नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित सम्मेलन में देशभर से मजदूर, किसान और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े संगठनों का सम्मेलन।
- सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का लिया संकल्प, 10 अगस्त को देशभर में प्रदर्शन।
- सम्मेलन के अंत में मजदूरों और किसानों की एकता को मजबूत करने तथा मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया गया।
सूचनाजी न्यूज, नई दिल्ली। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTU), क्षेत्रीय महासंघों एवं संघों और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के संयुक्त राष्ट्रीय सम्मेलन में मजदूरों और किसानों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का ऐलान किया है।
10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। यह कार्यक्रम भारत छोड़ो आंदोलन की स्मृति में आयोजित किया जाएगा। इसके तहत जिला और राज्य स्तर पर प्रदर्शन, रेल रोको, रास्ता रोको, कार्यस्थल पर विरोध प्रदर्शन, मानव श्रृंखला और शांतिपूर्ण जन लामबंदी के अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित सम्मेलन में देशभर से मजदूर, किसान और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन में मजदूरों, किसानों, छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक ताकतों की एकता मजबूत करने का आह्वान किया गया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने आर्थिक संकट, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और सेवाओं के निजीकरण, श्रम संहिताओं के जरिए ट्रेड यूनियन अधिकारों पर कथित हमले और किसानों की मांगों की अनदेखी समेत कई मुद्दे उठाए। विदेशी व्यापार समझौतों, लोकतांत्रिक स्थान के सिकुड़ने और लोगों को विभिन्न आधारों पर विभाजित करने के प्रयासों पर भी चिंता जताई गई।
मजदूर और किसान संगठनों ने कहा है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो आगे संयुक्त राज्य-स्तरीय सम्मेलन और विकेंद्रीकृत महापड़ाव आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही बड़े राष्ट्रव्यापी सीधे कार्रवाई कार्यक्रमों की तैयारी करने का भी निर्णय लिया गया है।
क्या हैं मजदूर-किसानों की प्रमुख मांगें
सम्मेलन में अपनाए गए घोषणापत्र में चार श्रम संहिताओं को रद्द करने, ट्रेड यूनियन अधिकारों की गारंटी और श्रम सुरक्षा बहाल करने की मांग की गई है। इसके अलावा महंगाई भत्ते से जुड़े ₹42,000 के वैधानिक न्यूनतम वेतन, C2+50 प्रतिशत पर गारंटीकृत MSP और सुनिश्चित खरीद, मजदूर-किसान विरोधी विदेशी व्यापार समझौतों को अस्वीकार करने तथा निजीकरण और नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 पर रोक लगाने की मांग उठाई गई है।
घोषणापत्र में मनरेगा को बहाल एवं मजबूत करने, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार, रोजगार सृजन, सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की रक्षा की मांग भी शामिल है। साथ ही कठोर कानूनों को वापस लेने और संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग की गई है।
सम्मेलन के अंत में मजदूरों और किसानों की एकता को मजबूत करने तथा मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया गया। संयुक्त रूप से जारी बयान में इसे मजदूर-किसान एकता और व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

