विजिलेंस की आंख खुलेगी या नहीं? अब तक हुए फर्जीवाड़ों पर एक्शन होगा या छूट जारी रहेगी? एचआर आफिसर पर क्या कार्रवाई होगी।?
- सेक्टर 7 गैरेज भी बन चुका है फर्जीवाड़े का ठिकाना।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। ईमानदार और मेहनतकश कर्मचारियों के बल पर सेल के स्टील प्लांट टिके हुए हैं। वरना, भगौड़े कब की नय्या डूबो चुके होते। इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक सेल के कार्यवाहक सीएमडी केके सिंह, अधिकारियों को लेकर पाई-पाई जुटाने के लिए महामंथन कर रहे हैं। वहीं, छुटभैय्या नेता कंपनी को करोड़ों रुपए की चपत लगाते जा रहे हैं। एक तरफ मैनपॉवर घटाने की बात की जा रही है। दूसरी ओर बीएसपी के अधिकारी खुली छूट देकर उच्चाधिकारियों के मंसूबे पर पानी फेर रहे हैं।
विभागों में वर्कलोड बढ़ता जा रहा है। इससे कार्मिक तनाव में हैं। ड्यूटी से लापता रहने वाले कंपनी को भारी नुकसान करा रहे हैं। सांठगांठ अब उजागर हो चुकी है। प्लांट के अंदर ड्यूटी है, लेकिन अटेंडेंस सेक्टर 9 हॉस्पिटल के चेस्ट ओपीडी में लगाई जा रही है। बायोमेट्रिक से सिर्फ हाजिरी लग रही है, ड्यूटी नहीं हो रही है। इस तरह के कई केस अब उजागर होने शुरू हो गए हैं। सूचनाजी.कॉम के हाथ भी कुछ सबूत लगे हैं।
ताज़ा मामला सेल भिलाई स्टील प्लांट का है। वर्क्स एरिया के आर. शॉप में ड्यूटी है, लेकिन नेताजी सेक्टर 9 हॉस्पिटल के चेस वार्ड में बायोमेट्रिक अटेंडेंस लगा रहे हैं। ड्यूटी जाते ही नहीं हैं। जब मन किया, तब टलते हुए प्लांट में गए। समय होने पर विभाग की बायोमेट्रिक मशीन पर चेहरा दिखाकर फुर्र हो जाते हैं।
वाह…वर्मा जी वाह, क्या खेल खेल रहे आप
विभागीय ऑपरेटिंग अथॉरिटी वर्मा की दया-दृष्टि बनी हुई है। हर माह सैलरी बन जाती है। विभागीय अधिकारियों और एचआर के अफसरों का संरक्षण ऐसा मिला है कि बगैर नौकरी किए, सैलरी उठा रहे हैं।
कड़ा पत्र भिलाई स्टील प्लांट की झोली में आने वाला
वर्क्स एरिया में ड्यूटी है और नॉन वर्क्स एरिया में अटेंडेंस कैसे लग रही है,इसका जवाब प्रबंधन को देना होगा। जल्द ही इस्पात मंत्रालय, सेल कारपोरेट आफिस से होते हुए एक कड़ा पत्र भिलाई स्टील प्लांट की झोली में आने वाला है। ये कहानी किसी एक छुटभैय्या नेता की नहीं है, बल्कि कइयों की है।
आप भी जानिए अटेंडेंस कब लग रही
ईमानदारी से काम करने वाले बीएसपी कर्मचारियों की मेहनत का नाजायज़ फायदा छुटभैय्या नेता उठा रहे हैं। चेस्ट ओपीडी के बायोमेट्रिक मशीन में अटेंडेंस के फर्जीवाड़े को कैमरे में कैद किया जा चुका है। कभी भोर में पौने 6 बजे से लेकर 6 बजकर 10 मिनट तक के बीच में अटेंडेंस लग रही है।
कभी जनरल शिफ्ट शुरू होने से पहले साढ़े 8 बजे के बाद ही बायोमेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाकर अटेंडेंस लगा दी जाती है। समय से पहले या बाद में अटेंडेंस लगाने का मकसद यह है कि मेडिकल स्टाफ की नज़रों से बचा जा सके। लेकिन, सेक्टर 9 हॉस्पिटल के एक स्टाफ ने इस पूरे फर्जीवाड़े को कैमरे में कैद कर लिया है। चेस्ट ओपीडी मरच्यूरी के बगल में है। सुनसान रास्ता रहता है, इसका फायदा उठाया जा रहा।
मैपिंग का अधिकार एचआर आफिसर को
बायोमेट्रिक मशीन में अटेंडेंस के लिए मैपिंग करने का अधिकार एचआर आफिसर के पास है। भगौड़ों से मिली-भगत की वजह से आराम से कहीं भी अटेंडेंस की सुविधा दी जा रही है। सबकी ज़ुबां पर एक ही सवाल है कि वर्क्स एरिया का बंदा, नॉन वर्क्स में कैसे अटेंडेंस लगा रहा है। इतना ही नहीं, गैरेज सेक्टर 7 भी फजीवाड़ा का सेंटर बन चुका है। पहले यहां अटेंडेंस लगाई जाती थी। कइयों की नज़र में आते ही सेक्टर 9 हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया है।
डीआइसी, ईडी, सीजीएम स्तर के अधिकारी भी सीखें नेताओं से
बीएसपी के ईमानदार कार्मिकों का कहना है कि क्या डीआइसी, ईडी, सीजीएम स्तर के अधिकारी नासमझ हैं? वह भी घर बैठे अटेंडेंस लगा सकते हैं। लेकिन कार्यस्थल पर हाजिरी लगती है। जब उच्चाधिकारियों को कोई राहत नहीं मिल रही है तो ड्यूटी न करने वाले नेताओं और भगौड़ों को सुविधा क्यों दी जा रही? अब देखना यह है कि विजिलेंस की आंख खुलती है या नहीं? अब तक हुए फर्जीवाड़ों पर एक्शन होगा या छूट जारी रहेगी? आरोपित एचआर आफिसर पर क्या कार्रवाई होगी?








