाग भी पुराने होते जा रहे हैं। ऐसे पुराने होते जा रहे विभागों में सभी कार्य मैन्युअल है।

इसके ऑटोमेशन के लिए कोई विशेष कार्य नहीं किया गया है। इसीलिए इन विभागों के मैनपावर में कटौती करना सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करना है। ज्ञात हो कि संयंत्र के अंदर पिछले 15 सालों में जितने भी मॉडेक्स इकाइयां आयी हैं, उनमें पहले से ही कम मैन पावर दिया गया है।

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पहले कहा 20% अब कह रहे हैं 35%

सीटू ने कहा कि पहले मैनपावर का सर्वेक्षण कर रिपोर्ट देने वाली एक संस्था को बुलाकर सर्वेक्षण करवाया गया। इसके पश्चात कहा गया कि भिलाई इस्पात संयंत्र में मैन पावर बहुत ज्यादा है। इसमें कटौती करना संभव है। उसके बाद 20% मैनपावर में कटौती का फार्मूला तैयार किया गया और इसे लागू करने के लिए सभी विभागों पर दबाव बनाए जाने लगा। अब यह कहा जा रहा है कि मैन पावर में कटौती 20% नहीं बल्कि 35% किया जाना है।

क्या 12 घंटा कार्य करवाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है संयंत्र

सीटू ने मैन पावर कटौती पर सवाल करते हुए कहा कि केंद्र सरकार कार्य के घंटे को 8 से बड़ा कर 12 करना चाहती है। जिसके लिए उन्होंने नए श्रम संहिताओं में गोलमोल प्रावधान किया है। यदि मैन्युअल अथवा नए विभागों में मैनपावर घटा तो कर्मियों को 8 घंटे के बजाय 10 से 12 घंटा कार्य करना पड़ सकता है, जो अभी भी कई विभागों में ठेका श्रमिकों के लिए शुरू हो चुका है।

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सार्वजनिक उद्योग को खत्म करने की चल रही है साजिश

सहायक महासचिव जगन्नाथ प्रसाद त्रिवेदी ने कहा-सार्वजनिक उद्योग देश में विकास लाने एवं लोगों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए रोजगार देने के नाम पर स्थापित किए गए थे। अब सार्वजनिक उद्योगों का मकसद लाभ कमाना रह गया है और देश के प्रधानमंत्री सत्तासीन होते ही इस बात को बोल चुके हैं कि “सार्वजनिक उद्योग पैदा होते है मरने के लिए” यदि इस बात पर कार्य चल रहा है तो इस साजिश से इंकार नहीं किया जा सकता कि सार्वजनिक उद्योगों को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ा जा रहा है।

लगातार बढ़ रही है संयंत्र के अंदर दुर्घटनाएं

अध्यक्ष विजय कुमार जांगड़े ने कहा-मैनपावर कटौती का असर दिखना शुरू हो गया है, जिससे एक शिफ्ट में काम करने के बाद दूसरे शिफ्ट में ड्यूटी करने के कारण दुर्घटना हो रही है। ठेका श्रमिकों को 8 घंटे के बाद रुककर 12 से 16 घंटे तक काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

लगातार ठेका करण के कारण अकुशल श्रमिकों की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही दुर्घटना होने की सम्भावना बढ़ जाती है। दुर्घटनाओं के तह तक जाएं तो दुर्घटनाओं के कारणों में एक कारण मैनपावर की कमी भी है। जिस पर सबको गंभीरता से सोच कर उचित कदम उठाना होगा।