पार्षद वशिष्ठ नारायण मिश्र के पिता शैलेंद्र नारायण मिश्र भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारी थे। भिलाई निवास में कार्यरत थे।
- सेक्टर 2 स्थित आवास पर आखिरी सांस ली। 27 अगस्त को रामनगर मुक्तिधाम में होगा अंतिम संस्कार।
- कांग्रेस से सियासी सफर शुरू किया, लेकिन चुनाव लड़ते रहे निर्दलीय।
- छत्तीसगढ़ के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय के रहे करीबी।
अज़मत अली, भिलाई। भिलाई की सियासत ने एक होनहार नेता को खो दिया है। जिसने लोगों की मदद के लिए शादी तक नहीं की। भिलाई को परिवार बनाया और सुख-दुख में खड़े नज़र आए। लगातार पांच बार के पार्षद वशिष्ठ नारायण मिश्र के निधन की खबर से हर कोई गमगीन हो गया। हर चुनाव जीतने वाले वशिष्ठ नारायण गंभीर बीमारी की वजह से जिंदगी की जंग हार गए। 52 साल की उम्र में बुधवार सुबह सेक्टर 2 स्थित आवास में अंतिम सांस लेने से पहले भाई स्वरूप नारायण मिश्र को गले से लिपटाया और आंखों में आंसू आ गए। चंद मिनट में ही सांस थम गई और हर तरफ मातम छा गया। शव को सेक्टर 9 हॉस्पिटल की मरच्यूरी में रखा गया है। गुरुवार 27 अगस्त को दोपहर 12 बजे शव यात्रा रामनगर मुक्तिधाम के लिए निकाली जाएगी।
भिलाई स्टील प्लांट से ये रहा नाता
- पार्षद वशिष्ठ नारायण मिश्र के पिता शैलेंद्र नारायण मिश्र भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारी थे। भिलाई निवास में कार्यरत थे।
- बिहार के सहरसा के रहने वाले शैलेंद्र नारायण मिश्र भिलाई आए और यहीं बस गए। मिथिलांचल के मूल वशिष्ठ नारायण का जन्म भिलाई में हुआ। मैथिली ब्राह्मण थे।
- तीन भाई और तीन बहन हैं। पांचवे नंबर पर थे। सेक्टर 2 के सड़क 6 वार्टर नंबर 6ए में बचपन गुजरा है।
- विवेकानंद विद्यालय सेक्टर 2 से पढ़ाई की।
- पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। भिलाई टाउनशिप में पढ़े-बढ़े। इसलिए भिलाई स्टील प्लांट के मुद्दों और लोगों के लिए खड़े रहते थे।
- श्रीराम जन्मोत्सव समिति के अध्यक्ष व प्रेम प्रकाश पांडेय के पुत्र मनीष पांडेय बताते हैं कि वशिष्ठ नारायण मिश्र हमेशा संघर्षों के लिए तैयार रहते थे।
- एचएसएलटी श्रमिकों के हक की लड़ाई में टाउनशिप की सड़क को जाम करने में वह भी सहभागी रहे। उनका निधन अत्यंत पीड़ादायक एवं अपूरणीय क्षति है। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें एवं शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में दुःख सहने की शक्ति और संबल प्रदान करें।
- भिलाई चेंबर अध्यक्ष गार्गी शंकर मिश्र बताते हैं कि वशिष्ठ नारायण मिश्र बीएसपी से बहुत करीब थे। गहरी पकड़ रखते थे। कर्मचारियों के मुद्दों को लेकर लड़ते थे।
- रवि आर्या के साथ अक्सर आंदोलनों में नज़र आते थे। सेक्टर 9 हॉस्पिटल में मदद के लिए आगे रहते थे। इलाज में छूट, बच्चों की पढ़ाई में योगदान दिए।
- अलग-अलग माध्यमों से सहयोग लेकर मदद करते रहे। भिलाई नगर निगम को करोड़ों के नुकसान से बचाए। कई कानूनी अड़चनों से बचाए।

देवेंद्र यादव के खिलाफ लड़े थे मेयर का चुनाव
वशिष्ठ नारायण मिश्र साल 2015 में महापौर का चुनाव भी लड़े थे। देवेंद्र यादव चुनाव जीत गए थे। आज निधन की खबर लगते ही विधायक देवेंद्र यादव ने कहा-वशिष्ठ नारायण मिश्रा जी के आकस्मिक निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है।
जनसेवा के क्षेत्र में उनका समर्पण, सरल व्यवहार और आमजन के साथ उनका आत्मीय जुड़ाव सदैव स्मरण किया जाएगा। उनके निधन से भिलाई ने एक अनुभवी, समर्पित एवं लोकप्रिय जनसेवक को खो दिया है। उनके योगदान और सेवाभाव की स्मृतियाँ सदैव हमारे बीच जीवित रहेंगी। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार एवं शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।

हर बार अलग-अलग वार्ड से चुनाव लड़े और जीते
स्व. वशिष्ठ नारायण मिश्र के करीबी अली असगर बताते हैं कि निगम गठन के बाद पहला चुनाव सन 2000 में वार्ड 39 सेक्टर 1 से निर्दलीय लड़े थे। दूसरी बार सेक्टर 3 से, तीसरी बार सेक्टर 2 दक्षिण वार्ड, चौथी बार भी सेक्टर 1 से लड़े। उसी समय महापौर चुनाव लड़े थे। 59 हजार वोट पाए थे। मेयर चुनाव देवेंद्र यादव जीते थे। पांचवीं बार सेक्टर 1 से चुनाव लड़े थे।
थे कांग्रेसी, लेकिन पार्टी लाइन से अलग, पांडेय जी से नजदीकी
पार्षद पियूष मिश्र बताते हैं कि राजनीति में अलग मुकाम रखने वाले वशिष्ठ नारायण मिश्र का सियासी सफर कांग्रेस से शुरू हुआ था। लेकिन, पार्टी लाइन को नहीं मानते थे। जो अच्छा काम करता, उसका खुलकर साथ देते। भाजपा के दिग्गज नेता प्रेम प्रकाश पांडेय के करीबी रहे। तत्कालीन मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय, वशिष्ठ नारायण मिश्र के आयोजनों में शामिल होते थे। साल 2005 के बाद से पार्टी लाइन छोड़ दिए। पहली बार निर्दलीय पार्षद बने तो उस समय कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री रहे। लेकिन, पार्टी से टिकट मांगा ही नहीं। सियासी सफर की शुरुआत एनएसयूआई से की थी। 1992 में एनएसयूआई भिलाई अध्यक्ष थे। यूथ कांग्रेस में महामंत्री रहे। प्रदेश महामंत्री भी रहे। बॉलीवाल के प्लेयर थे।

कैंसर नहीं था, होमियोपैथ की दवा लेते रहे, लेकिन…
स्व. वशिष्ठ नारायण मिश्र के करीबी अली असगर बताते हैं कि कैंसर की पुष्टि किसी भी जांच में नहीं हुई थी। पूर्व पार्षद को नेजल बोन में इंफेक्शन था। साइनस एरिया में पस भर गया था। किसी ने कैंसर की बात बोली थी। होमियोपैथ की दवा लेना शुरू किए थे। गुटखा बहुत खाते थे। 2018 में मुंबई में जांच कराए, कैंसर की पुष्टि नहीं हुई थी। जनवरी 2025 में बीमारी बढ़ती गई। केरल में ट्रीटमेंट शुरू हुआ।
वहां भी कैंसर की पुष्टि नहीं हुई थी। होमियोपैथ की सर्जिकल मेडिसीन लेते रहे। ये दावा था कि दवा का असर होगा और खराब हो चुके एरिया से गंदगी बाहर आ जाएगी। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं हुआ। दायें तरफ की आंख भी चपेट में आ गई। प्लास्टिक सर्जरी तक हुई। तीन दिन पहले वायरल हुआ। इंफेक्शन बढ़ गया। जिसकी वजह से बुधवार सुबह 10 बजे घर पर ही अंतिम सांस ली।

