स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के पास लौह अयस्क और कोयले की बड़ी कैप्टिव खदानें हैं। कंपनी को सीधेतौर पर फायदा।
- निवेश और उत्पादन बढ़ने, आयात पर निर्भरता कम होने, खनिज व ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने और खनिज आधारित उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
- खनिज सुरक्षा और घरेलू लौह अयस्क (Iron Ore) की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में बड़ा सुधार।
सूचनाजी न्यूज, नई दिल्ली। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने केंद्र सरकार द्वारा 17 अगस्त को अधिसूचित खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 का स्वागत किया है। कंपनी ने इसे खनिज क्षेत्र में एक अनुमानित वित्तीय व्यवस्था और दीर्घकालिक नीतिगत निश्चितता स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है।
यह संशोधन खनिज कराधान और शुल्कों में अधिक स्पष्टता और एकरूपता लाता है। इसके अलावा, यह पहले से प्रभावी एवं लंबित कर मामलों का समाधान करता है, जिससे खनन उद्योग में और अधिक भरोसा एवं निश्चितता आएगी।
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के पास लौह अयस्क और कोयले की बड़ी कैप्टिव खदानें हैं। इस सुधार से कंपनी के खनन कार्यों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, नए निवेश और खदानों के विकास में आसानी होगी और दीर्घकालिक कच्चे माल की सुरक्षा मजबूत होगी। एक स्थिर – कर व्यवस्था से कंपनी अपने खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेगी और लौह अयस्क के खनन को बढ़ाने में मदद होगी।
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उल्लेखनीय है कि इस सुधार से घरेलू बाजार में लौह अयस्क की उपलब्धता बढ़ेगी। खदानों के बेहतर विकास के बाद SAIL लागू नियमों के तहत अतिरिक्त लौह अयस्क को बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध करा सकेगी। इससे घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी और भारतीय इस्पात (स्टील) उद्योग को स्थानीय लौह अयस्क आसानी से मिल सकेगा।
इस कदम से क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ने, आयात पर निर्भरता कम होने, खनिज व ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने और खनिज आधारित उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। SAIL ‘आत्मनिर्भर’ तथा ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए अपने खनिज संसाधनों के जिम्मेदार और टिकाऊ विकास, कच्चे माल की सुरक्षा और घरेलू बाजार में अधिक लौह अयस्क उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।








