भिलाई स्टील प्लांट की संयुक्त ट्रेड यूनियन इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, ऐक्टू, लोईमू, स्टील वर्कर्स यूनियन) संग भिलाईवासी सड़क पर।
- निजीकरण क्यों करना चाहते हो, जवाब दो..।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट द्वारा संचालित सेक्टर-9 अस्पताल के निजीकरण के विरोध में 14 जुलाई को बड़ा आंदोलन हुआ। संयुक्त ट्रेड यूनियन के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों, महिलाओं, युवाओं तथा बच्चों ने भाग लेकर स्पष्ट संदेश दिया कि सार्वजनिक अस्पताल को किसी भी कीमत पर निजी हाथों में नहीं सौंपने दिया जाएगा।
प्रदर्शन में गूंजते नारों के बीच एक ही संकल्प दिखाई दिया। “तुम कोशिश करके देख लो, हम होने नहीं देंगे।” वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल कर्मचारियों की नहीं, बल्कि पूरे समाज के स्वास्थ्य अधिकार और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा की लड़ाई है। प्रदर्शन का आयोजन इंटक, एटक, एचएमएस सीटू, ऐक्टू, लोईमु एवं स्टील वर्कर्स यूनियन के संयुक्त ट्रेड यूनियन के बैनर तले आयोजित किया गया। प्रदर्शन के पश्चात अस्पताल प्रबंधन के माध्यम से निदेशक प्रभारी (भिलाई इस्पात संयंत्र) को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। इसकी प्रतिलिपि अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सेल) एवं इस्पात मंत्री को भेजा गया।
जिन्होंने संयंत्र बनाया, उनका बुढ़ापा बोझ नहीं
संयुक्त यूनियन नेताओं ने कहा कि जिन श्रमिकों ने अपनी पूरी जवानी भिलाई इस्पात संयंत्र के उत्पादन, विस्तार और विकास में लगा दी, आज वही लोग सेवानिवृत्ति के बाद अस्पताल की सुविधा लेने के कारण बोझ बताए जा रहे हैं। यह सोच न केवल अमानवीय है बल्कि उन लाखों श्रमिकों के योगदान का अपमान भी है, जिन्होंने अपने श्रम से इस सार्वजनिक उपक्रम को खड़ा किया। अस्पताल उनकी मेहनत की कमाई से बनी व्यवस्था है, किसी पर किया गया उपकार नहीं।
हमारा सवाल-निजीकरण क्यों करना चाहते हो?
प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों का एक ही सवाल था? “निजीकरण क्यों करना चाहते हो, जवाब दो।” यदि अस्पताल घाटे में है तो उसके वास्तविक कारण क्या हैं? उसे बेहतर बनाने, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, आधुनिक उपकरणों का उपयोग और प्रबंधन सुधार की दिशा में क्या प्रयास किए गए? संयुक्त यूनियन ने मांग की कि प्रबंधन पारदर्शिता के साथ अपनी योजना सार्वजनिक करे और कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों तथा सभी हितधारकों से चर्चा करे।
व्यवस्था सुधारने के बजाय खत्म क्यों
यूनियन नेताओं ने कहा कि एक समय भिलाई इस्पात संयंत्र में 65 हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत थे। तब भी यही अस्पताल, टाउनशिप और शिक्षा व्यवस्था सफलतापूर्वक संचालित होती थी। आज कर्मचारियों की संख्या कम होने और आधुनिक तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद भिलाई से लेकर दिल्ली तक का प्रबंधन इन व्यवस्थाओं को मजबूत करने के बजाय समाप्त करने की दिशा में बढ़ रहा है। यह जनहित नहीं बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था को कमजोर करने की नीति है।
मुनाफे के तराजू पर स्वास्थ्य नहीं तौला जा सकता
संयुक्त यूनियन ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसी सेवाओं का मूल्य केवल लाभ-हानि के आधार पर नहीं आंका जा सकता। अस्पताल का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं बल्कि जीवन बचाना है। यदि हर सार्वजनिक सेवा को लाभ के पैमाने पर तौला जाएगा तो समाज के कमजोर, गरीब और जरूरतमंद वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इसलिए अस्पताल को सार्वजनिक स्वरूप में और अधिक मजबूत किया जाना चाहिए।
महिलाओं और बच्चों की भागीदारी ने दिया मजबूत संदेश
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में गृहिणियों, बच्चों और परिवारों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि अस्पताल का प्रश्न केवल कर्मचारियों का नहीं बल्कि पूरे समाज का प्रश्न है। परिवारों ने कहा कि बीमारी किसी वर्ग, जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति को देखकर नहीं आती। इसलिए सभी नागरिकों के लिए सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और किफायती सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा बनाए रखना सरकार और प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
संघर्ष जारी रहेगा, अस्पताल बचेगा
संयुक्त ट्रेड यूनियन ने घोषणा की कि सेक्टर-9 अस्पताल के निजीकरण के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से लगातार विरोध किया जाएगा। यूनियन ने सभी कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से अस्पताल को निजी हाथों में जाने से बचाने के लिए जारी इस जनहित के आंदोलन में शामिल होते रहने का आह्वान किया।
यूनियन ने दोहराया कि सार्वजनिक अस्पतालों की रक्षा करना पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। इसीलिए जन एकता और व्यापक जनसमर्थन के बल पर सेक्टर-9 अस्पताल को निजीकरण से बचाया जाएगा और इसे पहले से अधिक मजबूत बनाने की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

