- राउरकेला से बड़ी खबर: सेल एरियर विवाद। अगर आज एरियर का मुद्दा नहीं सुलझा, तो भविष्य में एक परंपरा बन जाएगी।
- आने वाले 2027 वेज बोर्ड में भी प्रबंधन इसी आधार पर हस्ताक्षर के दिन से वेतन बढ़ोतरी लागू करने की बात कहेगा।
सूचनाजी न्यूज, राउरकेला। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के कर्मचारियों के बकाया एरियर को लेकर राउरकेला इस्पात कारखाना कर्मचारी संघ (RIKKS-BMS) का बड़ा बयान सामने आया है। यूनियन की ओर से एक विस्तृत पर्चा जारी किया गया है, जिसमें साफ कहा गया है कि कर्मचारियों को एरियर अब केवल न्यायालय के माध्यम से ही मिल सकता है।
यूनियन की ओर से जारी पर्चे में यूनियन ने 39 माह के एरियर का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि 22 अक्टूबर 2021 को हुए MoU में एरियर का कोई प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद कुछ यूनियनों द्वारा कर्मचारियों को गुमराह किया गया और यह दावा किया गया कि एरियर मिलेगा।
RIKKS का आरोप है कि MoU में न सिर्फ एरियर गायब था, बल्कि सब्सिडी की वापसी (Withdrawal of all subsidy) जैसे प्रावधान भी शामिल थे, जिसके कारण स्कूल, टाउनशिप और अन्य सुविधाओं का निजीकरण हुआ।
यूनियन ने पर्चे में यह भी उल्लेख किया है कि 18 नवंबर 2021 को इस्पात मंत्रालय से SAIL चेयरमैन को मिले अप्रूवल लेटर और नवंबर 2021 में सभी NJCS यूनियनों को मिले पत्रों में भी एरियर का कोई जिक्र नहीं था। इसके बावजूद दिसंबर 2021 में एरियर मिलने का भरोसा दिया गया, जो अब तक पूरा नहीं हुआ।
RIKKS ने दावा किया कि एरियर को लेकर 9 दिसंबर 2025 को हुई सब-कमेटी बैठक में SAIL प्रबंधन ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि MoU के आधार पर सब कुछ तय हो चुका है और अब कोई बकाया नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि 10वां NJCS समाप्त हो चुका है और यूनियनों को 2027 के लिए नया COD (Charter of Demand) देना चाहिए।
पर्चे में अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (INTUC, AITUC, HMS, CITU) पर भी सवाल उठाए गए हैं। RIKKS का कहना है कि यदि एरियर को लेकर गंभीरता है तो इन यूनियनों को अपने-अपने स्तर से अदालत का रुख करना चाहिए या फिर ओडिशा हाईकोर्ट में चल रहे RIKKS के केस में पार्टी बनना चाहिए।
यूनियन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि आज एरियर का मुद्दा नहीं सुलझा, तो यह भविष्य में एक परंपरा बन जाएगी और आने वाले 2027 वेज बोर्ड में भी प्रबंधन इसी आधार पर हस्ताक्षर के दिन से वेतन बढ़ोतरी लागू करने की बात कहेगा।
RIKKS ने अंत में दो टूक कहा है कि कर्मचारियों के एरियर की लड़ाई अब सिर्फ कानूनी रास्ते से ही जीती जा सकती है, और कर्मचारियों को किसी भी तरह के झूठे प्रचार से सावधान रहने की जरूरत है।











