BSP के 250 डिप्लोमा इंजीनियरों के 25 लाख कहां गए? रावतपुरा यूनिवर्सिटी ने खोला भुगतान का राज़, नाम पर चुप्पी

Bhilai Steel Plant News: बीटेक प्रवेश के रेफरल अमाउंट पर बड़ा विवाद। DEAB की जांच कमेटी पहुंची यूनिवर्सिटी। एक व्यक्ति को वेंडर कोड से भुगतान की जानकारी। 5 लोग आरोपी बताए जा रहे।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल-भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के करीब 250 डिप्लोमा इंजीनियरों के बीटेक प्रवेश से जुड़े लगभग 25 लाख रुपये के रेफरल अमाउंट का मामला अब जांच के दायरे में आ गया है। यह रकम किसे मिली, किसके बैंक खाते में पहुंची और इसका वितरण कैसे हुआ? इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन, भिलाई (DEAB) की ओर से गठित जांच कमेटी ने रायपुर स्थित श्री रावतपुरा सरकार यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार से मुलाकात की।

बीएसपी डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के मुताबिक बैठक में यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। डिप्टी रजिस्ट्रार ने बताया कि रेफरल अमाउंट का भुगतान वेंडर कोड के माध्यम से एक व्यक्ति को किया गया है। हालांकि, उन्होंने उस व्यक्ति का नाम और बैंक खाते का विवरण साझा करने से इनकार कर दिया। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज होने और न्यायालय के माध्यम से आधिकारिक पत्र प्राप्त होने पर ही भुगतान से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।

इस खुलासे के बाद अब जांच कमेटी की नजर उन लोगों पर है, जिनके नाम इस पूरे मामले में सामने आए हैं। कमेटी संबंधित लोगों को बुलाकर उनका पक्ष सुनेगी और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। रावतपुरा यूनिवर्सिटी से लौटने के बाद जांच कमेटी के एक सदस्य ने खुलकर पूरी जानकारी लिखकर सोशल मीडिया पर साझा किया। डिप्लोमा कर्मचारियों को पूरी जानकारी से अवगत कराया गया है। 

19 अगस्त को बनी थी जांच कमेटी, अब तेज हुई पड़ताल

DEAB की ओर से इस मामले की पड़ताल के लिए 19 अगस्त 2026 को जांच कमेटी गठित की गई थी। कमेटी में मनोज ठाकुर, रवि भुइया, आशीष सेंगर, अभिलाष, मनीष, चुम्मन देवांगन, राजेश चौहान, नीरज टंडन, लूमेश, विनय उत्तम, भूपेंद्र पटेल, कृष्णा और नीरज चंद्राकर सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।

कमेटी का उद्देश्य वर्ष 2023-24 के बाद से अब तक बीटेक में प्रवेश लेने वाले BSP के डिप्लोमा इंजीनियरों से जुड़े रेफरल अमाउंट का पूरा हिसाब प्राप्त करना है। एसोसिएशन के अनुसार, इस मामले में करीब 250 डिप्लोमा इंजीनियर प्रभावित दायरे में हैं और कुल राशि लगभग 25 लाख रुपये बताई जा रही है। प्रवेश कराने के बदले में 10-10 हजार रुपए लेने का आरोप लगाया जा रहा है।

यूनिवर्सिटी ने बताई भुगतान की प्रक्रिया, लेकिन नाम नहीं खोला

रायपुर में हुई बैठक के दौरान डिप्टी रजिस्ट्रार ने जांच कमेटी को बताया कि यूनिवर्सिटी के बायलॉज और नियमों के तहत वे सीधे तौर पर यह जानकारी साझा नहीं कर सकते कि रेफरल अमाउंट किस व्यक्ति को और किस बैंक खाते में दिया गया।

हालांकि, उन्होंने भुगतान की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि राशि वेंडर कोड के माध्यम से एक व्यक्ति को दी गई है। संबंधित व्यक्ति की पहचान और भुगतान का पूरा ब्योरा देने से उन्होंने इनकार किया। यूनिवर्सिटी के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने और न्यायालय से आधिकारिक पत्र मिलने पर निम्नलिखित जानकारियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं। 

रेफरल अमाउंट किस व्यक्ति के खाते में गया?

संबंधित व्यक्ति का पूरा नाम क्या है?

कुल कितनी राशि का भुगतान किया गया?

भुगतान किस तारीख को हुआ?

किस बैंक खाते में रकम ट्रांसफर की गई?

5 लोगों के नाम जांच के दायरे में, कमेटी सुनेगी पक्ष

कमेटी की आगे की कार्ययोजना के अनुसार, इस मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन्हें जांच के लिए बुलाया जाएगा। उनसे पूछताछ की जाएगी और उनका पक्ष भी सुना जाएगा। इसके बाद जांच में मिले तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

एसोसिएशन की ओर से दी गई जानकारी में यह भी दावा किया गया है कि आरोपों के दायरे में आए लोगों में 50 प्रतिशत से अधिक एक यूनियन विशेष से जुड़े हैं। बता दें कि पैसे के बंटवारे आदि को लेकर विवाद भी हो चुका है। एक सदस्य को कई थप्पड़ मारे गए थे। इसका साक्ष्य सूचनाजी.कॉम के पास है। इस पर आधारित खबर जल्द आप पढ़ेंगे। 

DEAB की वर्तमान कमेटी को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

जांच कमेटी ने निर्णय लिया है कि पूरी पड़ताल के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर DEAB की वर्तमान कमेटी को सौंपी जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई का फैसला किया जाएगा। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि करीब 250 डिप्लोमा इंजीनियरों के रेफरल अमाउंट का पूरा हिसाब सामने लाना है। लगभग 25 लाख रुपये की इस राशि के भुगतान और वितरण की पारदर्शिता सुनिश्चित करना ही जांच का मुख्य उद्देश्य बताया गया है।

25 लाख रुपये का हिसाब कब आएगा सामने?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यूनिवर्सिटी ने जिसे वेंडर कोड के माध्यम से भुगतान किए जाने की बात कही है, आखिर वह कौन है? रकम कितनी थी और किन परिस्थितियों में भुगतान हुआ? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही रेफरल अमाउंट के पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी। फिलहाल जांच कमेटी अपनी पड़ताल आगे बढ़ा रही है। अब डिप्लोमा इंजीनियरों को इंतजार है कि उनके बीटेक प्रवेश से जुड़े रेफरल अमाउंट का पूरा हिसाब कब और कैसे सामने आता है।