Bhilai Steel Plant: नॉन वर्क्स ज़ोन में अब ये संभालेंगे सीटू की कमान, वेतन समझौता, एरियर संग लंबित मुद्दों पर तेज होगा संघर्ष

Bhilai Steel Plant List of Non-Works Zone CITU Leaders Released Struggle to Intensify on Pending Issues Including Arrears
  • सीटू के नॉन वर्क्स जोन का जोनल सम्मेलन संपन्न।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन सीटू भिलाई के नॉन वर्क्स जोन का जोनल सम्मेलन संपन्न हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता संतोष कुमार पुष्टि में किया। सम्मेलन में विशेष रूप से यूनियन के अध्यक्ष विजय कुमार जांगड़े, उपाध्यक्ष संतोष कुमार, डीवीएस रेड्डी महासचिव जगन्नाथ प्रसाद त्रिवेदी उपस्थित थे। सम्मेलन के शुरुआत में दिवंगत साथियों को याद कर श्रद्धांजलि दी गई।

नॉन वर्क्स जोन के संयोजक बने एलएन अग्रवाल एवं उप संयोजक आरके प्रसाद

नॉन वर्क्स जोन के जोनल सचिव एलएन अग्रवाल ने 3 वर्षों में किए गए कामकाज की समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिस पर साथियों ने चर्चा करने के बाद रिपोर्ट को पारित कर दिया। आगामी 3 वर्षों के लिए जोनल समिति हेतु नितिन कश्यप ने दस सदस्यों का प्रस्ताव रखा। जिसमें एलएन अग्रवाल, आरके प्रसाद, ओपी शर्मा, नितिन कश्यप, एमएल वर्मा, सुशील कुमार, मनीष यदु, बीआर बोरकर, पुरुषोत्तम रेड्डी रविशंकर दास शामिल थे।

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ओपी शर्मा ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्तावित समिति को चुन लिया। उसके पश्चात संयोजक पद हेतु लक्ष्मी नारायण अग्रवाल एवं उप संयोजक पद हेतु के नाम का प्रस्ताव रखा गया। उपस्थित साथियों ने इन्हें भी सर्वसम्मति से चुन लिया। तत्पश्चात यूनियन के त्रय वार्षिक सम्मेलन में भाग लेंने हेतु आर के प्रसाद, सुशील कुमार, रविशंकर दास एवं मनीष यदु को चुना गया।

हमले तेज हुए हैं तो संघर्ष भी होगा तेज

सम्मेलन के दौरान साथियों ने चर्चा करते हुए कहा कि 9 साल बीत जाने के बाद भी प्रबंधन ने वेतन समझौता पूर्ण नहीं किया है। ऊपर से चार श्रम कोड्स को थोप कर कर्मियों पर और बोझ बढ़ाने तथा गुलामी की दशा में पहुंचाने की तैयारी शुरू हुई है।

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किंतु प्रबंधन एवं देश के शासक वर्ग यह जान ले कि पहले 12 घंटा से 18 घंटा काम करवाने और मजदूरों का निर्मम शोषण करने की व्यवस्था थी, जिसके खिलाफ संघर्ष करके 8 घंटे के कार्य दिवस को हासिल किया गया। यदि फिर से 12 घंटे के कार्य दिवस करने एवं लड़ कर हासिल किए गए अधिकारों पर हमले होंगे तो अपने अधिकारों को बचाने के लिए संघर्ष भी तेज होंगे।

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