- कर्मियों के पैसे को लगातार बाजार के हवाले कर रही है केंद्र सरकार।
- कर्मियों के सहमति के बिना नहीं किया जा सकता है फंड ट्रांसफर।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल कर्मचारियों और अधिकारियों की जमा पूंजी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। एसईएसबीएफ को बंद करने के निर्णय के विरोध में सीटू ने प्रदर्शन किया। सेल के निदेशक कार्मिक को संबोधित मांग पत्र आइआर विभाग को सौंप दिया।
एसईएसबीएफ के प्रबंध न्यासियों की 2 फरवरी 2026 को कोलकाता में हुई 86वीं बैठक की कार्यवाही एवं उसके बाद प्रबंधन द्वारा जारी किये गए परिपत्र संख्या HR/IT B & Med./SESBF–NPS दिनांक 05.03.2026. पर कड़ी आपत्ति करते हुए सीटू ने बोरिया गेट में प्रदर्शन किया। औद्योगिक संबंध विभाग, भिलाई इस्पात संयंत्र के माध्यम से सेल के निदेशक कार्मिक को दिये पत्र में लिखकर इस विषय पर तत्काल NJCS की बैठक बुलाकर कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
क्यों बनाया गया था एसईएसबीएफ
सेल के कामगारों को सेवानिवृत्ति के बाद केवल सीपीएफ ग्रेच्युटी मिलता था। पेंशन का कोई भी प्रावधान नहीं था। पेंशन के उद्देश्य से लंबे विचार विमर्श एवं 1994 में NJCS मंच में उठाई गई लगातार मांगों के फलस्वरूप एक सामाजिक सुरक्षा उपाय के रूप में एसईएसबीएफ ट्रस्ट 25 सितंबर 1994 को SAIL के कर्मचारियों के हितार्थ अस्थित्व में आया और उसी दिन एस ई एस बी एफ ट्रस्ट का गठन सेल तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, सेफी और संयंत्रों की मान्यता प्राप्त यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच संपन्न हुआ था।
यह कोष मुख्य रूप से सदस्यों के मासिक वेतन से 2% अंशदान द्वारा तथा कुछ अवसरों पर कंपनी द्वारा पीएलबीएस के नाम पर योगदान से बनाया गया था। उक्त कोष का संचालन ट्रस्ट डीड एवं विधिवत निर्मित और लागू ट्रस्ट नियमों के प्रावधानों के अनुसार न्यासी मंडल द्वारा किया जाता रहा है। वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दर 8.0% घोषित की गई, जो पिछले वर्ष के समान है।
एसईएसबीएफ के मासिक अंशदान, कोष को एनपीएस में डालने का सीटू ने किया था कड़ा विरोध
15 जुलाई 2024 को आयोजित एसईएसबीएफ की 84वीं बैठक में एसईएसबीएफ के मासिक अंशदान एवं कोष को एन शपीएस में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसका सीटू/एसडब्लूएफआई के प्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध किया। स्पष्ट विरोध के बावजूद, यही प्रस्ताव 3 सितंबर 2025 को आयोजित ट्रस्ट बैठक में पुनः प्रस्तुत किया गया। हमने पुनः अपना विरोध दर्ज कराया और अध्यक्ष, एसईएसबीएफ को लिखित रूप में सूचित किया।
यूनियन का कहना है कि इसके बावजूद, प्रबंधन ने अपनी जिदपूर्ण स्थिति बनाए रखी और 2 फरवरी 2026 को आयोजित ट्रस्ट बैठक में एसईएसबीएफ को समाप्त करने का प्रस्ताव दोहराया। इस प्रस्ताव पर कोई सहमति नहीं बन सकी, किंतु बाद में प्रबंधन द्वारा आपत्तिजनक कार्यवाही विवरण (रिकार्ड नोट) और उपर्युक्त परिपत्र जारी कर एसईएसबीएफ को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
एनजेसीएस ही अधिकृत है ऐसे महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय लेने के लिए
सीटू नेता ने पत्र में सेल के निदेशक कार्मिक से कहा कि हम आपका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहते हैं कि एसईएसबी एफ ट्रस्ट नियमों के अनुसार न्यासीगण स्वयं किसी प्रबंध समिति का गठन कर ट्रस्ट को बंद करने की प्रक्रिया तय करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
इस प्रकार का कोई भी निर्णय या उसके पश्चात की कार्रवाई ट्रस्ट डीड के विरुद्ध तथा अवैध है, जिनका कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसीलिए केवल एनजेसीएस ही ऐसे महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत है।
कर्मियों के सहमति के बिना नहीं किया जा सकता है फंड ट्रांसफर
प्रदर्शन के दौरान सीटू महासचिव टी. जोगा राव ने कहा कि पिछले 15 दिनों से शेयर मार्केट लगातार गिर रहा है। लोगों के 62 लाख करोड़ रुपए मार्केट में डूब चुका है। ऐसे में एसईएसबीएफ ट्रस्ट को बंद करके उसके पैसे को एनपीएस में डालने का मतलब है कि हमारे मेहनत का पैसा जो एकत्रित होकर 2400 करोड रुपए जमा है, उसको बाजार जोखिम के हवाले कर देना है। और इस विषय पर प्रबंधन ना तो सर्वसम्मति बन पाया है। ना ही उन कर्मचारियों से पूछना अथवा विकल्प देना चाहता है जिनका पैसा एकत्रित होकर इस फंड में जमा हुआ है।
कर्मियों के पैसे को लगातार बाजार के हवाले कर रही है केंद्र सरकार
सीटू नेता डीवीएस रेड्डी ने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार लगातार कर्मियों के पैसे को बाजार के हवाले कर रही है। इसने सबसे पहले सीपीएफ के पैसे में से 5% से 15% तक मार्केट में डालने का निर्णय लेकर सभी एक्ज़म्प्टेड ट्रस्ट पर थोप दिया। उसके बाद सेल के कामगारों के लिए बना पेंशन ट्रस्ट को समाप्त करवा कर कर्मचारियों के 6% एवं अधिकारियों के 9% से जमा हो रहे फंड को एनपीएस में डलवा दिया अब एसईएसबीएफ के पैसे को भी एनपीएस के हवाले कर देना चाहता है।
















