श्रम न्यायालय के आदेश के बाद रजिस्ट्रार ने ALC को दिए नए चुनाव कराने के निर्देश, बुधवार को घोषित कार्यकारिणी पर लगी रोक।
- इस पूरे मामले में सूचनाजी डॉट कॉम ने उप पंजीयक से बात की।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) भिलाई में बुधवार को घोषित नई कार्यकारिणी कोर्ट के फैसले के बाद विवादों में घिर गई है। छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक न्यायालय ने वर्ष 2023 और 2026 में हुए यूनियन चुनाव को शून्य घोषित कर दिया है। न्यायालय ने रजिस्ट्रार को अपनी निगरानी में नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया है।
कोर्ट के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ व्यवसायिक संघ के पंजीयक पैकरा ने सहायक श्रम आयुक्त (ALC) को दो माह के भीतर बीएमएस का नया चुनाव कराने का निर्देश जारी कर दिया है। न्यायालय का फैसला 22 जुलाई को आया था, जिसकी प्रति अब बीएमएस नेताओं को मिल गई है।
बुधवार को घोषित नई कार्यकारिणी में दिनेश पांडेय को महासचिव, प्रदीप पाल को अध्यक्ष और इंटक से बीएमएस में आए वंश बहादुर सिंह को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद इस कार्यकारिणी की वैधता समाप्त हो गई है। अब इन नेताओं के सियासी भविष्य पर भी सवाल उठ गए हैं। बता दें कि पिछले सप्ताह घोषित नई कमेटी के खिलाफ 40 से ज्यादा बीएमएस सदस्यों ने मोर्चा खोल दिया था। अरविंद पांडेय कानूनी लड़ाई अकेले ही लड़ रहे थे। अब नए समीकरण ने भिलाई स्टील प्लांट में बीएमएस की सियासत पर नई बहस छेड़ दी है।
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ऐसे शुरू हुआ था विवाद
भिलाई स्टील प्लांट में मान्यता चुनाव जीतने के बाद बीएमएस के भीतर विवाद शुरू हो गया था। अरविंद पांडेय ने संगठन में वित्तीय अनियमितताओं और धन उगाही के आरोप लगाए थे। उनका आरोप था कि सीपीएफ ट्रस्ट से जुड़े मामलों में पैसे लिए गए।
विवाद की शुरुआत वर्ष 2023 के संगठनात्मक चुनाव से हुई। 30 सितंबर 2023 को चुनाव की अधिसूचना जारी हुई। इसके बाद 3 अक्टूबर को अरविंद पांडेय गुट ने चुनाव कराया और उसका ई-फॉर्म रजिस्ट्रार के पास जमा कराया। वहीं 10 अक्टूबर 2023 को चन्ना गुट ने अलग चुनाव कराकर उसी दिन अपना ई-फॉर्म जमा कर दिया।
रजिस्ट्रार ने चन्ना गुट के ई-फॉर्म को मान्यता दे दी, जबकि अरविंद पांडेय के आवेदन को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ अरविंद पांडेय ने श्रम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने पहले भी लगाए थे प्रतिबंध
मामला न्यायालय पहुंचने के बाद कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए संगठन को नीतिगत फैसले लेने, ₹5 हजार से अधिक खर्च करने, किसी पदाधिकारी की नियुक्ति या हटाने पर रोक लगा दी थी। साथ ही संगठन के ऑडिट का भी आदेश दिया गया था।
अरविंद पांडेय का दावा है कि रजिस्ट्रार ने न्यायालय के इन आदेशों का पालन नहीं किया। वर्ष 2022-23 के ऑडिट की मांग भी अब तक लंबित रही। बाद में इस मामले में अवमानना का नोटिस भी जारी किया गया। करीब डेढ़ वर्ष तक औद्योगिक न्यायालय में न्यायाधीश नहीं होने के कारण सुनवाई में देरी हुई। अब न्यायालय ने अंतिम फैसला सुनाते हुए 2023 का चुनाव और उसके आधार पर गठित वर्तमान व्यवस्था को निरस्त कर दिया है।
नए चुनाव में कई दावेदारों पर संकट
अरविंद पांडेय का कहना है कि अब 2022 की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर नया चुनाव कराया जाएगा। ऐसे में हाल ही में खुद को पदाधिकारी घोषित करने वाले कई नेता चुनाव लड़ने के पात्र नहीं रह सकते। उनका कहना है कि दिनेश पांडेय उस समय प्रदेश कमेटी में थे और भिलाई इकाई के सदस्य नहीं थे। वहीं वंश बहादुर सिंह, जो इंटक छोड़कर बीएमएस में शामिल हुए हैं, उनकी सदस्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
उप पंजीयक ने क्या कहा
इस पूरे मामले में सूचनाजी डॉट कॉम ने उप पंजीयक से बात की। उन्होंने बताया कि सहायक श्रम आयुक्त (ALC) को दो माह के भीतर चुनाव कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन कराया जाएगा।

