सेक्टर-9 अस्पताल बचाएं और अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा को सुरक्षित रखें। निजी हाथों में क्यों सौंपा जा रहा है? प्रबंधन जवाब दे।
- 29 जून 2026 से सेक्टर-9 अस्पताल बचाओ जनसंपर्क अभियान प्रारंभ।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट द्वारा संचालित सेक्टर 9 हॉस्पिटल को बचाने का अभियान तेज हो गया है। बीएसपी की संयुक्त यूनियन ने प्लांट के अंदर जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। यह सफर टाउनशिप और बस्तियों तक जारी रहेगा।
29 जून से संयुक्त यूनियनों द्वारा भिलाई इस्पात संयंत्र के स्थायी कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों एवं उनके परिजनों के बीच व्यापक जनसंपर्क अभियान प्रारंभ किया गया। अभियान के तहत विभिन्न विभागों, टाउनशिप और आवासीय क्षेत्रों में पर्चे वितरित किए जा रहे हैं। छोटे-छोटे समूहों में बैठकें आयोजित कर सेक्टर-9 अस्पताल को निजी हाथों में सौंपने के प्रयासों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। संयुक्त यूनियनों ने प्रबंधन से सवाल किया है कि जब अस्पताल में सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं और वह हजारों परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार है, तो उसे निजी हाथों में सौंपने की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ रही है?
स्वास्थ्य नहीं, जीवन सुरक्षा का प्रश्न
भिलाई इस्पात संयंत्र का जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र (सेक्टर-9 अस्पताल) केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि कर्मचारियों, पेंशनरों एवं उनके परिवारों की जीवन सुरक्षा का मजबूत आधार है। इस अस्पताल का सार्वजनिक स्वरूप बनाए रखना केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के नागरिकों का साझा हित है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े क्या कहते हैं
भारत सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की 80वीं स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों का औसत जेब से खर्च मात्र ₹6,631 है, जबकि सभी प्रकार के अस्पतालों में यह औसत ₹34,064 तक पहुंच जाता है। यह स्पष्ट करता है कि सार्वजनिक अस्पताल आम लोगों को महंगे इलाज के आर्थिक बोझ से बचाते हैं।
सरकारी अस्पताल बनाम निजी अस्पताल : बड़ा अंतर
एनएसओ के अनुसार सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने वाले आधे से अधिक मरीजों का कुल खर्च ₹1,100 या उससे कम रहा। प्रसव सेवाओं सहित अधिकांश उपचारों में सरकारी अस्पतालों का खर्च निजी अस्पतालों की तुलना में काफी कम है। इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था केवल इलाज ही नहीं, आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान करती है।
निजीकरण से बढ़ सकती हैं कर्मचारियों की चिंताएं
यूनियन नेताओं का कहना है कि देश के अनेक पीपीपी मॉडल के अनुभव बताते हैं कि समय के साथ उपचार शुल्क और व्यावसायिक दबाव बढ़ते हैं। यदि सेक्टर-9 अस्पताल में भी ऐसा मॉडल लागू किया गया तो कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों एवं उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। स्वास्थ्य सेवा का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा करना है।
सेक्टर-9 अस्पताल की उपलब्धियों को नहीं भूलना चाहिए
अस्पताल में 3 टेस्ला एमआरआई जैसी आधुनिक सुविधाओं की स्थापना, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार तथा जनदबाव से ब्लड बैंक को सुरक्षित रखना इस बात का प्रमाण है कि यह अस्पताल आज भी क्षेत्र की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम है। ऐसे अस्पताल को कमजोर करने के बजाय और अधिक सशक्त बनाया जाना चाहिए।
संयुक्त यूनियनों ने सभी कर्मचारियों, अधिकारियों, पेंशनरों, उनके परिवारों एवं आम नागरिकों से इस जनसंपर्क अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा है कि “जब सरकारी अस्पताल मजबूत होते हैं, तब परिवार सुरक्षित होते हैं। जब स्वास्थ्य सेवा बाजार के हवाले होती है, तब इलाज महंगा और असुरक्षित हो जाता है। आइए, सेक्टर-9 अस्पताल बचाएं और अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा को सुरक्षित रखें।”

