दवा रिपीट करने के लिए प्लांट के अंदर हेल्थ सेंटर, सेक्टर 1, सेक्टर 7 हेल्थ सेंटर में काउंटर की विशेष व्यवस्था की जाए।
- मुख्य चिकित्सालय में डेंटिस्ट विभाग की एक बड़ी यूनिट है। कई सीनियर डाक्टर होने के बावजूद मरीजों की शिकायतें बढ़ी।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधिकारी उदय कुमार से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी। साथ ही कर्मचारी और परिजनों को अस्पताल एवं हेल्थ सेंटर से जुड़े विभिन्न समस्याओं पर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।
यूनियन की बातों पर विस्तार से चर्चा हुई। सीएमओ उदय कुमार ने विश्वास दिलाया कि जो तत्काल हो सकता है उसे पर तुरंत अमल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हमारा प्रयास है कि कैंसर एवं कार्डियोलॉजी के डाक्टर अपने हास्पिटल के हो, जिससे हमें पेशेंट को रेफर करने की जरूरत ना पड़े, क्योंकि मरीज को रेफर करने की कंडीशन में है परिजन बहुत ही परेशानी में आ जाते हैं।
इस अवसर पर अध्यक्ष राजेश चौहान महामंत्री अशोक माहौर, कार्यकारी अध्यक्ष आनंद पांडेय, निवास मिश्रा, उपाध्यक्ष अवधेश पाण्डेय, तरूण सेमुअल, ओम प्रकाश तीतरमारे, डीजीएस अनुराग माहुलकर, सचिव अमित कुमार एवं संरक्षक एविशन वर्गीस मौजूद थे।
यूनियन ने डाक्टर उदय को ये मांग पत्र सौंपा
1. मुख्य चिकित्सालय में डेंटिस्ट विभाग की एक बड़ी यूनिट है जिसमें हमारे कई सीनियर डाक्टर सेवारत हैं। लोगों की शिकायत है कि इलाज के नाम पर सिर्फ दांतों को निकालना,दवा लिखना तक सीमित रह गया है।
जबकि यूनिट के पास सभी मशीनरी और संसाधन उपलब्ध है, जिनके माध्यम से दांतों का सभी प्रकार का इलाज किया जा सकता है। कर्मचारियों की मांग है कि दांतों का सम्पूर्ण इलाज किया जाए या बाहर के हास्पिटल में इलाज के लिए रिफर किया जाए।
2. एमआरआई कराने के लिए 15 से 20 दिन में नम्बर मिलता है, जिससे मरीज की बीमारी बढ़ जाती है। कई बार मशीन खराब रहने के कारण टेस्ट करवाने में और ज्यादा समय लग जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए 2 शिफ्ट में एम आर आई टेस्ट की सुविधा दी जाए तथा मशीन खराब की स्थिति में बाहर से टेस्ट करवाने की सुविधा दी जाए।
3. थाइराइड ओपीडी का नम्बर काउंटर से लगाना पीड़ादायक होता जा रहा है, क्योंकि सुबह 8:30 जब नम्बर लगता है। उसी समय ड्यूटी टाइम रहता है। नम्बर लगाने के बाद ड्यूटी जाने की हड़बड़ी ठीक नहीं है। इसलिए इसे आनलाइन किया जाए।
4. वार्ड में पेशेंट भर्ती के बाद उसकी डाइट नाइट शिफ्ट में लिखी जाती है। परिवार के सदस्य न रहने पर उसकी डाईट नहीं लिखी जाती । डाइट भर्ती के समय लिखी जानी चाहिए।
5. शुगर जांच किट HBA1C की कमी के कारण मरीज परेशान हो रहे और बाहर टेस्ट करवाना पड़ रहा है। इसकी कमी का क्या कारण है और कौन जिम्मेदार है। इस पर ध्यान दिया जाए।
6. कार्डियोलॉजी में डाक्टर के आने का समय निश्चित नहीं है तथा निश्चित तारीख को भी मरीज इंतजार करते रहते हैं बाद में जानकारी दी जाती है कि आज डाक्टर नहीं आएंगे। वह क्षण मरीज के लिए बहुत ही तकलीफदेह रहता है। इस पर ध्यान दिया जाए।
7. पूर्व में डिस्चार्ज के समय पहले फीडबैक फार्म दिया जाता था, जिससे हम अपनी कमियों को अच्छी तरह समझ पाते थे और उसका निराकरण करना आसान रहता था, पर अभी फीडबैक फॉर्म नहीं दिया जा रहा है। व्यवस्था में कमियों की जानकारी और उसमें सुधार के लिए फीडबैक फॉर्म आवश्यक रूप से भरवाया जाएं।
8. वार्ड एवं ओपीडी के पास स्थित टॉयलेट की नियमित सफाई की व्यवस्था की जाए।
9. सेक्टर 1 हॉस्पिटल में स्थित जनरल ओपीडी में खराब बीपी मशीन इस्तेमाल की जा रही है, जिसमें रीडिंग गलत आती है इसे तुरंत बदली जाए।
10. संयंत्र भवन ऑक्यूपेशनल हेल्थ सेंटर में एक एंबुलेंस हमेशा रहनी चाहिए जिससे दुर्घटना की स्थिति में तत्काल पेशेंट को अटेंड किया जा सके।
11. संयंत्र के भीतर मेन मेडिकल पोस्ट, ऑक्यूपेशनल हेल्थ सेंटर में कर्मचारी परिवार की दवाई रिपीट की जाने की सुविधा दी जाए, जिससे कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से दवा रिपीट कराने के लिए सेक्टर 9 हॉस्पिटल न जाना पड़े।
12. परिजनों को दवा रिपीट करने के लिए सेक्टर 1 अथवा सेक्टर 7 हेल्थ सेंटर में एक काउंटर की विशेष व्यवस्था की जाए।

