भारत में नए श्रम कानून लागू होने के बाद पहला चुनाव SAIL ISP में। जीता BMS। केंद्रीय नेता हिमांशु शेखर बल ने नेताओं की लगाई पाठशाला।
- हाईटेक रहा बीएमएस का चुनाव प्रचार। कार्यकर्ताओं ने सभी कर्मियों से संवाद स्थापित करने के लिए दिन रात कड़ी मेहनत की।
अज़मत अली, भिलाई। भारत में नए श्रम कानून लागू होने के बाद पहला यूनियन चुनाव सेल के इस्को स्टील प्लांट में हुआ। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध यूनियन ने फतह हासिल की। लेकिन, सवाल ये है कि अब आगे क्या होगा…? कर्मचारियों से किए गए वादों पर कितना अमल होगा। क्या भिलाई की तरह चंदा-खोरी, वसूली, सीपीएफ ट्रस्ट में पदों की बिक्री, ठेकेदारों से धन-उगाही, गुटबाजी नज़र आएगी या नई और सच्ची सोच से कर्मचारियों के लिए प्रबंधन से टकराने का जज़्बा दिखेगा।
इस सवाल का जवाब बीएमएस के केंद्रीय नेता व राउरकेला इस्पात कारखाना कर्मचारी संघ के हिमांशु शेखर बल ने दे दिए है। उन्होंने-इस्को स्टील प्लांट में जीत के बाद बीएमएस कोर कमेटी सदस्यों की पाठशाला लगाई। स्पष्ट संदेश दिए कि भिलाई जैसी हरकत इस्को बर्नपुर में नहीं दोहराने देंगे। किसी तरह की कोई शिकायत अगर आती है तो उसी दिन यूनियन से पदाधिकारी बाहर कर दिए जाएंगे।
बीएमएस के इस्पात उद्योग के सह प्रभारी हिमांशु बल ने यह मैसेज इसलिए दिया कि भिलाई स्टील प्लांट में पहली बार बीएमएस को मान्यता प्राप्त यूनियन का दर्जा मिला था। चुनाव जीतते ही पदाधिकारियों के रंग नज़र आने शुरू हो गए थे। आज तक मुकदमेबाजी चल रही है। चार गुट में बीएमएस बंट चुकी है। इससे सबक लेने का संदेश सेल आइएसपी के बीएमएस नेताओं को दिए गए हैं।
युवाओं के हाथ में नेतृत्व है। इसलिए उनका मार्गदर्शन और नियंत्रित रखने का इंतजाम किया गया है। केंद्रीय कमेटी हर गतिविधियों पर नज़र रखेगी। केंद्रीय नेता की बातों को सुनने के बाद कोर कमेटी के सदस्यों ने कहा-दादा हम लोग इस मिजाज के नहीं है। अच्छा हुआ, आपने ये बात भी खुलकर बोल दी। आपको कोई शिकायत का मौका नहीं देंगे। हम सब पूरी ईमानदारी से कर्मचारी हित में काम करेंगे। जो वादा किए हैं, उसको करके दिखाएंगे।
बीएमएस की जीत में आखिर कौन-कौन से फैक्टर काम किए…
-कर्मियों की मांग पर आईएसपी ट्रेड यूनियन का चुनाव करवाने के लिए बीएमएस यूनियन का संघर्ष और इंटक को हटाने की आंधी रिजल्ट में साफ नज़र आई।
-कुछ यूनियन द्वारा चुनाव पर रोक लगाने के लिए किए गए प्रयास से माहौल और खराब हुआ। गुस्से के रूप में मतदान दिखा।
-बीएमएस यूनियन के युवा नेतृत्व के द्वारा विगत दिनों में आईसीपी प्रबंधन के खिलाफ किए जाने वाले जुझारू प्रयास और कामों ने कर्मियों का दिल जीता।
-हाईटेक रहा बीएमएस का चुनाव प्रचार, बीएमएस कार्यकर्ताओं ने सभी कर्मियों से संवाद स्थापित करने के लिए दिन रात एक कर कड़ी मेहनत की, जो कि अहम रहा।
-बीएमएस यूनियन के पास ऊर्जावान और पढ़ें-लिखे कार्यकर्ताओं की ही टीम थी, जिसने आईसीपी में दशकों से चले आ रहे मजबूत यूनियन और बड़े बड़े नेतृत्व की कुर्सी हिला दी, बाकी सभी अन्य एनजेसीएस यूनियन का तो सुपड़ा साफ हो गया। कोई 6% तो कोई तो 1% से भी नीचे आ गई।
-इंटक लगातार हार का सामना कर रहा है। इंटक मिडटाउन क्लब, भारती भवन, बर्नपुर क्रिकेट क्लब, को ऑपरेटिव चुनाव में पराजय पर पराजय झेल रही। यूनियन बचाने के लिए इंटक जैसी बड़ी यूनियन को बदलाव और आत्म समीक्षा करने की जरूरत है।
-अन्य यूनियन की तुलना में सभी कर्मियों ने बीएमएस पर अटूट विश्वास और भरोसा जताया।
बीएमएस के ये रहे धुरंधर
सेल आइएसपी यूनियन चुनाव में बीएमएस की जीत के लिए हर पदाधिकारियों ने पूरी ताकत झोंकी। हर सदस्यों ने इसे खुद के अस्तित्व से जोड़ा। पदाधिकारी दिन-रात बस एक ही अभियान में जुट रहे कि बीएमएस को विजेता बनाना है। अध्यक्ष अजय सिंह, महामंत्री संजीत बनर्जी, फेडरेशन सदस्य अमित सिंह, ठेका यूनियन के महामंत्री संजीत प्रसाद, श्रीकांत साह, संतोष झा, सचिन कुमार, प्रभात कुमार, अंकित अवस्थी, अरविंद शर्मा, आज्ञा हाजरा, दीपक सिंह, विजय कुमार, अशोक सिंह, दीवाकर दास, महेश बनर्जी, निखिलेश सिंह, प्रताप बारिक, रणधीर गुप्ता आदि के योगदान की तारीफ हो रही है।
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