बोकारो स्टील प्लांट के 7,200 गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के मुद्दे वर्षों से लंबित होने का आरोप। सेल कॉरपोरेट और बीएसएल प्रबंधन पर गुस्सा।
- यदि लंबित मांगों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर ठोस पहल नहीं होती है तो चरणबद्ध आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। बोकारो स्टील प्लांट में गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के लंबित मुद्दों को लेकर बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ (BAKS) ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। यूनियन की कार्यकारिणी की बैठक के बाद सेल कॉरपोरेट कार्यालय और बीएसएल प्रबंधन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की गई है। आंदोलन की शुरुआत कर्मचारियों के ब्लैक बैज लगाने से होगी और मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में मामला अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तक ले जाने की बात कही गई है।
यूनियन का दावा है कि बोकारो इस्पात संयंत्र में करीब 7,200 गैर-कार्यपालक कर्मचारी कार्यरत हैं और इनके सैकड़ों मुद्दे वर्षों से लंबित हैं। BAKS ने आरोप लगाया कि सेल और बीएसएल प्रबंधन की कथित उदासीनता के कारण कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सेल कॉरपोरेट से जुड़े 45 से अधिक मुद्दे लंबित
BAKS के मुताबिक, सेल के गैर-कार्यपालक कर्मचारियों से संबंधित 45 से अधिक मुद्दे सेल कॉरपोरेट कार्यालय, लोधी रोड, नई दिल्ली के स्तर पर लंबित हैं। यूनियन का आरोप है कि इनमें से कई मुद्दे करीब एक दशक से समाधान की प्रतीक्षा में हैं। इसी तरह बोकारो इस्पात संयंत्र और उसके विभिन्न विभागों से संबंधित 20 से अधिक मुद्दे भी कई वर्षों से लंबित बताए गए हैं। यूनियन का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर प्रबंधन को लगातार मांग और शिकायत पत्र दिए गए, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
औद्योगिक संबंधों को शून्य कर दिया गया
BAKS ने सेल कॉरपोरेट और बीएसएल प्रबंधन पर औद्योगिक संबंधों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। यूनियन के अनुसार, मानव संसाधन के उच्च अधिकारी और प्रबंधन न तो लंबित मुद्दों का निराकरण कर रहे हैं, न मांग पत्रों का जवाब दे रहे हैं और न ही यूनियनों के साथ नियमित बैठक कर समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारियों में भय का माहौल बनाने के लिए एकतरफा स्थानांतरण, निलंबन, इंक्रीमेंट कटौती और शो-कॉज नोटिस जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकारी विभागों को भी भेजे सैकड़ों पत्र
BAKS के अनुसार, यूनियन ने इस्पात मंत्रालय, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), धनबाद कार्यालय, लोक उद्यम विभाग और प्रधानमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न सरकारी मंचों पर सैकड़ों मांग एवं शिकायत पत्र भेजे हैं।
यूनियन का दावा है कि दस्तावेज और साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद कई मामलों में कर्मचारियों को अब तक न्याय नहीं मिला। कुछ मुद्दों को लेकर न्यायालय में भी मामले दायर किए गए हैं, लेकिन कई अन्य मांगें अभी लंबित हैं।
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चार चरणों में होगा आंदोलन
पहला चरण: बोकारो स्टील प्लांट के सभी कर्मचारी मांगों के समर्थन और प्रबंधन के कथित शोषणकारी रवैये के विरोध में ब्लैक बैज लगाएंगे।
दूसरा चरण: बीएसएल के विभिन्न विभागाध्यक्षों के कार्यालय के सामने विराट प्रदर्शन किया जाएगा।
तीसरा चरण: कर्मचारियों की ओर से मौन जुलूस एवं पदयात्रा निकाली जाएगी।
चौथा चरण: मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।
संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा
BAKS महासचिव हरिओम ने कहा कि बोकारो इस्पात संयंत्र के गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन के रूप में यूनियन ने अब तक विभिन्न स्तरों पर अपनी बात रखने का प्रयास किया है। उनके मुताबिक, कर्मचारियों के सामने अब अपने अधिकारों और लंबित मांगों के लिए संघर्ष करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
उन्होंने कहा कि यूनियन ने भारत सरकार के विभिन्न फोरमों के समक्ष सैकड़ों मांग और शिकायत पत्र दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत किए हैं। कई मामलों में न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन काफी मुद्दे अब भी लंबित हैं।
हरिओम ने कहा कि इसी वजह से यूनियन ने आंदोलन का रास्ता चुना है और इससे उत्पन्न होने वाली स्थिति की जिम्मेदारी सेल कॉरपोरेट कार्यालय और बीएसएल प्रबंधन की होगी।
दिल्ली में बैठे अधिकारी कर रहे कर्मचारियों का शोषण
BAKS उपाध्यक्ष कृष्ण रजवार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस तरह मुट्ठी भर अंग्रेज भारत के नागरिकों का शोषण करते थे, उसी तरह सेल के उच्च प्रबंधन के अधिकारी दिल्ली में बैठकर कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सैकड़ों मुद्दे लंबित हैं, लेकिन इसके बावजूद सभी स्तरों पर चुप्पी बनी हुई है। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि लंबित मांगों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर ठोस पहल नहीं होती है तो चरणबद्ध आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
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